आगे इस नॉट जस्ट आ नंबर

Posted by Deepesh Gopaliya
November 14, 2017

Self-Published

 

मैं वही रोज की तरह अपने office से करीब 6 बजे तक घर पहुच जाता हूँ ।
रोज शाम को जब चाय पीते हुए बालकनी में जाता हूँ तो अपनी बालकनी से सामने पार्क में बच्चो को खेलते हुए देखता हूँ ।
शायद वो खेलते हुए अपने school , अपने studies इन सब के बारे में नही सोचते होंगे।वो सिर्फ उस पल के खेल में खोए होते है औऱ कुछ नही । वो अपनी स्कूल की लड़ाई school में ही खत्म करके शाम को ऐसे हो जाते है जैसे कुछ हुआ ही नही।
वयस्क लोगो के साथ ऐसा नही है । acctual में ज़िन्दगी तो वो भी बच्चो वाली ही जी रहे है बस फर्क इतना है कि अपनी problems से वो इतना घुल मिल गए है कि उन्हें अपनी personal लाइफ में ले आये है ।
बॉस की tension को उस अटैची में ही बंद करके आना चाइये मगर हम ऐसा नही करते क्योंकि हम सोचते है कि ज्यादा सोचने से शायद हल मिल जाएगा , ऐसा मुमकिन है पर उस हल का क्या करना जो आपके आज की ज़िंदगी के पल खा रहा है।
और इसी के साथ अपने लैपटॉप पर ये लेख पूरा करते हुए मैं excel sheet बनाने लग गया जो मुझे कल presentation में किसी भी हालत में दिखानी थी।

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