मोदी-जी

Self-Published

2002 के चुनाव में मोदी जी के रूप में भाजपा की जीत हुई थी, फिर चाहे सगठन के रूप में भाजपा ने इस चुनाव के अंतर्गत गोधरा के मुद्दे पर किसी भी तरह चुनाव प्रचार में शामिल करने से इनकार कर दिया था लेकिन इस चुनाव में गोधरा का ही मुद्दा छाया रहा, यही वजह थी की मोदी जी कद, एक हिंदू सम्राट के रूप मे इतना बड़ा हो गया था की इसके सामने गुजरात राज्य इकाई भाजपा का कद बोना लग रहा था, वही दिल्ली भी इस से भयभीत हो रही थी, लेकिन मोदी जी ने आने वाले समय में खुद की छवि में निरंतर सुधार करने के साथ, गुजरात राज्य की राजनीति को ही नया मोड़ दे दिया है.

मोदी जी ने अपनी छवि को बहुत बढा उभारने के लिये सर्वप्रथम अपने व्यक्ति शख्सियत को काफी बदल लिया, मसलन जब 2001 के आखिर में गुरु नानक जयंती के सिलसिले में गुरुद्वारा साहिब में हो रहे प्रोग्राम पर मैने मोदी जी को बतौर मुख्यमंत्री देखा था, इस समय वह बहुत सामान्य इंसान की छवि को प्रस्तुत कर रहे थे दरम्यान शरीर, कद, काठी, दाढ़ी में कुछ बाल हल्के काले रंग के भी मौजूद थे, जंहा तक मुझे याद है मोदी जी ने हल्का नीला सफेद रंग का खाखी कुर्ता पहन रखा था और टाइट पँजामी थी, बहुत ही सामान्य शब्द में गुरु नानक जयंती पर इन्होंने सिख संगत को बधाई दी, कुछ शब्द कहने के बाद अक्सर, चेहरे पर एक मुस्कान आ रही थी लेकिन हाथ आगे की ओर नम्र भाव में जुड़े हुये थे, मसलन हाथो की ओर शरीर की स्थिति, बोलते वक़्त एक ही जगह स्थाई थे हाँ रुक रुक मुड़ते जरूर थे ताकि गुरुद्वारा साहिब मैं बैठै हुये हर व्यक्ति से वह व्यक्तिगत रूप से जुड़ सके.

लेकिन 2002 के चुनाव के बाद, मोदी जी की व्यक्तिगत शख्शियत में बहुत बदलाव आया है, अगर हम 2002 से 2007, के समय काल की ही बात करे, तो मोदी जी के चेहरे के बाल अब पूरे सफेद रंग के हो गये थे, सर के पीछैं के बाल घुंघराले ओर काफी ज्यादा आ गये थे, कभी कभी मोदी जी किसी फंक्शन या सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान चश्मा पहन कर भी दिखते थे लेकिन अमूमन वह बिना चश्मा के ही ज्यादा तर नजर आते थे परंतु जैसे समय बीतता गया मोदी जी अब चश्मा पहने हुये ही नजर आने लगे. अब खाखी कुर्ता, अलग ही स्टाइल का हो गया था, अब रंग फीका नही था यँहा तक की मोदी जी पीले रंग के कुर्ते में भी दिखने लगे थे, लेकिन पजामी हमेशा सफेद रंग की थी और वह भी टाइट पजामी, पैरो में आम तौर पर सामान्य चप्पल ही रहती थी मतलब शख्सियत में गंभीरता के साथ साथ, समय के साथ आगे बढ़ने वाले, चुस्त नेता की छवि को उभारा जा रहा था, लेकिन जो सबसे ज्यादा बदलाव आया था वह था मोदी जी के भाषणों में, जंहा मोदी जी एक मजबूत प्रवक्ता बन कर उभर रहे थे.

मोदी जी, जंहा भी जिस सभा में या सार्वजनिक मंच से बोलते, वह अक्सर माहौल के अनुसार शब्दो के साथ चेहरे के हाव भाव से लेकर, हाथो का भी अब ज्यादातर इस्तेमाल करने लगे थे, मसलन अगर किसी शिक्षा संस्थान, महिलाओ या बच्चो के सिलसिले में या किसी धार्मिक मंच से किसी कार्यक्रम में अगर मोदी जी सिरखत कर रहे है तो शब्द बहुत विनम्र, होते थे लेकिन जंहा जंहा भी उग्र भाव का इजिहार करना होता था मसलन सुरक्षा के संबध में, वँहा अक्सर मोदी जी की आवाज उची ओर कठोर हो जाती थी, लेकिन फिर चाहे शब्द रुक रुक कर धीमी गति से कहे गये हो या जज्बात का उभार करते हुये, शब्दो को कहने की गति में तेजी दिखाई गयी हो, हर शब्द नाप तोल कर बोला जाता था, यँहा ये कहना जरूरी है की मोदी जी कभी भी अपने बयानों के कारण मीडिया का शिकार नही बने जंहा बने है, मेरा वँहा व्यक्तिगत मानना है कि वँहा भी मोदी जी द्वारा कहे गये शब्दो पर पूरी पकड थी, कही भी गलती के आसार नही थे, मैं कह सकता हूँ की जँहा मोदी जी अपने कहे गये शब्दों के कारण विवाद में आये है, वँहा मोदी जी की जरूर कोई ना कोई विवाद में आने की मनसा जरूर रही होगी, क्योकि राजनीति में हमेशा चर्चा में बने रहना, भी फायेदमंद होता है.

