कौन हैं वो जो भीड़ का हिस्सा बन जाते हैं?

Posted by Abhishek Naman Dwiz
November 13, 2017

कन्हैया कुमार के साथ दो रोज़ पहले लखनऊ के शीरोज़ कैफ़े में मारपीट हुई या प्रयास किया गया| कुछ नया नहीं है, अब ये न्यू नार्मल है| मेरे लिये व्यक्तिगत स्तर पर कुछ नया है| अभी तक इस तरह की खबरें दूर से सुना करते थे, लेकिन इस बार किसी परिचित को ऐसी घटना में शामिल देखा| और बड़ी बात ये की उसे इस बात को सेलिब्रेट करते देखा कि उसने कहीं जाकर हंगामा किया और मारपीट की| और तो और ये भी अफ़सोस करते देखा कि उसने कन्हैया को जिंदा छोड़ दिया | मतलब हुआ हत्या के विचार को सेलिब्रेट करना| दरअसल ये दुःखद है जब आपके बीच का एक इंसान, जिसे अब तक आप तमाम मतभेदों के बावजूद एक अच्छा इंसान मानते थे, ऐसी प्रवृत्ति का हो जाये| वो ऐसे शख्स के तौर पर जाना जाए, जिसके बारे में एसिड अटैक सरवाइवर्स कहें कि ये तेज़ाब फेंकने की मानसिकता वाले लोग हैं| अभी भी सोचता हूँ कि काश ये उसका बहकाव हो, अंतिम परिणति नहीं!