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अन्नदाता की आत्महत्या

Posted by Pushpendra Sharma
November 24, 2017

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मैं pushpendra इस  देश का सबसे कठोर परिश्रम करने वाले पिता का एक समान्य सा बच्चा! अभी कुछ समझने लगा था  की मुझे खेत पर ले जाया जाने लगा   और मैं लिखता हूं उसके बाद के विचार  जो मुझे आज  10 साल बाद समझ आते हैं  जरा सोचिए ऐसी कौन सी वस्तु है जो किसान पैदा नहीं करता सुबह उठने के बाद चाय से लेकर शक्कर दूध मक्खन दाल सब्जी अनाज मिर्ची मसाले फल-फूल जहां तक मेरा गांव में घूमने के बाद का अध्ययन है  24 घंटे में काम में आने वाली ऐसी कोई भी वस्तु नहीं है जो अन्नदाता पैदा नहीं करता फिर भी आज भी वह बदहाल है उस की मूलभूत आवश्यकताएं बिजली पानी मकान कपड़ा यहां तक की खाने की व्यवस्था वह खुद पूरा नहीं कर पा रहा  आज भी वह दूसरों की जरूरतों को पूरा करने में लगा हुआ है और हम हैं कि उसकी जरूरतों को पूरा नहीं कर पा रहे उसकी जरूरत जरूरत  रह जाती हैं बेटे की शादी हो या फिर बच्चे को कोचिंग में दाखिला दिलवाना हो या खुद के लिए कोई साधन खरीदना हो यह सब उसके लिए सपना है देखिए प्राकृतिक आपदा हो गई तो बच्ची बड़ी होती रहेगी शादी अगले साल होगी बेटा मेहनत करता रहेगा और कोचिंग अगले साल होगी और यह सब नहीं होने पर पूरी दुनिया का सबसे कठोर इंसान जिसके लिए आज समय भी सूरज से चलता है ऐसा कदम उठा लेता है की आत्महत्या कर लेता क्या हमने कभी सोचा है कि वह हमारी जरूरतें पूरी करता है क्या हम भी उसके साथ मर जाते हैं ?जरा सोचिए इसके पीछे का कारण क्या है अगर कभी आप आंकड़ों पर नजर डालेंगे तो देख पाएंगे कि नेशनल क्राइम रिपोर्ट ब्यूरो के अनुसार 70% से ऊपर किसान बैंक के लोन से नहीं चुकाने पर आत्महत्या कर लेते हैं प्राकृतिक कारण भी इसमें शामिल है क्या आपको लगता है कि इसमें कुछ राजनीतिक कारण भी शामिल है और आत्महत्या करने के बाद में सब लोग गैर-जिम्मेदाराना हो जाते हैं इसके पीछे के कारणों पर चर्चा करते हैं एक सामान्य किसान किसी राष्ट्र की समूची शक्ति उस राष्ट्र की सभी आवश्यकताओं की पूर्ति करती है उसके लिए कुछ मायने तय किए हुए हैं अपने पैदा किए हुए माल  का मूल्य कभी खुद तय नहीं कर सकता और हालात यह कि कभी-कभी तो मेहनत भी वापस नहीं मिलती। सरकारी सामान्य से भी कम दाम दे

तय करती हैं  मजबूर होकर बिचौलियों को या व्यापारियों को बेच देते हैं और सीजन खत्म होने के बाद खुद भी दुगने दाम में खरीदते हैं सरकारी कंपनियों से बैंको से लोन दिलाती है नहीं भरने पर जमीन कुर्की ऐसा होने पर आत्महत्या के अलावा और दूसरा कोई साधन अन्नदाता के पास  नहीं बचता  फसल बीमा पशु बीमा सरकारें खुद नहीं कर के प्राइवेट कंपनियों से करवाती है और इसका पूरा फायदा वह कंपनियां उठाती है और फाइनेंस नहीं भरने पर जमीन मकान सब कुर्की  कर लिए जाते हैं आत्महत्या का यह भी कारण बनता है

उद्योगपति शराब सिगरेट गुटका तंबाकू और अलग अलग प्रकार के ड्रग्स बनाने वाले बड़े-बड़े लोग जिनकी वस्तुएं सिर्फ और सिर्फ दिन में एक से अधिक बार काम में नहीं ली जाती वह लोग करोड़पति अरबपति है

शायद ऐसा कोई भी मामला देखने को नहीं मिलता कि किसी उद्योगपति ने कोई आत्महत्या की हो अन्नदाता की वस्तुओं को मनमर्जी से खरीदते हैं पैक करने सुरक्षित रखने और अपने नाम का ठप्पा लगाने वाले बड़े लोग अपनी मनमर्जी से उनका मूल्य तय करते हैं और खरीदने वालों को वह मूल्य चुकाना पड़ता है हमेशा इस के दामों में बढ़ोतरी होती है कोई गिरावट नहीं होती  । बैंकों से सरकारी संस्थाओं से लोन ले लेते हैं सरकारी वस्तुओं का उपभोग भी करते हैं फायदा नहीं होने पर सरकार इनको और लोन दे देती है और फिर यह उस पैसे से ऐशो-आराम करते हैं दिवालिया घोषित हो जाते हैं आत्मसमर्पण कर देते हैं जेल जाते हैं बैंक या कंपनी खुद इनके यहां पर बीमा करते हैं और यह बड़े लोग अपना नाजायज नुकसान दिखा कर  बीमा का फायदा उठा लेते हैं किसान लोग अगर इन सब से निपटने के लिए कोई आंदोलन करते हैं  तो उनके ऊपर  सरकार लाठियां बरसाती है  इन सब से परेशान होकर  आज का अन्नदाता  कुछ ना कुछ करने को मजबूर है आप सबसे निवेदन है कि इसके बारे में आप कुछ सोचेंगे  और  कुछ विचार  प्रस्तुत करेंगे

धन्यवाद

(पुष्पेंद्र शर्मा)

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