लेकिन बतोर प्रवक्ता, मोदी जी ने अपना लोहा चुनावी सभाओं में मनवाया है, गुजरात के 2007, 2012 के  चुनाव हो या 2014 के लोकसभा चुनाव, मोदी जी अपने चलप्रतित लहजे में ही जनता के सामने आये, जब जब इन्हे विपक्ष पर हमला करना होता था तब तब इनकी आवाज उची होने के साथ साथ अपनी दहक की भी पहचान करवाती थी लेकिन यँहा विपक्ष या कांग्रेस जैसे शब्द ही इस्तेमाल होते थे, इस तरह मोदी जी अपना क्रोध या नारजगी, एक संगठन के प्रति व्यक्त करने के साथ साथ, विपक्ष या विरोधी संगठन को एक विचार धारा के रूप में दिखाते थे

लेकिन जब भी वह विपक्ष के किसी भी नेता पर शब्दो का प्रहार करते थे, खासकर 2007 ओर 2012 की चुनावी सभाओं में, अक्सर इनके निशाने पर गांधी परिवार ही रहता था, लेकिन मोदी जी इन्हे कुछ अलग ही नाम से पुकारा करते थे मसलन मेडम सोनिया, यँहा मेडम लगाने का तातपर्य, सोनिया गांधी को विदेशी कहने की तरह था लेकिन शब्द बदल जाते थे, वही राहुल गांधी को अक्सर शहजादा कहा जाता था, शहजादे से तातपर्य राजनीति में परिवार वाद से भी था परंतु इसे राजकुमार भी कहा जा सकता है, लेकिन शहजादा कहना, अगर इसका यँहा अध्धयन किया जाये तो यँहा मोदी जी कांगेस पार्टी को मुसलमान समुदाय के प्रति नरमी का रुख रखने का भी संकेत दे रहे थे अगर दूसरे शब्दों में कहा जाये तो कांग्रेस को हिंदू विरोधी करार दिया जा रहा था, विपक्ष के किसी व्यक्ति को निशाने पर रखने के संदर्भ में अक्सर मोदी जी व्यंग कहने की तरह, शब्दो को मजाकिया ढंग देते थे, यँहा समझने की जरूरत है की विपक्ष को हासिये का पात्र बना देने से, विपक्ष की गंभीरता ही खत्म हो जायेगी, ओर जनता अक्सर मतदान करने से पहले चुनावी प्रताक्षी या पार्टी की गंभीरता को ही ज्यादा तबज्जू देती है, अब यँहा समझा जा सकता है की विपक्ष को क्यो अक्सर गुजरात में हार मिलती थी.

बोलने के साथ, अक्सर मोदी जी जब अपनी योजनाओं की चर्चा करते तब तब हाथो का मूवमेंट बढ़ जाता था, सुरक्षा के मध्यनजर जब भी कोई शब्द आता मोदी जी अपने हाथ से अपना सीना जरूर थप थपाते, जरूरत के हिसाब से हाथ की उंगली को प्रजा की तरफ रख कर सारी सभा की तरफ घुमाया जाता, सबसे जरूरी जंहा जंहा मोदी जी को लगता की ये कहे गये शब्दो का ज्यादा।महत्व है और ये सुनने वाले के जेहन में हमेशा के लिये बस जाने चाहिये तब तब मोदी जी अपने कहे हुये शब्द या वाक्य पर जनता की मोहर जरूर लगवाते थे,

शब्दो के साथ, जब भी मोदी जी किसी भी मंच पर आते, हाथ जोड़कर धीमे धीमे चलते हुये, सारी जनता का इस्तेकबाल दोनों हाथ जोड़कर, चेहरे पर गंभीरता के भाव से करते, मसलन वह ये बताने में कामयाब रहे थे की वह एक राजा नही जनता के सेवक है, यही सब कारण थे की मोदी जी का राजनीतिक कद इतना बढ़ गया की बतोर मुख्यमंत्री जब तक वह गुजरात में रहे यँहा विपक्ष या वीपक्ष का कोई नेता अपनी मौजूदगी का एहसास जनता को नही करवा सका यँहा तक की भाजपा में कोई और नेता नही उभर पाया, सभा के मंच पर मोदी के सिवा बाकी नेता जरूर बैठै होते थे लेकिन वह सिर्फ जगह पूर्ति के लिये थे अक्सर सभा का रंग मोदी जी के भाषण से, असली माहौल में आता था, यही वजह है की आज जब भाजपा पटेल आंदोलन के साथ साथ दलित और मुस्लिम समुदाय की नाराजगी झेल रही है तब भी भाजपा मोदी जी के सहारे स्पष्ट बहुमत मिलने का संकेत, जनता में दे रही है, लेकिन ये बात सभी गुजरातियों को ओर देश की जनता को भली भाती पता है की यँहा भाजपा को जीतने भी वोट आयेगे वह सिर्फ और सिर्फ मोदी जी लार्जर then लाइफ की छवि के कारण ही होंगे, ओर कोई भी कारण नही हो सकता.

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