अज़फा

Posted by Yasir Tehsin
November 13, 2017

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घडी में बारह बजे थे, कमरे में एक अजीब सा सन्नाटा फैला हुआ था। दीवारें भी बड़ी उदास-उदास सी लग रही थी। चाँद खिड़की से ऐसे झांक रहा था जैसे उसे भी इस उदास सन्नाटे के ख़त्म होने का इंतज़ार हो। अचानक अज़फा के फोन पर आये एक नोटिफिकेशन ने इस सन्नाटे को काटा। उस ने अपनी आँखें जो रोने की वजह से भारी हो गयी थी, साफ़ करते हुए नोटिफिकेशन देखा। उसकी सहेली ने उसके फेसबुक पोस्ट पे ‘बधाई हो’ कमेंट किया था। अज़फा ने झल्लाते हुए फोन बिस्तर पे पटक दिया और घुटनों पे अपना सर रख कर सिसकियों से रोने लगी।
उसे मेरी परवाह ही नही है .. क्या समझता है फैसल अपने आप को.. – वो रोते रोते बड़बड़ा रही थी।
शाम में किसी बात को लेकर उसकी फैसल से खूब लड़ाई हुई थी, और फैसल ने उसे ‘भाड़ में जाओ’ कह कर फोन कट कर दिया था।
रोते रोते जाने कब उसकी आँख लग गयी उसे पता ही नही चला। रात के करीबन तीन बजे होंगे कि उसका मोबाइल बजा। अज़फा गहरी नींद में थी तो बंद आँखों से उसने फोन उठाया –
हेलो
सो गयी थी क्या ? – फोन के उस तरफ से एक मर्दाना आवाज़ उभरी।
अज़फा उठ कर बैठ गयी। – हाँ सो गयी थी
अब जाग जाओ- फोन पर फैसल था।
क्यों जाग जाऊं ?
(अज़फा मुस्कुरायी, लेकिन फोन के उस तरफ वाले शख्स को ये इल्म होने नही दिया)
और तुम इतनी रात तक क्यों जाग रहे हो ?

मुझे तुमसे बात करनी है, और तुम्हे फ़ोन करने के लिए ही अबतक जाग रहा था – फैसल ने एक ही बार में दोनों बातों का जवाब दे दिया।
करो बात – अज़फा जो अभी तक अपनी आँखें मसल कर, अपने सर के नीचे तकिया दुरुस्त करके लेट चुकी थी, ने झूठा गुस्सा दिखाते हुए कहा।
शाम मेरी मेडिकल रिपोर्ट आयी थी – फैसल नर्मी से बोला।
तो … तो कैसी रही रिपोर्ट ? – अज़फा ने घबराहट में पूछा।
मुझे एक ला इलाज बीमारी हो गयी है – अबकी बार फैसल की आवाज़ में एक नमी सी थी।
अल्लाह .. क्या हुआ ? – अज़फा लगभग चिल्ला ही पड़ी। सीधे बैठते हुए उसने फिर पूछा। – क्या हुआ तुम्हें ?
तुमसे इश्क़ – फैसल ने रोमांटिक होते हुए कहा। – और डॉक्टर कहते हैं इसका कोई इलाज नही!
अल्लाह मेरी तौबा! फैसल तुम बहुत बुरे हो, तुमने मुझे डरा दिया -अज़फा रोने लगी, वो अभी तक डर के मारे काँप रही थी।
मैं कल आ रहा हूँ तुम्हारे पास छुट्टी ले कर – हँसते हुए फैसल बोला। – नौकरी आखिर बीवी से ज़्यादा थोड़ी है। अब तुमने फेसबुक पे लिख ही दिया है कि इस नवंबर हम शिमला घूमने जाएंगे तो जायेंगे।
फैसल बोलता जा रहा था और अज़फा मुस्कुराती जा रही थी।
उसकी मुस्कुराहटों से दीवारों पे छायी उदासी गुम होने लगी। सब कुछ जैसे एकदम से बदल सा गया। जो कमरा अभी तक किसी शोक में डूबा था चहकने लगा। चाँद भी बदली की चादर ओढ़ कर जाने कहाँ गुम हो गया जैसे वो अज़फा को ढाढ़स देने के लिए ही अबतक रुका था। फैसल ने उसे बाय कह कर फोन काट दिया था लेकिन वो अभी तक मुस्कुरा रही थी। फिर अचानक उसे कुछ याद आया और उसने अपना फोन ऑन करके फेसबुक पे आये कमेंट का रिप्लाई किया “शुक्रिया”।

यासिर

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