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गुजरात चुनाव और भाजपा की सत्ता भूख

Posted by OfficeOfAS_
November 1, 2017

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गुजरात चुनाव में भाजपा पिछले 22 वर्षों से सत्ता में है और हर चुनाव में उसने आसान जीत हासिल की सिर्फ और सिर्फ धर्म की राजनीति करके गुजरात के 10% अल्पसंख्यक समुदाय में 8% विशेष समुदाय का डर दिखाया गया बहुसंख्यक समाज को और वह सत्ता के शीर्ष पर बनी रही गुजरात पहले से ही विकसित राज्य रहा है भाजपा की सरकार ने कुछ चुनिंदा उद्योग जगत की हस्तियों को किसानों की जमीन कौड़ियों के भाव देकर अपने विकास का ढोल पीटा और गुजरात के CM देश के PM बन गए मगर इसबार परिस्थितियाँ बदली है युवाओं में रोजगार को लेकर बैचैनी किसान अपनी फसलों से आय नहीं हो रही को लेकर रोष जता रहे हैं दलितो पर अत्याचार को लेकर भी दलित समाज एकजुट हैं व्यापारी वर्ग भी सरकार के नोटबंदी और GST जैसे फैसलों से खिन्न है कुल मिलाकर भाजपा को लग रहा है कि इसबार वापसी संभव नहीं है तो अपनी सत्ता भूख के चलते मीडिया के सहारे हिन्दू मुस्लिम डिबेट फर्जी सर्वेक्षण झूठ के सहारे महौल को गर्म किया जा रहा है मगर फिर भी लगता है कि गुजरात की जनता ने इसबार भाजपा को सत्ता से बेदखल करने का मन बना लिया है शायद यही कारण है कि भाजपा की बेचैनी दिन पर दिन बढ़ती जा रही है सड़कछाप गुंडे मवालिओ जैसी भाषा का प्रयोग सत्ताधारी पार्टी के डर को प्रदर्शित करता है और शायद यही डर और नकारात्मक प्रचार ही इस बार जीत में रोड़ा बनेगा दिल्ली और बिहार में बानगी देखी है देश ने।

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