मैं कौन हूं तेरे लिए

Posted by Nidhi Yadav
November 12, 2017

Self-Published

ढ़लती शाम हूँ मैं तेरे जीवन की,

फ़िसलती रेत हूँ मैं तेरे आंगन की,

वो स्थान हूँ मैं तेरी आँखों के बीच में है,

वो प्राण हूँ मैं जिससे तू भी एक जीव है,

वो सम्मान हूँ मैं जो तेरे पास रह गया,

वो अपमान हूँ मैं जो तू हंसते हंसते सह गया,

वो झुकाव हूँ मैं जो तेरा प्यार की ओर है,

वो रुकाव हूँ मैं जिससे गली में उमड़ा शोर है,

वो शांति हूँ मैं जो तूफान के पहले रहती है,

वो क्रांति हूँ मैं जो तेरे दिल में बहती है,

वो भावना हूँ मैं जिसे तू महसूस न कर पाया,

वो कामना हूँ मैं जिससे खुदा भी है डर पाया,

वो गीत हूँ मैं जिसे तू उम्दा कह गया,

वो सांस हूँ मैं जिससे तू जिंदा रह गया!

           – Nidhi

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