‘कुमार विश्वास’ को आख़िर क्यों देश का युवा राज्यसभा में देखना चाहता है?

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November 5, 2017

Self-Published

कवि कहें, राजनेता कहें, या युवाओं के दिल की धड़कन कहें, ये तीनों शब्द ‘डॉ0 कुमार विश्वास’ का पर्याय हैं।
कभी अपनी पढ़ाई के दिनों में इंजीनियरिंग छोड़कर आये कुमार विश्वास ने शायद स्वयं भी यह कल्पना नहीं की होगी, कि आगे आने वाले समय में वो देश और दुनिया के युवाओं की एक मजबूत आवाज बनेंगे।
 
अपनी मोहब्बत एवं देश प्रेमी कविताओं के जरिये युवाओं के दिलों पर राज करने वाले कुमार विश्वास एक बार फिर देश की आँखों का तारा तब बने जब भ्रष्टाचार विरोधी अन्ना आंदोलन ने देश को जागरूकता के उस चौराहे पर लाकर खड़ा कर दिया जहाँ कहीं भी मुड़ने पर भ्रष्टाचार से लड़ने का जुनून ही नजर आ रहा था।
यही समय था जब कुमार विश्वास अन्ना के सारथी बने हुए, हाथ में माइक थामे हुए रामलीला मैदान और जंतर मंतर की युवा शक्ति को ऊर्जवान्वित कर रहे थे, 
इसका प्रभाव मीडिया,सोशल मीडिया पर ऐसा पड़ा,कि देश में कुमार विश्वास का चाहने वाला हर युवा भी सड़कों पर दिखाई देने लगा।
उसे लगा कि यह युवा कवि प्यार मोहब्बत की कविताओं के अलावा देश की स्थिति के प्रति भी संवेदनशील है।
फिर चाहे वो दामिनी कांड के समय इंडिया गेट,राष्ट्रपति भवन पर लाठियां खाना क्यों न हो!
 
जब अन्ना आंदोलन ‘आम आदमी पार्टी’ में परिवर्तित हुआ और पहली बार दिल्ली का विधानसभा चुनाव लड़ा गया, कुमार विश्वास ने अपनी संवाद शक्ति के जरिये दिल्ली वासियों के राजनैतिक दृष्टिकोण भी इस कदर बदला कि लोग भाजपा और कांग्रेस से शिक्षा,स्वास्थ्य,सड़क,पानी,बिजली पर संवाद करने लगे।
 
यहीं अरविंद केजरीवाल को अहसास हो चुका था,कि कुमार विश्वास उनकी असली ताकत है।
 
कई उतार चढ़ाव देखते हुए जब पार्टी को अपना दूसरा विधानसभा चुनाव लड़ना पड़ा, और भाजपा ने जब किरण बेदी को अरविंद केजरीवाल के सामने उतारा, तो अरविंद केजरीवाल तनिक भी भयभीत नहीं हुए।
क्योंकि उनको पता था कि उनके पास ‘कुमार विश्वास’ नाम का ब्रह्मास्त्र जो है।
 
जब कुमार दोबार दिल्ली की सड़कों,गलियों में उतरे तो इस पूरी लड़ाई को ‘अवसरवादिता’ बनाम ‘अरविंद केजरीवाल’ में इस कदर बदलने में कामयाब हुए कि दिल्ली की सत्ता पर एक बार फिर 67/70 सीटों के साथ अरविंद को पुनः सत्ता के शिखर पर पहुंचा दिया ।
सभी समाचार पत्रों,टीवी चैनलों में कुमार विश्वास छाए रहे,इस जीत का नायक कहा गया उन्हें।
 
अब ‘आम आदमी पार्टी’ के पास जनवरी में राज्यसभा की 3 सीटों पर चुनाव होना है।
जिसके लिए बहुत सारे दावेदार नजर आ रहे हैं,
लेकिन कुमार विश्वास इकलौते शख्स नजर आ रहे हैं, जिनके दावेदार पार्टी के आन्दोलनकरी,जमीनी कार्यकर्ता एवं देश का युवा स्वयं है।
 
क्योंकि देश का युवा अटल बिहारी वाजपेयी के बाद सदन में एक ऐसे प्रखर आवाज सुनना चाहता है, जो पूर्ण रूप से निष्पक्ष हो, पार्टी लाइन से ऊपर उठकर देश हित में हो।
 
कई ऐसे मुद्दे जैसे तीन तलाक,राम-रहीम, इत्यादि पर जब वोट बैंक के लिए देश के सभी राजनैतिक दल खामोश रहे, तब भी कुमार विश्वास ने अपनी आवाज बुलंद की।
 
पार्टी के अंदर हो या बाहर, कुमार विश्वास वोट बैंक की राजनीति से ऊपर उठकर सदैव देश हित में अग्रणी रहे।
 
चाहे दिग्विजय सिंह से अरविंद का ताल ठोंक कर यह कहना हो- ‘बहस के लिए तैयार रहो, मैं कुमार को भेजता हूँ’ इत्यादि, यह दिखाता है कि कुमार विश्वास देश की युवाओं की ताकत के साथ साथ आम आदमी पार्टी की भी ताकत हैं।
 
यही कारण है देश के प्रखर वक्ता होने के नाते, देश का युवा भी चाहता है कि राज्य सभा में कुमार विश्वास जैसा व्यक्ति जरूर हो जो देश के मुद्दों को आक्रामकता के साथ रख सके।
 
जय हिंद!
 
-Aayush Pandey
 (Law Student)

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