पैराडाइज़ पेपर पर चुप्पी, कालेधन से कैसी लड़ाई है मोदी जी

Posted by Komal K
November 21, 2017

जिस तरह प्रजा हमेशा से ही राजा से उम्मीद करती है कि राजा उनके ही हितों के लिए कार्य करेगा और राजा केवल अपने हित को देखता है, उसी प्रकार हमारे देश में लोकतंत्रीय व्यवस्था तो लागू है लेकिन हमें केवल लोकतंत्र का एक मुखौटा दिखाया जा रहा है अदृश्य तानाशाही इस समय कार्य कर रही है , यह केवल हमारे हि न्दुस्तान की दुर्दशा नहीं है बल्कि पूरे विश्व में बड़े-बड़े पदों पर आसीन लोग अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करते रहे  है।

पैराडाइज़ पेपर्स घोटाला हो या पनामा पेपर्स क्या आपने पढ़ा कि किसी गरीब मज़दूर का नाम शामिल हो? नहीं, क्योंकि भारत में तो जनता को खीच-खीच कर टैक्स देने के लिए कहा जाता रहा है वहीं दूसरी तरफ पूंजिपति वर्ग अपना टैक्स बचाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाते हैं अपने पैसों को विदेशों के बैंको में छिपा देते है या फिर विदेशों में ऐसी जगह कंपनिया खोलते हैं जहां टैक्स लगता ही नहीं, उन जगहों को टैक्स हैवेन कहा जाता है।

पैराडाइज़ पेपर्स में विश्व की बड़ी हस्तियों जिनके नाम शामिल हैं ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के सलाहाकार और देनदाताओं के नाम, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के दामाद जैरेड कुरानर, कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रुडो के चुनावी अभियान के लिए चंदा जुटाने वाले उनके सलाहाकार और आइलैंड ऑफ जर्सी पर बने दो ट्रस्ट में क्वीन नूर के नाम शामिल है। पूरे विश्व का यहीं हाल है अब यह केवल एक देश की लड़ाई नहीं बल्कि पुरे विश्व में पूँजीपतियों के खिलाफ लड़ाई है।

कर चोरी में विश्व के 180 देशों में भारत 19वें पायदान पर है। भारत के 714 नामी गिरामी पूँजिपति वर्ग का नाम पैराडाइज़ पेपर्स में शामिल है भारत में बीजेपी के सांसद आरके सिन्हा से पैराडाइज़ पेपर्स से जुड़ा सवाल पूछा गया तो उन्होंने एक कागज पर लिखकर बताया वे सात दिन के भागवत यद्य में मौनव्रत हैं। यह लिखकर उन्होनें अपनी मुसीबत को कम कर लिया। अमिताभ बच्चन जिन्हें पहले ही इस बात का संदेह हो गया इसलिए उन्होंने पहले ही सोशल मीडिया पर सफाई दे दी| साथ ही फिल्म अभिनेता संजयदत्त की पत्नी दिलनशील संजयदत्त, विजय माल्या, डॉ अशोक सेठ, मीरा राडिया, हर्ष मोइली , कीर्ति चिदंबरम, अशोक गहलोत, सचिन पायलट जैसे प्रभावशाली लोगो के नाम इसमें शामिल हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कालेधन के खिलाफ जंग छेड़ी थी तो क्या विदेशों से पैसा वापस आया? स्विस बैंको में जमा धनराशि भी मोदी जी ने जनता के बैंक खातों में डालने की बात कहीं थी। उनकी सरकार बने तीन वर्ष से भी अधिक समय हो गया ये वायदा आज तक पुरा नहीं हुआ।

पनामा पेपर्स लिक्स को 18 महीने हो गये और अभी तक जाँच की रिपोर्ट सामने नहीं आई तो हम कैसे दोषियों के खिलाफ कार्यवाई की उम्मीद कर सकते है भारतियों ने जितना कालाधन देश में जमा व निवेश के रूप में रखा है उससे कई गुना अधिक विदेशों में रखा है।

यूँ तो प्रधानमंत्री मोदी हमेशा ही काले धन पर नकेल कसने की बात करते रहे है लेकिन आज तक किसी भी आरोपी के खिलाफ कार्यवायी करते दिखे नहीं सारी बाते चुनावी जुमला बन कर रह गया है, जब भी मोदी जी चुनावी भासन को सम्बोधित करते है काला धन का भूत बहार आता है और चुनाव ख़तम होते ही काले धन की बात भी ख़तम हो जाती है।

पनामा पेपर्स हो या पैराडाइज़ पेपर लीक जब भी बड़े उद्योगपतियों और राजनेताओ का नाम सामने आता है तो हमारे प्रधान सेवक मोदी जी की चुप्पी उनके काले धन के खिलाफ लड़ाई के नियत पर शक पैदा कर देती है।

  • कोमल

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