देश मांगे आरक्षण… क्यों?

Posted by Hemant Kumar
November 23, 2017

Self-Published

जाट आंदोलन , पाटीदार आंदोलन, मांग आरक्षण!

निवास- मूलतः सबसे संपन्न राज्य गुजरात , हरियाणा, पंजाब एवम् राजस्थान।

आधार- दोनो राजनैतिक

साधन संपन्न, शारीरिक हृष्ट पुष्ट , बौद्धिक कुशलता किन्तु फिर भी सरकारी दामाद बनने की तमन्ना।

आरक्षण – निचे तबके मूलतः आदिवासी , विशेष पिछड़ी जाति एवम् जनजाति, जिनका शोषण तब भी होता था , अब भी होता है, निश्चित तौर पर अति आवश्यक है आरक्षण। समाज को एकसूत्र में बंधना है , जातिगत भेदभाव मिटाना है, समानता का अधिकार देना है तो, समाज के सबसे निचले तबके के हर एक आदमी को संविधान के अंतर्गत वो सारी सुविधाएं मिलनी चाहिए जो मनुष्य होने के नाते, हमारे सक्षम समाज द्वारा उसेदिया जावे।

पर क्या ये उस आदमी को मिल रहा है जो इसका असली हक़दार है, ये तो उनका सरकारी भीख बनकर रह गया है जो साधन सम्पन्न होकर भी अपने पुरखों की जाति का तमगा अपने माथे पर लेकर बैठे है।

क्या आरक्षण गरीबी देखकर न्य देना चाहिए, मई तो अपने आसपास अपने मित्र गणों में ऐसे सैकड़ो निकाल दूंगा जो आरक्षण के बदौलत एक सामान्य जाति से अति सम्पन्न है और इसका गर्व मानते है।

तो क्या गरीबी जातिगत होती है, क्या मेरा एक ओडोसि ब्राह्मण व् सामान्य वर्ग का है तो उसे कोई सरकारी  छूट नही मिलनी चाहिए  चाहे कितनी भी दरिद्रता क्यों न हो उसके परिवार में,

और मेरा एक पडोसी जो सदियो से सुविधाये भोगते हुए इतना आलस्य पूर्ण हो गया है की उसे मेंहनत करके रोजगार की अपेक्षा आरक्षण की पेशकश की आवश्यकता है, जिसके घर में किसी चीज की कमी नहीं है, क्योकि उसके पास ब्रम्हास्त्र है जातिगत आरक्षण का।

क्या हमारा संविधान इस समानता की बात करता है , कि जो किसी ज़माने में ऊंच जाति के थे उनको अभी। निम्नतर तक ले आओ , क्यों जाति की बात हो रही है क्यों गरीब को धर्म, जात सिख रहे हो।

उसे तो 2 वक़्त की रोटी चाहिए, वो तो मेहनत करता है  , जी नहीं क्र रहा है उसे दुत्कारो।

वर्तमान में फिर आज किसी राष्ट्रीय पार्टी ने अपना समर्थन एक विशाल बहुधा साधन सम्पन्न समाज को को दिया आरक्षण के लिए, अपने वोट बैंक के लिए।

नमन मेरे अतुल्य भारत! मेरे भारत के लोग! नमन

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