तीसरा संविधान दिवस खामोश

Posted by Ravindra Mina
November 26, 2017

Self-Published

सरकार 3rd संविधान दिवस में खमोश बस मानव संसाधन मंत्री जी मूल कर्त्तव्य पाठ का उपदेश ट्विटर पर दिए है । चाय के साथ सुबह न्यूज़ पेपर अंग्रेजी और हिंदी दोनो में संविधान दिवस की जगह विधि दिवस मात्र दिखा ओर सरकार के प्रचार वाले पोस्टर नदारद थे । अब यह कोई नया दिवस का साल है ।#संविधानदिवस:- 26 नवम्बर 1949 को संविधान सभा ने संविधान के मसौदे को अंगीकार ,अधिनियमित किया
#संविधान के मायने:-एक लिखित किताब जो शासन के मूलभूत नियम और शासित होने वाले नागरिकों को मूलभूत अधिकार देती है । …..संविधान मात्र एक किताब है उसमें प्राण सरकारे ओर न्यायपलिका एवम अच्छे लोग फूंकते है । यही नीति नियंतावो की मान्यता थी ।
…………..संविधान के #फ्रेमवर्क में सरकार के नियम और संसद दवरा बने अधियनियम की (legal interpretation)#कानूनीव्यख्या करना #उच्चतमन्यायालय का काम है । जिसमे मूलाधिकार पर मुख्यतया SC संसद और सरकारो के नियम (क्षेत्र बाहर ) ultra-vires करता है ।
◆SC ने मूलाधिकारों की व्यख्या कर कर इतना विस्तारित कर दिया है कि आमआदमी को तो मूल ही नही पता उसे फिर #सोने का अधिकार कहा पता चलेगा ।

Sc/st/obc के मायने:-

◆sc/St/obc को आरक्षण सरकार एग्जीक्यूटिव आर्डर से देती आई है जिसमे संविधान के अनुच्छेद 13 के विधि शब्द का बल है जो इंद्रा साहनी केस ( अब तक कि आरक्षण पर सबसे बड़ी बेंच ,9 मेंबर) में भी घोषित हुआ है । और उसे SC मूल अधिकार 15 एंड 16 के आधार पर खारिज करता रहा है । ओर सरकारे  नेहरू जी से लेकर आजतक संविधान संशोधन करती रही है ।

वर्तमान:-  #पदोन्नतिआरक्षण वाद जो अब संविधान पीठ (5 मेंबर बेंच) सुनेगी वह # M नागराजन वाद 2006 की मूल अधिकार 16(4) ,16(4A),16(B) की व्यख्या को पुनः देखेगी जिससे प्रमोशन में 3 शर्ते आई
◆अतः संविधान की व्यख्या ओर public policy में सामंजस्य होना जरूरी है नही तो संविधान मात्र कानूनी शब्द बनकर रह जाते है ।

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