आज बरेली मेयर के लिए जो चेहरा सबसे ज़्यादा चर्चा में है -उमेश

Posted by Sandeep Rajput
November 13, 2017

कुछ दिन पहले, दिल्ली से बरेली जाना हुआ, 250 किलोमीटर के इस सफर में, बरेली में चुनाव की सरगर्मियां कहीं भी सड़क के किसी किनारे मौजूद नहीं थी, मसलन किसी भी पार्टी के चुनावी होर्डिंग्स मुश्किल से ही दिखने को मिल रहे थे। उस वक्त एहसास हुआ कि दरअसल इन चुनाव प्रचारोंं ने सड़कों से ज़्यादा डिजिटल माध्यम की ओर रुख कर लिया है। उस वक्त मुझे लगा कि उभरता हुआ भारत दरअसल डिजिटल भारत है, जहां सामान्य कीमत पर इंटरनेट मोबाइल फोन के रूप में हर आम और खास की पहुंच में है। ऐसे में चुनावी प्रचार का माध्यम इंटरनेट, सोशल मीडिया बन चुका है। भाजपा और भाजपा के चेहरे बन चुके मोदी जी तो इस प्लेटफॉर्म का अच्छा खासा उपयोग कर ही रहे हैं।

लेकिन आज बरेली मेयर के लिए जो चेहरा सबसे ज़्यादा चर्चा में है, उसके राजनीतिक जीवन की शुरुआत भी इसी सोशल मीडिया के एक पेज से हुई थी। मेरी मुराद, बरेली के नौजवान नेता और चुनावी आंदोलन का चेहरा बनकर उभरे उमेश गौतम से है।

2013 अगस्त, में हुए सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट आंदोलन से महज कुछ दिन पहले चर्चा में आये, उमेश गौतम इससे पहले एक उर्जावान नौजवान की तरह ही शिक्षा तथा चिकित्सा के क्षेत्र में अपना योगदान दे रहे हैं, शायद ही तब इन्हें इनके मित्रों के सिवा और कोई जानता हो, मूलतः उमेश गौतम बरेली से ताल्लुक रखते हैं और बरेली के इन्वर्टिस यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति हैं। उमेश गौतमसॉलिड वेस्ट‘  के कारण ही चर्चा में गए थे। ना सिर्फ बरेली ही बल्कि आसपास के क्षेत्र में भी उन्होंने चर्चा बटोरी, अखबारों की सुर्खियों के ये हिस्सा बनने लगें।

उमेश जहां इस लड़ाई का मुख्य चेहरा बनकर उभर रहे थे वहीं एक प्रखर वक्ता के रूप में भी अपनी छवि को कायम कर रहें थे।

व्यक्तिगत रूप से, अगस्त 2013 जब उमेश छात्र छात्राओं व् ग्रामवासियों के हित की लड़ाई लड़ रहे थे, खबरों के साथसाथ, आम लोगों की ज़ुबान पर भी उमेश का नाम चढ़ रहा था, ऐसे में एक सहकर्मी ने बताया था कि महज़ कुछ महीने पहले फेसबुक पर एक पेज द्वारा अनामत का ये प्रस्ताव रखा गया और हज़ारों की तादाद में लोग इससे जुड़ते गये, इसके बाद कस्बों से लेकर शहर तक, जाहिर सभा द्वारा लोगों को इस लड़ाई से अवगत भी करवाया गया और जोड़ा भी गया। उमेश जहां इस आदोलन का मुख्य चेहरा बनकर उभर रहे थे वहीं एक प्रखर वक्ता के रूप में भी अपनी छवि को कायम कर रहें थे। यही वजह थी कि गरीबों और किसानों की लड़ाई का दूसरा नाम उमेश गौतम बन गए|

दरअसल बरेली लखनऊ रोड पर उस समय पर तत्कालीन राज्यसरकार(.पा.) द्वारा सारे नियमों की अवहेलना करके दो शैक्षिक संस्थानों के मध्य सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट की स्थापना की गयी इससे लगभग ४० हज़ार ग्रामवासियों, छात्र छात्राओं, नागरिकों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने लगा प्रदूषण के कारण तरह तरह की जानलेवा बीमारियों का आग़ाज़ होने लगा| ऐसी स्थिति में उमेश गौतम ने आवाज़ उठायी तथा सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट को स्थानांतरित करने का दबाव बनाया| इसके लिए उन्होंने समाज के गरीबों, मजदूरों, किसानों, तथा आम नागरिकों का साथ लिया और उनके हित की लड़ाई शुरू कर दी| राज्य से इनकी लड़ाई सड़क से लेकर कोर्ट कचहरी तक चली, यही मुख्य कारण था की उमेश गौतम पिछड़े गरीबों की लड़ाई का चेहरा बन गए तथा बरेली नगर की तमाम समस्याओं के निजात के लिए भी समय समय पर लड़ाई लड़ते रहे| गरीबों को चिकित्सा सुविधायें देना, ज़रूरतमंदों को कपड़े देना, समाज को शिक्षित करना आदि उमेश गौतम की दिनचर्या बन गयी जिसके कारण उनकी लोकप्रियता बरेली समाज में बढती चली गयी और आज भाजपा से बरेली शहर के महापौर के प्रत्याशी के रूप में नागरिकों की लड़ाई लड़ने के लिए चुनाव मैदान में हैं|

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