नगर पालिका या ‘रिमोट’ पालिका !

Posted by Chandrakant Shukla
November 5, 2017

Self-Published

नगर पालिका या ‘रिमोट’ पालिका !

 

 

राजनीति को बचपन से देखता आ रहा हूं, कई बार सोशल मीडिया पर आपकी बात रखी है, मेरा ये पोस्ट शुद्ध रूप से उन्नाव और उन्नाव से जुड़े लोगों के लिए है । तीन नगर पालिका, पन्द्रह नगर पंचायत हैं यहां.. इनदिनों आपने सोशल मीडिया पर कई प्रत्याशियों के नाम सुने होंगे.. गौरतलब है कि तीन में से 2 पालिका सीट महिलाओं के लिए आरक्षित हैं । यानि 2 महिलाएं उन्नाव और गंगाघाट पालिका की चेयरमैन होंगी । जिनके कंधों पर 5 साल में विकास कार्यों को गति देने का ज़िम्मा होगा । मेरा सबसे पहली अपील आपसे ये है कि उन्नाव पालिका क्षेत्र में रहने वाले लोग आत्ममंथन करें, ईमानदारी से सोचें कि क्या कोई प्रत्याशी आपको ऐसा दिखता है जो इस पद के योग्य है ? ये मैं आप पर ही छोड़ता हूं… अब मैं आपसे अपनी बात कहता हूं- दोस्तों, मेरी अपील है सभी राजनीतिक दलों से कि आपकी जो ये विंग हैं- महिला मोर्चा, महिला सभा, महिला प्रकोष्ठ, महिला मंच और भी जो-जो हैं.. इनको तत्काल भंग करिए । जब आप इन मोर्चों से एक ऐसी नेता नहीं निकाल पाए जो चुनाव लड़ सके, तो क्या मतलब है इनका ? हमने और आपने सोशल मीडिया पर इन दिनों कई चर्चाएं देखी, कई नाम भी सुने… हमने जो नाम सुने वो मैं आपको बता रहा हूं, ध्यान से पढ़िएगा… बीजेपी से अनुराग अवस्थी का हो गया… सपा से मंटू कटियार और देवेन्द्र सिंह का नाम चल रहा है, कांग्रेस में अवधेश सिंह और मनीष सेंगर का नाम है । ये सब थी चर्चाएं । आखिर में जो फाइनल हुआ वो था, लोगों की पोस्ट के आधार पर बता रहा हूं कि सोशल मीडिया पर सबने देखा कि लोगों ने लिखा कि बीजेपी से अनुराग अवस्थी, बीएसपी से आशीष त्रिवेदी, कांग्रेस से अवधेश सिंह, सपा से मंटू कटियार, आप से रजनीकांत श्रीवास्तव, रालोद से सतीश शुक्ला और अखिलेश दादा निर्दलीय लड़ेंगे । किसी ने क्या ये कहा कि बीजेपी से अमिता अवस्थी, कांग्रेस से मीरा सिंह, सपा से ऊषा कटियार, बीएसपी से कविता त्रिवेदी, रालोद से राजवती शुक्ला, आप से विभा श्रीवास्तव और अनिला अवस्थी निर्दलीय लड़ेंगी ? कहीं नहीं.. क्यों महिला प्रत्याशियों का नाम तक आगे रखकर चुनाव नहीं हो रहा । क्या महिला प्रत्याशियों में कोई भी इतनी दमदार नहीं । इस मामले में मैं गंगाघाट पालिका को फिर भी बेहतर मानता हूं कि वहां ये चर्चा हो रही है कि बीएसपी से अभिलाषा मिश्रा और दिव्या अवस्थी निर्दलीय चुनाव लड़ रही हैं । कम से कम इनकी चर्चा के लिए लोगों को इनके पति पिता के नाम का सहारा नहीं लेना पड़ रहा है । हाल ही में उन्नाव में जब सपा से ऊषा कटियार का नाम फाइनल हुआ तो युवा पत्रकार सलमान खान ने उनसे बात की और कुछ सवाल पूछे.. ऊषा जी किसी सवाल का जवाब नहीं दे पाईं, वो वीडियो मैंने शेयर भी किया था । बाद में उनके बेटे प्रशांत कटियार उर्फ मंटू ने सवालों के जवाब दिए आप खुद समझ सकते हैं कि अगर ये जीतते हैं तो पालिका कैसे चलेगी । दूसरी प्रत्याशी हैं अमिता अवस्थी, इनकी उपलब्धि है कि एक बार जब सीट बदली तो पति की जगह ये सभासद बनीं । लेकिन बीजेपी में इनकी सक्रियता ना के बराबर है, मैंने खुद इनकी पहली बार तब देखा जब इन्होंने दीपावली की हार्दिक शुभकामनाओं वाले पोस्टर लगवाए… क्या सिर्फ इतने में ये चेयरमैन बनने की हकदार हैं ? इनके पति उन्नाव बीजेपी के बड़े नेता हैं, जिला महामंत्री हैं.. लेकिन उनकी राजनीति सदर विधायक के इर्द-गिर्द है और वहीं तक सीमित है । बीजेपी में दावेदार तो कई थे.. कुछ सक्रिय महिला नेता भी थी लेकिन टिकट इनका हुआ । खैर, अब बात करते हैं कांग्रेस की प्रत्याशी मीरा सिंह की, एक सफल गृहणी से ज्यादा इनकी पहचान ये है कि ये शहर के बड़े ट्रांसपोर्टर अवधेश सिंह की पत्नी