‘शादी करनी चाहिए’, इसलिए शादी नहीं करनी मुझे

Posted by Rachana Priyadarshini
October 5, 2017

Self-Published

कुछ दिनों पहले मुझसे मेरे एक मित्र ने सवाल किया- ”तुमने अब तक शादी क्यों नहीं की?” सच कहूं तो मुझे इस तरह के सवालों से बहुत कोफ्त होती है, क्योंकि मेरा मानना है शादी करना या न करना किसी इंसान की जिंदगी का बेहद निजी मसला है। उसे मर्जी है तो करे और अगर मर्जी नहीं है, तो न करे, इसलिए मैंने अपने मित्र को टालने के लिहाज से कह दिया-”बस कोई मिला सुटेबल च्वाइस मिला नहीं, तो नही की।” इस पर मित्र का दूसरा सवाल- ”एक बात बताओ क्या कभी तुम्हारा मन नहीं होता सेक्स करने का?” मुझे अचानक से मित्र द्वारा यह प्रश्न पूछने पर थोड़ी हैरानी हुई क्योंकि इससे पहले हमारे बीच कभी इन मुद्दों पर इतनी बेबाकी से चर्चा नहीं हुई थी (शायद हमारे सोशल टैबू की वजह से), पर बुरा नहीं लगा। मेरा मानना है कि दुनिया में मित्रता ही एक ऐसा रिश्ता होता है, जिसमें आप खुल कर किसी भी मुद्दे पर बातचीत कर सकते हैं, वरना बाकी हर रिश्ते के साथ कुछ-न-कुछ सीमाएं होती हैं। वैसे भी इस तरह के मुद्दों के विषय में स्त्री-पुरुष की सीमाओं से परे एक स्वस्थ परिचर्चा होनी बेहद जरूरी है।
यही सोच कर मैंने अपना मत रखा- ”देखो दोस्त शादी-ब्याह, धर्म-अधर्म या सामाजिक नियमों या परंपराओं में मेरा बहुत ज्यादा कुछ यकीन नहीं है, इसलिए अगर तुम यह जानना चाहते हो कि मैंने अब तक शादी क्यों नहीं की, तो मैंने इसलिए नहीं की क्योंकि लोगों के अनुसार ‘हर इंसान को शादी करनी चाहिए.’ मेरे लिए शादी सामाजिक मान्यताओं के दायरे में रहते हुए शारीरिक सुख पाने का जरिया मात्र नहीं है, बल्कि मेरे लिए यह मानसिक सुख का जरिया भी होना जरूरी है। शारीरिक सुख तो इन्सान को बाजार में पैसे खर्च करके भी मिल सकता है, परंतु मानवीय संबंधों की असली महत्व तभी है, जब आपको ये दोनों ही चीजें एक ही इन्सान से प्राप्त हों और तभी ही इनकी गरिमा भी बनी रहती है।
मैंने कई ऐसे पति-पत्नियों को देखा है, जो एक-दूसरे के साथ केवल इसलिए रह रहे हैं, क्योंकि समाज द्वारा मान्यता प्राप्त विधि-विधानों के अनुसार उन्हें ‘ मरते दम तक एक-दूसरे के साथ रहना चाहिए’ भले ही उनके बीच के सारे अहसास कब के मर चुके हों। इस तरह के रिश्ते में पति-पत्नी शारीरिक रूप से भले साथ हों, पर उनका मन कहीं और होता है। कुछ वैसा ही जैसा किसी ग्राहक और वेश्या के बीच की स्थिति होती है। दोनों मात्र शारीरिक क्षुधापूर्ति करवाने और करने के उद्देश्य से जुड़े होते हैं। उनके बीच किसी तरह का मानसिक जुड़ाव नहीं होता। उन्हें देख कर ऐसा लगता है मानो सामाजिक संस्कार के नाम पर दो लोगों को एक ऐसे खूंटे से बांध दिया गया है, जहां एक साथ जीवन व्यतीत करना उनकी खुशी नहीं, मजबूरी है।

मेरा मानना है कि कोई भी पति एक पत्नी के शरीर पर मात्र इसलिए हक नहीं जमा सकता कि उसने उससे विवाह किया है। इसी तरह कोई भी पत्नी अपने पति की हर बात केवल इसलिए नहीं मान सकती, क्योंकि वह उसका पति है. दोनों के लिए एक-दूसरे की भावनाऔं को समझना और उसका सम्मान करना एक खुशहाल परिवार की नींव के लिए बहुत जरूरी है। जबरदस्ती का शारीरिक संबंध न तो शारीरिक सुख दे सकता है और न ही मानसिक स्तर पर आपसी रिश्तों को मजबूती प्रदान कर सकता है। दरअसल हमारे तथाकथित ‘सभ्य समाज’ की प्रॉब्लम यह है कि इसने सेक्स को हमेशा शारीरिक सुख का साधन माना है, जबकि सेक्स की प्रक्रिया तो शारीरिक व मानसिक अभिव्यक्ति की कुदरती माध्यम है। इसकी उत्पत्ति मन व मस्तिष्क से होती है. शरीर तो मात्र इसकी पूर्ति का माध्यम है। जिस रिश्ते का मन-मस्तिष्क जितना स्वस्थ्य और परिपक्व होगा, उसकी सेक्स अभिव्यक्ति भी उतनी ही आनंदमय होगी। सेक्स प्रक्रिया में पुरूष को आनंद और स्त्री को चरमसुख प्राप्त होना उनके सम्पूर्ण वैवाहिक जीवन का एक रोचक व जरूरी हिस्सा है। सेक्सोलोजिस्ट भी मानते हैं कि सेक्स आनंद प्राप्त करने के लिए सबसे महत्तवपूर्ण है. इसके प्रति मन में कोई रूढिवादी विचार या भ्रांति नहीं रखनी चाहिए, क्योकि इसका सीधा संबंध व्यक्ति के मन-मस्तिष्क से होता है। यदि सेक्स सुख व आनंद की अनुभूति मन मस्तिष्क को अनुभव न हो, तो यह शारीरिक प्रक्रिया स्त्री-पुरूष दोनों के लिए ही कष्टप्रद व तनावपूर्ण बन जाती है। शायद यही वजह है कि ऐसे रिश्ते कुछ वक्त के बाद जिंदगी पर एक बोझ बन कर रह जाते हैं, जिन्हें जीया नहीं जा सकता, बल्कि सिर्फ ढोया जा सकता है और मैं अपने रिश्तों को जीने में यकीन रखती हूं, ढोने में नहीं। बिना शादी-ब्याह की औपचारिकता निभाये भी अगर दो लोग एक-दूसरे के प्रति गहरा विश्वास और समर्पण महसूस करते हों, तो दुनिया में उस रिश्ते से बढ़ कर दूसरा कोई खूबसूरत रिश्ता हो ही नहीं सकता।”
मैंने देखा मित्र अवाक बैठा मुझे देख रहा है। मैंने पूछा-”आइ होप अब तुम्हारे सवाल का जबाव मिल गया होगा?” इस पर वह हल्के से मुस्कुरा दिया।”

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