पेंटिंग का सच

Posted by Avanindra Singh
November 13, 2017

Self-Published

http://कमरें मे प्रवेश करते ही दीपा चौंकी,एक छोटा सा कमरा जिसमें एक पलंग पडा है।चारो तरफ बिखरी किताबें,पेन्टिग्स,डायरियाँ बिखरी पडी है और पलंग पर अस्त वयस्त कपडे पहने एक युवक बैठा है,जो किसी पेन्टिंग को निहार रहा है।उसके चेहरे पर हताशा,निराशा के भाव आ रहें हैं।वह अपने विचारों में इतना खोया हुआ है कि उसे पता ही नही चला बडी देर से कोई दरवाजे पर खडा उसे देख रहा है।’तुम यहाँ रहते कैसे हो’ सहसा वह चौंका।इस स्वर में परिचय की मिठास थी।’क्यों यहाँ क्या है’ उस युवक ने कहा।’इतनी गर्मी है यहाँ।’दीपा ने कहा,जैसे दीपा की बात उसके कानों तक पहुँची ही नहीं और फिर वो अपने विचारों में खो गया।दीपा वहीं बैंठकर उसकी डायरी पढने लगी।। उस युवक का नाम राजीव था। राजीव और दीपा एक ही कालेज में पढते थे।उनके स्वभाव में समानता ज्यादा और मतभेद कम थे।इसलिए वे एक दूसरे की तरफ आकर्षित हुये।राजीव दीपा को अक्सर अपनी कवितायें और पेन्टिग्स दिखाता।दीपा बडी गंभीरता से उनका निरीक्षण करती,कमियों की ओर इशारा करती और उसका हौंसला बढाती।जैसे जैसे समय बीतता गया उनकी दोस्ती गाढी मित्रता में बदल गयी।पर पिछले कुछ दिनों से राजीव कुछ अनमना सा हो गया था और उससे मिला भी नहीं।इसलिए आज वह उससे मिलने उसके हास्टल के कमरें में आयी थी।’वाह क्या सुन्दर चित्रण है इस कविता में’डायरी पढती हुयी दीपा बोली,इतनी सुंदर और कोमल भावनायें आती कहाँ से हैं तुम्हारें मन में।तुम्हारी पेन्टिग्स में भी रंगो का चयन,कल्पनाओं का उत्कर्ष सब अविश्वनीय,क्या तुम किसी से प्यार करते हो।’राजीव ऊपर से नीचे तक सिहर उठा।’नहीं नहीं….अरे ये तुमसे किसने कहा’मुझसे कौन कहेगा,तुम्हारी कवितायें पढकर मुझे ऐसा लगता है’दीपा ने सहजता से कहा।राजीव भावुक होकर बोला”कलाकार तो हर चीज से प्रेम करता है।वैसे ही मैं भी करता हूँ,अपनी कविताओं से,अपनी पेन्टिग्स से और…..।”और,और क्या’दीपा ने उत्सुकता से पूँछा।दोनो की नजरें मिली।आवाज ने अपना काम कर दिया था अब आँखें अपना काम कर रहीं थी।”अच्छा अब मै चलती हूँ,माँ ने कहा था जल्दी आ जाना”।दीपा ऐसे उठी जैसे पलंग ने उसे काट लिया हो।कमरे से निकल कर जाने लगी और राजीव उसे जाते हुये देखता रहा।। राजीव उन युवकों मे था जो अपने में ही व्यस्त रहते हैं।वो पूरा दिन किताबों में,पेन्टिग्स मे बाकी समय मे जीवन और समाज के विषय के विषय में सोंचने में व्य्तीत करता था।आज तक उसने कभी किसी भी तरफ आकर्षण महसूस नहीं किया था।पर दीपा के आगे उसके ह्रदय ने कब हार मान ली उसे पता ही नही चला।दीपा बहुत सुंदर नहीं थी,पर उसकी आँखो में चंचलता और शान्ति का एक साथ होना किसी को भी आकर्षित कर सकता था।दीपा उन लडकियों मे से थी जिनका सौन्दर्य देवता की एकान्त साधना के लिए होता है,अपनी आँकाक्षा और वासना मिटाने के लिए नहीं।अभी तक उसके मन ने हीं उससे ये बात छिपा कर रखी थी। ये बात उसे तब पता चली जब दीपा ने उससे कहा कि उसकी शादी तय हो गयी है।पहले तो राजीव खुश हुआ अगले ही पल एक दर्द की लहर उठी और उसके सारे शरीर में फैल गयी।उदासी उसके अंग अंग मे जम गयी ।तब उसे पता चला कि उसका मन तो पहले ही दीपा को समर्पित हो चुका है। आज के दिन का इंतजार हर लडकी उस दिन से करने लगती जब यौवन की सीढी पर वो अपना पहला कदम रखती है।आज दीपा की शादी है।चारो तरफ खुशनुमा माहौल,बिजली की जगमगाहट,हलवाइयों का चिल्लाना,भागदौड।पर एक युवक इन सबसे विरक्त,नैराश्य में भी चेहरे पर प्रसन्नता लिये हुये,दौड दौड कर काम कर रहा है।धीर धीरे बाराती आ गये।लोग दौड दौड कर उनके स्वागत की तैयारी करने लगे।थोडी देर बाद पंडित जी ने लडकी को बुलाने का घर वालों से आग्रह किया।उस दिन दुनिया की सबसे सुन्दर दिखने वाली लडकी दीपा आयी।दीपा मंडप मे बैठी,फेरे होने लगे।फेरे लेते समय दीपा के चेहरे पर जो भाव थे उसे देखकर राजीव को न जाने क्या हुआ वो अपने हास्टल की तरफ भागा।वहाँ पहुँचकर उसने अपना कमरा खोला और अपनी अधूरी पेन्टिंग निहारने लगा।वह बहुत दिनों से एक पेंन्टिंग मे काम कर रहा था पर उसे पूरा करने के लिए जो भाव चाहिए थे वे उसे मिल नहीं रहे थे।। अब वह सब कुछ भूलकर पेन्टिंग पूरी करने लगा।बेहोशी में उसे याद नही था कि उसने दो दिन से भोजन नहीं किया है।पहले वो शादी की तैयारियों मे लगा रहा अब वह पेन्टिंग पूरी करने लगा।पूरी रात बीत गयी,दिन का पहला पहर बीत गया।आखिर मे पेन्टिंग पूरी हुयी।अचानक उसके दिल में दर्द उठा और वह जमीन पर लेट गया।उसके बगल में पेन्टिंग थी जिसमें मीरा रानी की वेश में है और अपने पति राजा भोज की बाँहों में है और बगल में क्रष्ण सन्यासी वेश धारण किये खडे हैं।फेरे लेते समय दीपा के चेहरे पर जो सन्तुष्टि के भाव थे वही भाव मीरा के चेहरे पर साफ दिख रहे थे।राजीव के द्वारा बनायी गयी पेन्टिंग तो सजीव हो गयी थी वही उसके बगल में राजीव की निर्जीव लाश पडी थी।जहाँ एक ओर आज दीपा ने एक नये जीवन में प्रवेश किया वहीं दूसरी ओर राजीव ने दूसरे जन्म में।क्या किसी के प्रति इतना समर्पण उचित है अन्तर्यामी इस प्रश्न का उत्तर देने से कतरायेंगे।। अवनीन्द्

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