पत्नी चुनाव जीतती है, फिर भी पति ही सरपंच बना घूमता है

संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के खिलाफ श्रीमती सुषमा स्वराज जी का ओजस्वी भाषण देखकर देश-प्रदेश की कितनी ही महिलाओं ने कुछ ना कुछ ज़रूर सोचा होगा। पिछले पखवाड़े हमारी रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमन द्वारा चीनी सैनिकों के बीच नमस्कार भाव से सुर्खियों में आने के बाद एक बार फिर कितनी ही महिलाओं ने कुछ ना कुछ तो सोचा ही होगा।

हमारे देश के संविधान के हिसाब से महिलाओं को लोकतंत्र में प्रतिनिधित्व करने का अवसर प्राप्त है तभी तो हमारे देश को स्वर्गीय इंदिरा गांधी, श्रीमती सुषमा स्वराज, रक्षामंत्री निर्मला सीतारमन, पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल आदि जैसी कई बड़ी नेत्री मिली हैं।

लेकिन समस्या ये है कि उनकी कोई नहीं सुन रहा है जो अपना कद, अपनी आवाज़ दुनिया के सामने लाने के लिए बेताब हैं। हमारे देश का ह्रदय गांवों में बसता है और देश की राजनीति भी अधिकांश गांवों में सरपंच से ही प्रारम्भ होती है। मध्य प्रदेश में ग्राम पंचायत चुनावों में महिलाओं को 50℅ आरक्षण प्राप्त है। यहां महिलाओं को प्रतिनिधित्व भी मिलता है और पद भी, लेकिन उनकी असल भूमिका सिर्फ एक हस्ताक्षर करने तक ही सीमित रह जाती है।

मध्य प्रदेश में सरपंच पतियों की तादाद बहुत ज़्यादा है। जो असल में सरपंच हैं, लोग उनका नाम तक नहीं जानते लेकिन सरपंच पतियों ने अपनी धाक कुछ ऐसे जमा रखी है जैसे वो ही सर्वेसर्वा हैं। देश और प्रदेश की राजनीती के सामने यह एक बड़ा प्रश्न है। यहां भी महिलाओं को बोलने नहीं दिया जा रहा है।

इन सबके बीच मध्य प्रदेश के गुना ज़िले के एडीएम और प्रभारी सीईओ श्री नियाज़ खान ने वो काम कर दिखाया है जो मेरे हिसाब से देश की केंद्र सरकार भी नहीं कर पा रही है।

नियाज़ खान के अनुसार, “सरपंच पतियों पर शिकंजा कसना बहुत ज़रूरी है। सरपंच पति काम-काज में अनावश्यक दबाव बनाते हैं, जो कि निःसंदेह तमाम कामों में अवरोध पैदा करता है। उनका यह रवैय्या पंचायतराज अधिनियम के बिलकुल विरुद्ध है।”

हम सभी को नियाज़ खान जी को दिल से धन्यवाद देना चाहिए कि उन्होंने उन महिलाओं के लिए आवाज़ उठाई जो लोकतंत्र का प्रतिनिधित्व तो करती हैं, लेकिन दबाव के अंधकार में। ऐसे में केंद्र और राज्य सरकारों का कर्तव्य है कि अब सरपंच के पतियों पर लगाम लगाए और महिला सशक्तिकरण को मजबूती प्रदान करे।

फोटो प्रतीकात्मक है; फोटो आभार: getty images

Youth Ki Awaaz is an open platform where anybody can publish. This post does not necessarily represent the platform's views and opinions.

हर हफ्ते Youth Ki Awaaz हिंदी की बेहतरीन स्टोरीज़ अपने मेल में पाने के लिए यहां सब्सक्राइब करें।