एक चक्का हवा में दूसरे में आग, एड्रिनलिन वाले बाइकर्स आएं भाग बाबा भाग

Posted by Avdhesh Pratap in Hindi, Society
November 24, 2017

उसका नाम पता मेरे पास नहीं है, सामने से निकलता भी है तो रॉकेट की स्पीड से जैसे अभी चांद पर पहुंचना हो। वो कभी बात करने का मौका ही नहीं देता, इसलिए सोचा सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दूं। वो आपके आस-पास किसी भी गली मोहल्ले या शहर में हो सकता है। कृपया शेयर करके उस तक मेरी बात पहुंचाने में सहयोग करें।

प्रिय जोशीले जवान,

बिना जान पहचान के भी तुम्हें प्रिय इसलिए कह रहा हूं क्योंकि तुम मेरे प्यारे देश की ऊर्जा हो, इसके भविष्य हो। तुम्हारे परिवार के किसी सदस्य को हार्ट अटैक नहीं आया था, ना ही तुम्हारी गर्लफ्रेंड ने ये कहा था कि अगर तुम 10 मिनट में नहीं आये तो रिश्ता खत्म समझो।

ना तुम्हारे पीछे गुण्डे पड़े थे और ना ही तुम शक्ल से चोर लग रहे थे कि तुम्हारे पीछे पुलिस पड़ी हो। फिर भी ना जाने क्यों तुम बंदूक की गोली की तरह भागे जा रहे थे।

लगभग 100 कि.मी. प्रति घण्टे की रफ्तार से 16-18 कि.मी. की दूरी तय कर लेना (जिसके पीछे कोई वाजिब वजह नहीं), तुम्हारी ज़िंदगी का अंतिम महान लक्ष्य तो नहीं हो सकता। फिर किसलिए अपनी और दूसरों की जान खतरे में डालते हो? सिर्फ मज़े और रोमांच के लिए?

फोटो आभार: flickr

अरे भाई! रोमांच ही चाहिए तो रेसिंग स्पोर्ट्स के क्षेत्र में जाओ या फिर किसी सर्कस में मौत के कुएं में करतब दिखाने लगो। कम-से-कम दूसरों की जान तो खतरे में नहीं पड़ेगी। तुम्हारा यह रूप तो राह चलते लोगों के लिए किसी यमदूत से कम नहीं।

अच्छा, तुम कहीं फिल्मों से प्रेरित तो नहीं होते हो ऐसा करने के लिए। फिल्म में हीरो जो करता है वह बस रील लाइफ है, रियल लाइफ में हीरो के स्वर्गीय कक्का भी वो सब नहीं कर सकते जो फिल्मों में दिखाया जाता है। सच में जान दांव पर लगाकर हीरो बनना है तो सरहद पर चले जाओ, तुम्हारी ज़िंदगी देश के ही काम आ जाए।

तुम्हारे मां-बाप ने तुम्हें लाख भर की बाइक दिलायी भले ही खुद दो साल से नये जूते न लिये हों। इसलिए कि तुम्हें बसों में या पैदल कोचिंग, स्कूल या कॉलेज ना भटकना पड़े और दोस्तों के बीच तुम शान से रह सको, तुम्हें शर्मिंदगी महसूस ना हो। इसलिए नहीं कि तुम शहर की सड़कों पर धूमकेतु बने फिरो और जाकर किसी निर्दोष ग्रह को ठोक दो।

तुम्हारी उम्र में हमारा एड्रिनलिन भी ज़ोर मारता था लेकिन हमने कभी अक्ल पर उसे हावी नहीं होने दिया। कभी हुआ भी तो बाप के थप्पड़ और मां के इमोशनल डायलॉग्स ने हमारा भूत उतार दिया। ना जाने तुम्हारे मां-बाप को पता भी है या नहीं क्योंकि पूरे शहर में ढिंढोरा होने के बाद भी कई मां-बाप को बच्चों की हरकतें पता नहीं होती।

ऐसा नहीं कि सिर्फ आज के युवक ही जोशीले हों आजकल की युवतियां भी कम नहीं। लेकिन उन्हें हाथों हाथ झेलने कई खड़े रहते हैं। युवती गिरी और लोग मदद के लिए दौड़ पड़ते हैं।

तुम गिरोगे तब भी मदद तो मिल जाएगी लेकिन पहले गालियां भी सुननी पड़ेंगी। किस्मत से तुम्हें चोट ना लगी और तुम्हारी वजह से दूसरा घायल हो गया तो तुम्हारी पूजा उसी समय बीच बाज़ार कर दी जायेगी।

भगवान ना करे कि तुम्हारी नादानी तुम्हारे मां-बाप के ज़िंदगी भर रोने का कारण बन जाए और तुम इतने दूर निकल जाओ कि उनके आंसू पोंछने ना आ सको। तुम्हें भले ही किसी की ज़रूरत ना हो लेकिन तुम्हारे परिवार को, इस समाज को और इस देश को तुम्हारी ज़रूरत है। तुम्हारी ज़िंदगी सिर्फ तुम्हारी नहीं, इस पर परिवार, समाज और देश का भी अधिकार है, इसलिए अपनी ऊर्जा को सही जगह लगाओ।

ज़िंदगी में गलतियों और सुधार का सिलसिला चलता रहता है लेकिन जो गलती ज़िंदगी छीन ले उसे ना तो सुधारने का मौक़ा मिलता है और ना दोहराने का। उम्मीद है अगली बार तुम जोश के साथ होश से भी काम लोगे।

– तुम्हारी हरकतों से परेशान
एक राह चलता आम आदमी।

वेबसाइट थंबनेल और फेसबुक फीचर्ड फोटो आभार: getty images (फोटो प्रतीकात्मक है)

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