हैं । अवधेश सिंह कितने बड़े कांग्रेस नेता हैं वो तो मुझसे ज्यादा आप जानते होंगे । बसपा ने कविता त्रिवेदी को प्रत्याशी बनाया है, निश्चित तौर पर कविता त्रिवेदी एक पढ़ी लिखी और युवा प्रत्याशी हैं… इनके पति छात्र संघ के अध्यक्ष रहे हैं लेकिन इन दिनों सियासत से दूर थे । अब अचानक बसपाई हुए और टिकट ले आए… टिकट बसपा में कैसे मिला अब कम से कम ये बताने की ज़रूरत तो नहीं होगी । साथ ही 2 प्रत्याशी और हैं.. कांग्रेस और सपा से जब टिकट नहीं मिला तो निर्दलीय मैदान में आईं अखिलेश अवस्थी की पत्नी अनिला अवस्थी, अखिलेश अवस्थी उन्नाव के जाने माने पत्रकार हैं, कवि हैं… हालांकि अब सब कुछ छोड़कर सिर्फ गौसेवा कर रहे हैं… चंदा मांग कर गायों की सेवा करते हैं और निस्वार्थ भाव से करते थे… कुछ लोग कहते हैं कि चुनाव के लिए सेवा थी.. लेकिन मैं इस पर कुछ नहीं कहूंगा । क्योंकि मुझे ये सिर्फ और सिर्फ शुद्ध सेवा भाव लगता है । एक प्रत्याशी हैं विभा श्रीवास्तव, व्यापार मंडल के नेता रजनीकांत जी की पत्नी.. सपा में कोशिश की थी, नहीं हुआ तो आम आदमी पार्टी से मैदान में आई हैं.. इनको भी तस्वीरों में ही उन्नाव ने पहली बार देखा… । साथ ही एडवोकेट सतीश शुक्ल की पत्नी रालोद से मैदान में हैं राजवती शुक्ला… सतीश जी ने खुद को वकीलों के लिए समर्पित कर दिया.. अगर उनसे पूछा जाए कि आप किसके बिना नहीं जी सकते तो मुझे लगता है उनका जवाब होगा कि कचहरी और वकीलों के बिना । यकीनन को वकीलों के हक को उठाने वाले सबसे बुलंद नाम हैं । लेकिन ये उनकी पत्नी को चुनने का आधार कतई नहीं हो सकता । अब आप सोचिए, कि ये कैसा चुनाव है ? एक भी महिला प्रत्याशी ऐसी नहीं है जो अपनी निजी प्रतिभा, निजी संघर्ष के दम पर मैदान में हो… तो क्या चुनाव सिर्फ अध्यक्ष की कुर्सी को भरने के लिए है… जो भी महिला जीतेगी उनके पति या उनका बेटा ही नगर पालिका का संचालन करेगा ? बीते 5 सालों से उन्नाव नगर पालिका पर्दे के पीछे से चली है. ये बात पूरा उन्नाव जानता है… शहर के युवा इतने अधीर हैं कि टिकट नहीं मिला तो वो जिस पार्टी के झंडे की सियासत करते हैं उसी को पानी पी पी के गरिया रहे हैं… उनकी सारी आस्थाएं टिकट तक सीमित थी । ऐसे बदलेंगे आप उन्नाव को, कुछ लोग कह रहे हैं कि अगर उन्नाव को बदलना है तो हमारा साथ दीजिए । मेरे कुछ सवाल हैं- क्या चुनाव जीतने के बाद ये महिला अध्यक्ष अपने विवेक से फैसले लेंगी ? क्या ये इस बात का लिखित भरोसा देंगी कि इनके चुनाव जीतने के बाद इनके पति, भाई, पिता, देवर, जेठ किसी का नगर पालिका के किसी फैसले में कोई दखल नहीं होगा ? पालिका की बोर्ड बैठक में इनमें से कोई नहीं दिखेगा ? क्या ये अधिकारियों से कहेंगी कि इनके अलावा और किसी के फोन को ना माना जाए ? क्या ये वादा करेंगी कि इनके और जनता के बीच में कोई प्रतिनिधि नहीं होगा और जनता इनसे सीधे मिलकर अपनी बात रख सकेगी ? क्या ये वॉर्ड में खुली बैठकों का आयोजन करेंगी ?  अगर ये सब कर पाने में ये असमर्थ हैं तो माफ करें आपको अध्यक्ष बनने का अधिकार नहीं है ? रिमोट से चलने वाली पालिका कितना काम करती है ये सब हमने देखा है । मैं चाहता हूं कि मेरा ये पोस्ट हर प्रत्याशी तक जरूर पहुंचे ।  ठेकेदारों को कमीशन आज भी देना पड़ रहा है, तब भी देना होगा । सड़कों की गंदगी, बजबबजाती नालियां, गड्ढेयुक्त रास्ते ये उन्नाव शहर की पहचान हैं… काश कोई एक ऐसी महिला प्रत्याशी मैदान में होती जो कहती कि मैं अपनी प्रतिभा और संघर्ष के दम पर मैदान में हूं.. भले ही निर्दलीय होती… और कहती कि मेरे अध्यक्ष बनने के बाद पालिका मैं ही चलाऊंगी.. लेकिन अफसोस ऐसा है नहीं ।
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चन्दकान्त शुक्ला, उन्नाव वाले

 

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