“गंतव्य की पहचान !”

Posted by Tanuja Jha
November 12, 2017

Self-Published

हर मानव का जन्म किसी गंतव्य को पूरा करने के लिए होता है लेकिन व्यक्ति का गंतव्य क्या है यही उसे समझने में वक़्त लग जाता है।

जिसे अपना गंतव्य समझ आ जाता है वो अपने गंतव्य को पाने के लिए हर वो चाह रख़ता है जिससे उसे उसका गंतव्य मिल जाए।

जिस तरह किसान फ़सल बोने के बाद फ़सल उगने और अपनी मेहनत का फ़ल पाने की प्रतीक्षा करता है उसी तरह एक राही अपने गंतव्य को पाने की प्रतीक्षा करता है।

कई बार उस राह पर चलते-चलते उसे उसकी मंज़िल नहीं मिलती और वो सोचता है की मैं मेहनत कर रहा हूँ इसलिए एक ना एक दिन मैं अपने गंतव्य को पाउँगा।

लेकिन यहाँ बात कुछ और है।

वास्तविकता में कभी-कभी व्यक्ति समझ नहीं पाता कि वो किस काम को करने में अव्वल है।

इस स्थिति में व्यक्ति को अपने मंतव्य में मंथन करना चाहिए कि वो को सा काम अच्छे से कर सकता है।

बस एक बार आपको पता चल जाए कि आपका गंतव्य क्या है आपके मंज़िल का रास्ता आपका इंतज़ार कर रहा है। 

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