यह जौहर की नहीं, दहेज की ज्वाला है, कोई इन बेटियों को बचाने के लिए भी सड़कों पर उतरें

Posted by Vivek Upadhyay
November 13, 2017

Self-Published

*विवेक उपाध्याय*
आप गुस्सा हैं और होना भी चाहिए। आखिरकार अपने देश की शान की बात जो है। लेकिन ऐसी ही शान और ताकत तब भी दिखाने की जरूरत है, जब किसी नारी पर अत्याचार हो रहा हो। किसी बेटी को प्रताड़ित किया जा रहा हो। एक बेटी आग में जल रही हो, लेकिन वो आग जोहर की नहीं दहेज की आग है।

यह कहना मेरा नहीं इस देश की हर नारी, हर महिला और हर बेटी का है। उसका सवाल है कि एक फिल्म के विरोध में अपनी ताकत दिखाने वालों आप तब कहां थे जब देश में किसी अबला नारी पर अत्याचार हो रहा था तब दहेज की आग में देश की कई बेटियां जल रही थी। आज एक फिल्म के विरोध में पूरा देश खड़ा है, लेकिन यह देश तब एक साथ नहीं होता जब एक बेटी को दहेज के लिए जिंदा जला दिया जाता है।

रानी पद्मावती की वीर गाथा पर मुझे कोई संदेह नहीं है। होना भी नहीं चाहिए। पर एक फिल्म के विरोध में उतरे इन वीरों पर मुझे थोड़ा कम विश्वास है। आपके विरोध पर नहीं पर आपकी वीरता पर मुझे थोड़ा कम विश्वास हो पा रहा है। इसकी वजह बस इतनी सी है कि हमारे देश में यहां तक की राजस्थान में कई एेसी हिंसा हमें देखने को मिली है, जिससे मानवता तो शर्मसार हुई ही है। इस तरह से संदेह इसलिए हुआ क्योंकि मेरी नजर कुछ आंकड़ों पर पड़ी, जिसे आप भी देखिये, वर्ष 1995

में कुल 4648 बेटियों को दहेज के लिए जलाकर मार दिया गया। वर्ष 2005 में 6787, वर्ष 2009 में 8383, वर्ष2010 में 8391,

वर्ष 2011 में 8618 और इसी तरह से यह अांकड़ा बढ़ता चला जा रहा है। वहीं 2015 की रिपोर्ट के मुताबिक 1 लाख 12,107 मामले दर्ज हुए हैं। ये हमारी वो बेटियां हैं, जो जोहर की नहीं दहेज की ज्वाला में जली हैं। हम सब जिस तरह से अभी विरोध के लिए एक हुए हैं, ठीक उसी तरह से इन बेटियों को बचाने और न्याय दिलाने के लिए भी एक हों, हर युवा संकल्प लें कि दहेज के लिए न तो उसकी बहन को जलने देगा न ही उसकी पत्नी को।

आज हमारे पड़ोस में ही किसी की बेटी दहेज की अग्नी में जल रही है तो क्या हमने अपनी आवाज बुलंद की है। यह सोचना इसलिए जरूरी है क्योंकि वीर भूमी की वीरागनाओं के बारे में इतना सोच रहे हैं तो हमें हमारे देश की बेटियों के बारे में भी थोड़ा सा ख्याल कर लेना चाहिए।

हमारे ही समाज के कुछ लोगों को तो महिलाओं पर अत्याचार करने उत्पीड़न करने में सजा का डर तक नहीं रहता हैं। बलात्कार और यौन उत्पीड़न के मामलों में वृद्धि जिस तरह से हो रही है तो मुझे नहीं लगता कि हमें किसी मूवी का विरोध करना चाहिए। क्याेंकि इसका समाधान सिर्फ मूवी का विरोध करने से नहीं होगा। हमें जब तक हमारे देश की महिलाओं की तो चिंता नहीं है। तब तक हमे कोई हक नहीं है कि हम किसी का विरोध करें। विरोध करें तो देश की महिलाओं के हित के लिए। हमारी वीर भूमी का मान अगर रखना ही है तो हमारे राज्य की बेटियों और महिलाओं के लिए भी तोड़ी चिंता जताना शुरूकर दीजिए। जिससें हमें हमारे वीर भूमी का नाम हमेशा बना रहे। जिस नजर से न कोई पहले राजस्थान को देख पाया और न ही अब देख पाए। इस गरीमा को हमें खुद ही बनाना होगा। नहीं तो बस एक टुरीजीयम क्षेत्र बनकर नहीं रह जाए हमारे राज्य का गौरव और यहां की वीरांगनाएं। इसे अगर वीर भूमी का दर्जा और राजस्थानी मिट्‌टी की संस्कृति को बनाए रखना है तो महिलाओं की सुरक्षा का संकल्प लेना बहुत जरूरी है। हम जिस दिन महिलाओं को सम्मान करना सीख जाएंगे, तब न तो किसी महिला को जौहर करना होगा और न ही किसी महिला को दहेज की आग में जलना पड़ेगा।

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