जो ताज तुम्हें धब्बा लगता है वो देश को सबसे ज़्यादा रेवेन्यू देता है

Posted by Dewanshu Dwivedi in Hindi, Travel
October 18, 2017

एक आम हिंदुस्तानी के लिए देश में मौजूद स्मारक पर्यटन स्थल होने के साथ ही राष्ट्रीय गौरव भी है, लेकिन अवसरवादी तत्त्व इनमें भी अपने स्वार्थ सिद्धी के मौके खोज ही लेते हैं। इन दिनों एक खूबसूरत स्मारक ताजमहल भी ऐसे ही लोगों के निशाने पर है।

यू.पी. में बीजेपी विधायक संगीत सोम ने ताजमहल को भारतीय संस्कृति के ऊपर धब्बा बताया है और उसको बनवाने वाले मुगल शासक शाहजहां पर सवाल उठाए हैं। इतिहास को बदलने की भी बातें हो रही हैं। लेकिन इतिहास ऐसे बयानों से नहीं बदल जाता, यह कोई फिल्म की कहानी नहीं है कि बाज़ार की ज़रूरत के हिसाब से इसमें परिवर्तन हो जाए।

मुगल शासकों में शाहजहां अपने कलाप्रेमी व्यक्तित्व के कारण विशेष पहचान रखता है। आगरा के ताजमहल के साथ ही दिल्ली की जामा मस्जिद, लाल किला जैसे स्थापत्य के कई निर्माण शाहजहां ने करवाए। ताजमहल को प्यार का प्रतीक कहा जाता है क्योंकि इसे शाहजहां ने अपनी पत्नी मुमताज महल की याद में बनवाया था। मेरे लिए यह प्यार के प्रतीक के रूप में बहुत महत्व नहीं रखता, क्योंकि एक शासक के पास अपनी प्रेमिका के लिए यादगार बनाने के सारे संसाधन मौजूद थे और उसने अपनी कल्पना को साकार रूप देने का ही कार्य किया है। वहीं ऐसे ढ़ेरों उदाहरण मौजूद हैं जब पति या पत्नी नें अपने साथी की याद में अपनी क्षमता से काफी आगे बढ़कर कुछ किया है, वे प्रेम की अभिव्यक्ति के सशक्त हस्ताक्षर महसूस होते हैं।

पर एक उत्कृष्ट कोटि के स्थापत्य के रूप में ताजमहल वाकई आकर्षक लगता है और किसी भी अविवेकी व्यक्ति या समूह के दिए गए बयान से इसका महत्व कम नहीं हो जाता है।

ताजमहल को लेकर नकारात्मक मानसिकता के साथ ही बदलती हुई शासकीय नीतियां भी इन दिनों चर्चा में आ रही हैं जो निंदनीय हैं। ताजमहल न केवल उत्तरप्रदेश की बल्कि भारत की भी पहचान के रूप में देखा जाता है। वर्षों पहले किये गए एक सर्वे में ताजमहल विश्व के सात अजूबों में शामिल हुआ। पर्यटन में ये न केवल भारतीयों बल्कि विदेशियों के लिए भी एक प्रमुख आकर्षक स्थान है। तभी तो भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को प्रवेश टिकट के द्वारा सबसे अधिक आय यहीं से प्राप्त होती है। 2015-16 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को अपने 116 सशुल्क प्रवेश स्मारकों में से 93.95 करोड़ रुपये की आय हुई जिसमें 17.87 करोड़ रुपये ताजमहल से ही प्राप्त हुए थे। इन आंकड़ों से ही ताजमहल की लोकप्रियता का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।

कुछ लोगों नें ताजमहल के मूल रूप से तेजोमहालय शिव मंदिर होने की भी बातें कहीं हैं लेकिन भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय ने 2015 में और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण नें कुछ महीनों पहले ही ऐसे दावों को खारिज किया है।

ताजमहल के साथ कई कहानियां जुड़ी हैं जैसे कि यमुना के दूसरे किनारे पर एक काला ताजमहल बनाया जाना था या ताजमहल बनवाने के बाद शाहजहां ने सारे कारीगरों के हाथ कटवा दिए थे ताकि वे दुबारा ऐसा बेजोड़ निर्माण न कर सकें। पर इनकी सच्चाई अभी तक प्रमाणित नहीं है। ताजमहल में अध्ययन एवं शोध के लिए बहुत कुछ है लेकिन उनका उद्देश्य नए पहलुओं को सामने लाना होना चाहिए न कि अपनी किसी संकुचित मानसिकता को पोषित करने हेतु सही – गलत बातों का अम्बार लगाना।

भारतीय राजनीति में इन दिनों मूल मुद्दे गायब हो रहे हैं और उनकी जगह अनुचित तनाव पैदा करने वाले मुद्दों को उठाया जा रहा है जो विकासशील भारत के लिए किसी भी तरह से सही नहीं है। हमारे स्मारक देश का गौरव हैं उनको लेकर अनर्गल बयानबाज़ी नहीं होनी चाहिए।

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