खुद को इतिहास का रक्षक कहने वाले पद्मावती हेटर्स

Posted by sunakshi gupta
November 15, 2017

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पद्मावती फिल्म के आने से हमें यह तो पता चल गया कि हमारे देश में लोगों को इतिहास की कितनी कदर है। धन्यवाद है पद्मावती के निर्देशक का जो उन्होंने इस देश के महान इतिहास के रक्षकों को जगा दिया जो कभी ऐतिहासिक इमारतों के खंडर होने पर नहीं दिखाई देते, लेकिन चूंकि पद्मावती फिल्म आ गई तो इन्हें लाइमलाइट में आने का मौका मिल गया।

आश्चर्य की बात यह नहीं की पद्मावती को लेकर लोगों में इतना आक्रोश क्यों है, आश्चर्य की बात यह है कि यह सारी भावुकता तब कहां चली जाती है जब ऐतिहासिक विरासत को बचाने की बात आती है। ऐतिहासिक इमारतों को गंदा करते वक्त, इमारतों पर अपने नाम लिखकर खराब करते वक्त आपका इतिहास प्रेम कहां चला जाता है। इन सब मुद्दों पर कभी कोई रैली नहीं निकाली जाती, न कोई दल इस समस्या को लेकर आगे आता है, लेकिन पद्मावती फिल्म तो जैसे इसके आन-बान-शान के खिलाफ है।

हम सिर्फ एक प्रदेश की बात नहीं कर रहे है, भारत में हर साल विभिन्न क्षेत्रीय सरकारें व राज्य सरकारें पर्यटन के नाम पर लाखों रुपय खर्च करती हैं लेकिन उनमें से कितनी ही योजनाएं सफल होती हैं, लाखों के घोटाले होने के बाद भी इन इतिहास के रक्षकों की नींद क्यों नही टूटती।

आक्रोश दिखाने के लिए मल्टीप्लैक्स तोड़ना सही नहीं

अपनी बात कहने का सही तरीका न जाने कब लोगों में आएगा। पद्मावती का विरोध करने के लिए कुछ दल के लोग सिनेमाघर व मल्टीप्लैक्स में तोड़-फाड़ कर रहे हैं, अपनी बात कहने के लिए दूसरे का नुक्सान करना कहां तक सही हैं, और कुछ को तो लगता है कि इसमें उनकी शान है।

फिल्म बोर्ड पर क्यो नहीं लोगों को भरोसा

अगर सच में फिल्म के अंदर कोई आपत्तिजनक सीन होते तो सेंसर बोर्ड उसे पास नहीं करती और इतना विश्वास तो हमें अपने फिल्म बोर्ड पर होना चाहिए।

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