भ्रष्टाचार एक अभिशाप

Posted by Raju Murmu
November 25, 2017

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भारत मे भ्रष्टाचार का इतिहास बहुत पुराना रहा है । हम भारतीय यह जानते है की अँग्रेजो ने भारत मे एक लम्बे समय तक यहा शासन किया था । थोड़े से अँगरेज़ व्यापार करने के इरादे से यहाँ आये थे परँतु यहाँ के लालची महत्वकाँक्षी जागीरदारो और देशी शासको के भ्रष्ट आचरण ने इस विशाल देश को अँग्रेजो के हवाले कर इस देश के लोगो को गुलाम बनने पर मजबूर कर दिया । अँग्रेजो की नीति ही यही थी की अपनी महत्वकांक्षाओं को पूरा करने के लिये शाम दाम दंड भेद सब का इस्तेमाल करो ।

अँगरेज़ कई ऐसे लोगो को पदो का लालच देकर , शासन का लालच देकर उसे अपना गुलाम बनाते थे और ऐसे लोग उनके जाल मे फँसकर अंगेजों के तलवे चाटने लग जाते थे । ऐसे लालची लोगो को नैतिकता और अनैतिकता मे कोई विभेद नही दिखता । ऐसे चंद भ्रष्टाचारी लोगो के लालच के कारण ही देशभक्त इमानदार हजारो भारतीयो ने अँग्रेजो के गुलामी से इस देश को आजाद कराने के लिये अपना रक्त बहाने पड़े । जान देने पड़े जुल्म सहने पड़े कईयो को तो फाँसी पर लटका दिया गया । जुल्म और शोषण के खिलाफ कई जनआंदोलन हुये लेकिन जब इतनी कुर्बानियो और शहादत देने के बावजूद यह भ्रष्टाचार की काली शाया इस देश की जड़े खोखली करने मे लगी हुई है ।

अँगरेजो से मुक्त हुये भारत को लगभग सत्तर वर्ष पूरे हो गये लेकिन अँग्रेजो की दी हुई भ्रष्टाचार को आज भी हमारे इस देश मे बड़ी शिद्दत से संजो के कुछ महत्वकांक्षी लोगो ने रखा हुआ है । गुलाम बनाने की वह लालसा कई रूपों मे हमारे समाज मे किसी भयानक रोग की तरह फैला हुआ है । पहले भी राजसत्ता मे ऐयाशियों जागीदार और साहूकारो का लालच और दोगलापन निरीह कमजोर पर प्रबल था और आज भी स्वतंत्र भारत मे निरीह कमजोर जनता ही उनके भ्रष्टाचार के शिकार होते रहे है ।

इसी भ्रष्टाचार के कारण ही भारत जैसा देश कई विदेशियो के अधीन रहने को मजबूर हुआ । और आज भी यह सिलसिला नासूर की तरह हमारे भारतीय समाज मे फैला हुआ है । भ्रष्टाचार की यह बीमारी विदेशी शासको द्वारा विरासत मे कुछ लालची लोगो को मिली है । वे स्वभाव से ही मजबूर है भ्रष्टाचार करने के लिये इसमे उसका कोई दोष नही ! वे क्या जाने नैतिकता और अनैतिकता की बाते ! इनकी अंतरात्मा विवश करती है ऐसे लोगो को भ्रष्टाचार करने के लिये तो वे वैसा करते है ।

आज अगर हम भ्रष्टाचार की बात करे और अपनी दृष्टि अतीत पर डाले तो कई जघन्य घोटाले इस देश मे हुई जिसपर कोई राजनीतिक दल खुल कर राष्ट्रीय स्तर पर परिचर्चा नही करते और ना ही कभी वे करना चाहेंगे । हम यह सोचते है की इस देश की आर्थिक , राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्था बदल डालेँगे तो यह एक मील का पत्थर साबित होगा क्योकि इस भ्रष्टाचार ने इस देश मे सामाजिक असमानता की खाई खोद दी है जिसे शायद खत्म करने मे यह सदी कम पड़ जाये । भूत और वर्तमान के आधार पर हम एक बेहतर भारत का भविष्य तय नही कर सकते !

ऊपर से नीचे तक Corruption यानी भ्रष्टाचार मे लिप्त पाये जाते है लेकिन इस आचरण के प्रभाव से लोग अनभिज्ञ है ।

क्या होता है भ्रष्टाचार ? किसे कहते है भ्रष्टाचार ?
भ्रष्टाचार यानी भ्रष्ट + आचरण । भ्रष्टाचार का अर्थ बिगड़ा हुआ या विकृत आचरण , वह व्यवहार जो पूर्णरूप से विकृत अनैतिक और अनुचित व्यवहार भ्रष्टाचार की श्रेणी मे रखना गलत नही होगा ।
भ्रष्टाचार के अंतर्गत एक व्यक्ति या व्यवस्था के अंदर अनैतिकता और धन को केन्द बिँदु माना जाता है अर्थात किसी व्यक्ति या व्यवस्था द्वारा अनुचित तरीके से अपने लाभ के लिये धन या कोई सेवा का लेन देन करना या किसी को उन सेवाओ और धन का प्रलोभन देना या लेना ‘ भ्रष्टाचार ‘ कहलाता है ।

