न्याय हैं यह..

Posted by HARYANA GIRL
November 6, 2017

Self-Published

दिनांक 04 सितम्बर 2017 को दो वर्ष और सात महीने बाद मैं आज़ाद हो गई एक ऐसे आरोप (सम्मन) से, जो मैंने किया ही नहीं। आरोप था- की मैंने एक Lady ASI और Legal Advisor के खिलाफ DC, SP, CTM, CM Window को झूठी शिकायतें दी हैं। मेरी शिकायतों पे सब बड़े अधिकारियों ने यह ही कहा की एक्शन लिया जा रहा हैं… कमाल हैं मुझ आम लड़की मैं इतना दम की मैं किसी पुलिस या वकील से पंगा ले सकूँ। मेरी शिकायतें यह थी की इन दोनों (Lady ASI और Legal Advisor) ने मुझे दिनांक 14 नवम्बर 2014 को मेरे द्वारा किये गए एक केस में इतना गुमराह कर दिया की आज मैं समाज मैं एक मजाक का पात्र बन गई। एक ऐसा सम्मन जो मेरे समाज मैं लोगो द्वारा ऐसे ?? प्रश्न- चिन्ह को भी लेके आया की “तुमने ऐसा क्या अपराध कर दिया की आपको सम्मन मिला” वो सम्मन न जाने कितने हाथों मैं खुले आम एक सरकारी व्यक्ति द्वारा मुझ तक पंहुचा, जबकि हम बात करते हैं ‘निजता का अधिकार’.. यह एक नहीं दो नहीं, बहुत बार हुआ। इतना ही नहीं पुलिस, वकील के साथ डॉक्टर्स (जिन्हें हम अपना देवता कहते हैं) उन्होंने भी मुझे पागल घोषित करने मैं कोई कमी नहीं रहने दी, जब मैं अपने अधिकारों के लिए लड़ रही थी…

मेरे केस मैं मुझे उन्नीस महीने तारीखों पे परेशान होते-होते यह मालुम होता हैं की केस डिस्पोज कर दिया गया। फिर जब उन दोनों (Lady ASI और Legal Advisor) को यह मालुम हुआ की मैं चुप नहीं रहने वाली तोह फिर से केस रेस्टोरेशन की बात आ गई। फिर से तारीखों का दौर शुरू हो गया। और उन उन्नीस महीने के एक वर्ष बाद आज लगभग ढाई वर्ष बाद यह न्याय मिला की केस डिसमिस हो गया।

मुझे समझ ही नहीं आ रहा की मुझे खुश होना चाहिए या रोना चाहिए। लेकिन फिर भी उम्मीद बरकरार हैं की मेरा देश ऐसा नहीं हो सकता। मुझे न्याय मिलेगा…

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