पैराडाइज पेपर: काला धन चुनावों में लगता है

Posted by Vishnu Prabhakar
November 7, 2017

Self-Published

8 नवंबर को नोटबंदी का एक साल पूरा हो जायेगा। विपक्षी पार्टियां इसे काला दिन कह कर विरोध जताएंगी वहीं सत्ताधारी पार्टी इसे काले धन पर प्रहार बताते हुए जश्न मनायेगी। सवाल है, क्या भारत में टैक्स चोरी बंद हो गयी है? कितना काला धन नोटबंदी के जरिये पकड़ा गया? नोटबंदी से कितना काला धन पकड़ा गया ये अभी तक सरकार को भी नहीं पता है। तरह तरह के आंकड़े दिए जा रहे हैं। बहरहाल नोटबंदी पर चल रही इस बहस के बीच इंडियन एक्सप्रेस ने पैराडाइज पेपर के संबंध में खुलासा किया है। 
क्या है पैराडाइज पेपर?
 
पैराडाइज पेपर 34 लाख पेपर्स का सेट है। इसमें दुनिया के 180 देशों के अमीर लोगों का नाम शामिल है। ये अमीर लोग विदेशों में पैसे जमा करते हैं और ऑफशोर कंपनी यानी शेल कंपनी के माध्यम से पैसा बचाते हैं। इस लिस्ट में भारत का 19 वां स्थान है जिसमें 714 भारतियों का नाम शामिल है। इसमें केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा, बिहार से बीजेपी के सांसद आर के सिन्हा, पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस सांसद वीरप्पा मोईली, पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम, बॉलीवुड स्टार अमिताभ बच्चन, संजय दत्त की पत्नी मान्यता दत्त के भी नाम शामिल है। बताते चलें कि अमेरिका स्थित इंटरनेशनल कंसोर्शियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (आईसीआईजे) द्वारा जारी किए गए पैराडाइज दस्तावेज से यह खुलासा हुआ है। इसी संगठन ने पिछले साल पनामा दस्तावेजों का खुलासा किया था जिससे दुनियाभर की राजनीति में भूचाल आ गया था। 
 
कंपनियाँ कैसे बचाती हैं अपना टैक्स? 
 
लिस्ट में दो फर्म का नाम है जो अमीरों का पैसा विदेशों में जमा कराते हैं। एक है बरमूडा की एप्पलबी और दूसरा है सिंगापुर की एशियासिटी। पेपर में जिन कंपनियों का नाम है वो कंपनियां कुछ ऑफशोर यानि शेल कंपनियों के ज़रिए टैक्स का पैसा बचाती हैं। शेल कंपनियों के पास कोई पंजीकृत दफ्तर और कर्मचारी  नहीं होते हैं। बड़े बड़े पूंजीपति अपने काले धन को छुपाने के लिए भी शेल कम्पनियाँ बनाते हैं। शेल कंपनियों के जरिये काला धन अपने खाते में डालकर सफेद कर लेते हैं। काले धन को एंट्री ऑपरेटर को दिया जाता है। एंट्री ऑपरेटर काले धन को शेयर में बाँट लेता है। और फर्जी कंपनियों के माध्यम से ये पैसा फिर से असली मालिक के पास पहुँच जाता है। कंपनी की वैल्यू रातों रात बढ़ जाती है। 
 
2014 का आम चुनाव और ओमेदियार नेटवर्क
 
2009 में ओमेदियार नेटवर्क से सबसे ज्यादा निवेश किया। निदेशक थे जयंत सिन्हा। एक वेबसाइट ने 26 मई 2014 को ही ये लिखा था कि ओमेदियार नेटवर्क के निदेशक मोदी को जिताने में लगे हैं। 16 मई को ओमेदियार नेटवर्क ने ट्वीट करके जयंत सिन्हा को बधाई भी दी थी। याद रहे 16 मई को ही लोकसभा का परिणाम आया था। 2014 के आम चुनाव में भाजपा ने पैसे को पानी की तरह बहाया था। सैकड़ों रैलियां की गईं जिसमें कई सौ करोड़ रूपये खर्च किये गए। उस वक्त भी कुछ लोगों ने ये इशारा किया था कि आखिर ये पैसा कहाँ से आ रहा है। 
याद रहे जब विमुद्रीकरण हुआ था तब अर्थशास्त्रियों ने ये कहा था काला धन विदेशी बैंकों में जमा है। अब सवाल ये है क्या 2014 के चुनाव में काले धन का बहुत बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हुआ था? इसका जवाब तो आने वाला समय ही देगा पर इस बात की पूरी संभावना भी है। अगर ऐसा है तो ये भारतीय लोकतंत्र के लिए बहुत खतरनाक है। 
नोटबंदी का फायदा क्या हुआ इसके जबाब की आस लगाए देश का आम आदमी बैठा है। जिसको लागू करते वक्त ये कहा गया था कि नोटबंदी से एक ही झटके में सारा काला धन पकड़ा जायेगा। पैराडाइज पेपर में भाजपा, कांग्रेस के नेताओ का नाम है। चुनावों में जो करोड़ो रूपये खर्च किये जा रहे हैं दरअसल यही काला धन जिसको फर्जी कंपनियों के माध्यम से सफ़ेद करके चुनावों में निवेश किया जा रहा है। 

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