2अक्टूबर: हमारे “शास्त्री जी”

Posted by Vaishali Pandey
October 4, 2017

Self-Published

हमारे “शास्त्रीजी”

लाठी वाला मिसाल है, शास्त्री जीवन मुहाल है,
राजनेता आज बेेहाल हैं, जीवन आज हलाल है ।
बिना मुखौटा जीवन सारा, ताशकन्द से भारत तारा,
रेल-गृह मंत्री तुम बन गए, शिव स्थली से तुम जन गए,
चित्र नोट पर है इतराया, संकट आज घोर गहराया
अंग्रेजों का रुधिर सुखाया, भारत को आज़ाद कराया ।
नाबालिक का तमगा पहना, जेल बना तुम्हारा गहना,
परिवहन का व्यूह चलाया, स्त्री का अधिकार दिलाया ।
तुम्हें नमन बारम्बार है, वैशाली का नमस्कार है,
लाठी वाला मिसाल है, शास्त्री जीवन मुहाल है,
राजनेता बेहाल हैं, जीवन आज हलाल है । ।

 

 

बिना मुखौटा जीवन सारा, ताशकन्द से भारत तारा,
रेल-गृह मंत्री तुम बन गए, शिव स्थली से तुम जन गए,
चित्र नोट पर है इतराया, संकट आज घोर गहराया
अंग्रेजों का रुधिर सुखाया, भारत को आज़ाद कराया ।
नाबालिक का तमगा पहना, जेल बना तुम्हारा गहना,
परिवहन का व्यूह चलाया, स्त्री का अधिकार दिलाया ।
तुम्हें नमन बारम्बार है, वैशाली का नमस्कार है,
लाठी वाला मिसाल है, शास्त्री जीवन मुहाल है,
राजनेता हाल बेहाल हैं, जीवन आज हलाल है ।

 

 

भारत तारा,
रेल-गृह मंत्री तुम बन गए, शिव स्थली से तुम जन गए,
चित्र नोट पर है इतराया, संकट आज घोर गहराया
अंग्रेजों का रुधिर सुखाया, भारत को आज़ाद कराया ।
नाबालिक का तमगा पहना, जेल बना तुम्हारा गहना,
परिवहन का व्यूह चलाया, स्त्री का अधिकार दिलाया ।
तुम्हें नमन बारम्बार है, वैशाली का नमस्कार है,
लाठी वाला मिसाल है, शास्त्री जीवन मुहाल है,
राजनेता बेहाल हैं, जीवन आज हलाल है ।

 

 

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