बाल दिवस

Posted by Saurabh Singh
November 14, 2017

Self-Published

#Happy childrens’ day

कहा जाता है कि बच्चे भगवान का रूप होते हैं और आज का दिन उन्हीं बाल प्रभुओं का समर्पित किया गया है,
जी हाँ सबका दिन आता है आज बच्चों का है,चाहे वो ऐशो आराम की जिंदगी जीने वाला बच्चा हो,मध्यवर्गी बच्चा हो या सड़क पर कचरा बीनने वाला बच्चा हो , आज उसका दिन है|
आज अपने घरों में बाल मजदूरी कराने वाले भी happy childrens’ day बोलेंगे और अपने बच्चों के साथ जानवर जैसा व्यवहार करने वाले ,उनपर अपनी इच्छा थोपने वाले और बच्चों की जरा सी गलती पर उन्हें जमकर कूट देने वाले भी happy childrens’ day बोलेंगे, क्योंकि आज बच्चों का दिन है |
चाचा नेहरू की मृत्यु से पूर्व बाल दिवस 20 नवंबर ( Universal Children’s Day by The United Nations) को मनाया जाता था और उनकी मृत्यु के बाद से यह उनके जन्मदिन पर मनाया जाने लगा क्यों कि नेहरू जी का बाल प्रेम जगजाहिर था,शायद उस समय लोगों का विचार होगा कि इससे बच्चों को खुशी मिलेगी और नेहरू जी की आत्मा को शांति, पर अफसोस उन्हीं लोगों ने अपनी सोच को ग्रहण लगा दिया और जिस तरह से अच्छे भले बच्चों में आत्महत्या की भावना का विकास हो रहा है और भारत की एक बड़ी बाल आबादी भूखे पेट सो रही है उस तरह से तो नेहरू जी की आत्मा को शांति मिलने से रही |
#आज के दिन की सार्थकता इसी में है कि आज हम अपने स्वार्थ और लालच से ऊपर उठकर उन बच्चों के बारे में सोचें जो सिर्फ किसी के बुढ़ापे का सहारा नहीं अपितु पूरे भारतवर्ष का भविष्य हैं , कम से कम आज बच्चों को ये बताने की अपेक्षा कि आप उनसे करवाना क्या चाहते हैं ,उनसे ये पूछिये कि वो करना क्या चाहते हैं।
©सौरभ सिंह

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