तरसती बिहार की शिक्षा

Posted by Rupesh Kumar
November 6, 2017

Self-Published

विश्व के हर क्षेत्र में चाहे वह राजनीति हो या शिक्षा बिहार हमेशा आगे रहा है। राजनीति में देश के प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद से लेकर चुनाव के दिशा -दशा बदलने वाले लालू यादव की चर्चा हर जगह होती रही है। शिक्षा के क्षेत्र में आनंद कुमार (सुपर-30) का नाम हर जगह छाया हुआ है। इतने के बाबजूद भी बिहार में अब शिक्षा तरसती नज़र आ रही हैं ।
कुछ वर्षों से बिहार की शिक्षा में दिन- प्रतिदिन गिरावट आ रही हैं। जिसका ज़िमेदार कौन है ???
सरकार, शिक्षक, या फिर हम या हमारे बच्चे!!
बिहार शिक्षा के क्षेत्र मे अंधकार की ओर धकेला जा रहा हैं। इस बिहार में लाखों रुपए खर्च कर हम रैली में जाते है, राजनीति के नारे लगाते है और विपक्ष – सता वाले एक दूसरे पर गाली- गलौज करते है। हम अमुक प्राणी बन उन राजनेता का साथ निभाते है, पर हमें कुछ नहीं पता होता ये क्या हो रहा है? लेकिन हम अपने को क्रांतिकारी नेता समझ लेते हैं। सरकार द्वारा लाई गयी नीति को हम समझते नही हैं। हमें अपने बच्चे का भविष्य का कोई ख्याल नही होता, दुनियां राजनीति की पीछे क्यों भाग रही है, ऐसी बातों से हमे कुछ लेना देना नही होता। हम हुंकार रैली, भाजपा भागो देश बचाओ तरह- तरह की रैल्ली कर रहे हैं।
आज बिहार में ऐसी हालात है की उच्च कोटि लोगों के बच्चे सरकारी स्कूल में कभी नही जाते, जाना तो दूर की बाते होंगी शायद सपने भी नही देखे होंगे की कभी सरकारी स्कूल जाना पड़ेगा। ऐसा हो भी क्यों नही क्योंकि सब जानते है कि हम अपने बच्चे का भविष्य सरकारी स्कूल में नही बना सकते।
क्यों क्यों क्यों ??????
ऐसे बाते मैं क्यों कर रहा हूं ?
हमारी सरकार इतनी कमजोरी क्यों पड़ी हैं ?
शिक्षा में क्यों गिरावट आ रही है, हम सरकारी नाम का माला क्यों जाप्ते है ?
सरकार शिक्षा की ओर ध्यान क्यों नही दे रही है?
हमारे बच्चे रात-दिन एक कर पढ़ाई करते हैं फिर भी परिणाम अच्छा नही आता , हमें 4 वर्षो की डिग्री 5 से 6 वर्षो में पूरी करनी होती हैं । शिक्षा माफिया हर जगह फैल रहे है जिससे प्रतिभावान बच्चे की पहचान नही हो पाती।
ऐसी हालात है बिहार की आज शिक्षा की ओर जिसे देखने वाला कोई नही है ।
हम आज दहेज प्रथा बंद करने के बात कर रहे है , पूर्ण शराब बंदी का ढ़िढोरा हर जगह पीट रहे है। सच्चाई क्या है? लोगों का मानसिकता नही बदल सकते , यहाँ सोचने की जरूरत है क्या दहेज प्रथा इतनी जल्दी समाप्त हो जाएगी कभी- नही । जब तक शिक्षा की कमी होगी हमारी सोच नही बदलेंगे। अगर हम शिक्षा के ऊपर पूरी ताकत लगा देंगे तो हमारा बिहार बेहतर शिक्षित होगा फिर दहेज प्रथा खुद ही समाप्त हो जाएंगी। इसके लिए कोई मुहिम चलाने की जरूरत नही पड़ेंगी, किसी प्रकार की योजना लाने की आवस्यकता नही होगी।
जरूरत है!! तो बस हम अपनी शिक्षा व्यवस्था को सही करे, हम शिक्षा माफिया पर लगाम लगाएं। हम अपनी द्वारा लाएं गए योजना जो शिक्षा से संबध रखता हो उसे सुधारे।
समयानुसार हम परीक्षा का परिणाम घोषित करें।
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने का कोशिश करें।

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