आज किसी भी कार्य को करने के लिये आप अपने घर से बाहर निकलते है चाहे वह घर बनाने की बात हो , जमीन खरीदने की बात हो , नौकरी पाने की बात हो , बेटी के रिश्ते की बात हो , एक शहर से दूसरे शहर मे जाने की बात हो , इलाज कराने की बात हो , एक नेता चुनने की बात हो , वोट देने की बात हो सब तरफ कही ना कही आपको भ्रष्टाचार बुरी तरह व्याप्त दिखेगी । अगर आप इसका विरोध करते है तो लोगो को प्रतिउत्तर मे यह कहते हुये तनिक भी शर्म नही आती है की – ‘ अरे भाई सब चलता है ‘ ……यह तो हद ही हो गई यार यानी ईमानदारी को जैसे शरबत बनाकर पी गये हो !

भारत मे ऐसे कई घोटाले हुये है जिसमे न्यायपालिका , सेना , राजनेता , अभिनेता , नौकरशाही , कॉरपोरट , संचार माध्यम (मीडिया ) , चुनाव सम्बन्धी घोटाले होते रहे है जिसमे खुलकर रिश्वतखोरी अव्यवस्था और गैर जिम्मेदारी के आरोप लगते रहे है । परंतु विडम्बना यह है की सारे के सारे मामले किसी धुँध मे कही खो जाते है । जनता भी क्या करे ? क्यो पड़े इन पचड़ों मे ! सच्चाई तो यह है की इस तरह की उच्य स्तरीय घोटाले की खबर जनता तक जल्दी पँहुचती ही नही और अगर पहुँच भी गई तो बेचारे चुनाव के दौरान किसी राजनीतिक दल को अपना सिर्फ अँगूठा लगाने के अलावा कर ही क्या सकते है ! विभिन्न वर्गो मे बता भारतीय जनता जनार्दन कुछ कर ही नही सकते यही पर कर्तव्यनिष्ठ और इमानदार लोगो की हार होती है और पुनः एक भ्रष्ट व्यवस्था की पुर्नावृति होती है और कई नये घोटालो का सृजन होता है ।

ऐसा भी नही है की इस प्रकार के भ्रष्टाचार के विरुध संघर्ष ना हुआ हो ! कई लोगो ने समय समय पर भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन करते रहे है ।
1963 मे डॉक्टर राममनोहर लोहिया जी ने संसद मे हुई एक बहस मे कहा था – ” सिंहासन और व्यापार के बीच सम्बन्ध उतना ही दूषित , भ्रष्ट ,और बेईमान हो गया है उतना दुनियाँ के इतिहास मे कभी नही हुआ है” ।
1974 मे जयप्रकाश नारायण ने भ्रष्टाचार के खिलाफ ” सम्पूर्ण क्रन्ति ” आंदोलन किया था । 1984 मे बोफीर्स के खिलाफ विश्वनाथ प्रताप सिँह ने आंदोलन किया था । विदेशो से कालाधन वापस लाने के लिये बाबा रामदेव ने भी कोई कसर नही छोड़ा था लेकिन बाद मे पतंजलि जैसे देशी कम्पनी के अरबो के मालिक बन गये । अन्ना हजारे ने भी जनलोकपाल विधेयक के लिये अनशन किये थे जिसके उपरांत एक नये राजनीतिक पार्टी का उदय हुआ ।

08 नवम्बर 2016 को 500 और 1000 के रुपये पर रातोरात रोक लगा दी गई थी । इससे भ्रष्टाचार पर नियंत्रण नही हो पाया इसके विपरीत कई अवसरवादी लोगो ने इसी बहाने करोड़ो रुपये का वारा न्यारा कर दिया । करोड़ो रुपये के नये नोट की खेप पकड़े गये । आज तक कितनो को सजा मिली पता नही । लेकिन देश की जनता इस नोटबंदी मे जरूर पीस गई । रात रात भर एटीएम मशीन के आगे हाथ फैलाये खड़े रहे ताकि अपनी दैनिक जरूरतो को पूरा कर सके ।

2005 मे भारत मे ‘ ट्रांसपेरेंसी इंटरनॅशनल’ नामक एक संस्था ने अपने अध्ययन मे पाया की 62% से अधिक भारतवासीयो को सरकारी कार्यालयो मे अपने काम कराने के लिये रिश्वत या ऊँचे दर्जे की सिफारिश करनी पड़ती है । 2008 मे दी गई एक रिपोर्ट मे यह कहा गया था की लगभग 20 करोड़ की रिश्वत अलग अलग लोक सेवको को दी जाती है ।

भारत मे भ्रष्टाचार को रोकने के लिये बहुत से कदम उठाये गये और कई कानून भी बनाये गये है

भ्रष्टाचार विरोधी अधिनियम -1988 ।
सिटीजन चार्टर act ।
सूचना का अधिकार अधिनियम -2005 ।
कमीशन ऑफ इनक्वाइरी एक्ट – 1956।

– राजू मुर्मू

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