मेरी कहानी

Posted by raghavendra pratap singh
November 12, 2017

Self-Published

10 class का वो समय जब पहली बार प्यार हुआ पता नही कब और कैसे हुआ,,,,हमारा ग्रुप स्कूल का सबसे बदमास लड़को का ग्रुप था,,पता नही क्यो वो टीचर्स से हमेशा मेरी ही शिकायत करती थीं और मैं उसे प्यार समझ लेता था ,,,,परीक्छा का समय आ गया बोर्ड के एक्जाम थे मेरे जहन में वो ऐसे बसी की उसके साथ रहने के लिए मैंने अपनी सारी बदमाशियां बन्द कर सिर्फ पढ़ाई करने लगा सिर्फ एक ही सपना मन मे था 11वी में उशके साथ ही पढ़ना हैं 67प्रतिशत के साथ पास हो गया लेकिन हमारे प्रिंसपल साहब ने मुझे प्रवेश ही नही दिया,,,,,उसके ख्यालो में खोकर 11वी और12 वी में बहुत मेहनत से पढ़ा मगर इंजीनियर बनने की चाहत को भी धक्का लग गया जब 12वी के रिजल्ट में 52प्रतीशत आये वो इंजीनियरिंग करने लगी मैं बीकॉम उसे रोज देखने जाता था उशके कॉलेज लेकिन वो मेरे दिलो दिमाग मे बसी थी पता नही क्यो मुझे लगा पैसे कमा लुंगा तो शायद वो मेरी हो जाये तो 1ईयर से ही घर वालो खासकर पापा जो कि एक सरकारी कर्मचारी थे उनके विरोध के बाद भी काम धंधे में सफलता रोज मेरे कदम चूमने लगी बहुत तेजी से भागने लगा समय इस बीच उसे बोलने की बहुत कोशिश की लेकिन कभी बोल नही पता था उस्की भी पढ़ाई पूरी हो चुकी थी और वो भी जॉब करने पुणे चली गई थी,,,,मैन भी अपना मुकाम हाशिल कर लिया था अपने दोस्तों और परिवार के बीच एक सफल बिजनेसमैन बन चुका था,,,,अब हमारी बाते भी होने लगी थी उसे लगता था मैं बोलूंगा लेकिन मैं बोल नही पाया कि तुम ही हो जिसे पाने के लिए मैं भाग रहा हु।।।।।तभी एक दिन मेरे पिता ने मुझे कसम दी कि आज तक तुमने कभी मेरा कहा माना नही आज मान लो मैं जहाँ कहता हूं वहाँ शादी कर लो मैं दो राहे पर खड़ा था अपने पिता के आदेश को मना नहीं कर पाया पता नही मैन सही किया कि गलत पर मैंने अपने आप को ही खो दिया आज शादी के 9 वर्ष बाद भी मै उसे भूल नही पाया,,,,,,,,,

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