रविवार

Posted by Aishwarya Gaurav
November 27, 2017

Self-Published

सारी तैयारी मैंने कर ली थी रविवार मस्ती से बिताने के लिए विरोधी टीम से मैच ले लिया था नई बाॅल खरीद ली थी, पर मैदान पर धान फसल की तैयारी हो रही थी पुछने पर भौलीदार ने कहा था रात में जगकर तैयारी करेंगे वो और सुबह मैदान पुरी तरह खाली हो जाएगा, ये सारी व्यवस्था हमने शनिवार शाम को ही देख ली थी अब बस कल का इंतजार था।         रविवार होने के कारण मेरी इच्छा थी देर सुबह तक सोने की और उपर से यह ठंड का मौसम ये छुट्टी  मेरे लिए किसी लौटरी से कम नहीं थी, पर विवशत: मुझे जल्दी उठना पडा़ मैंने नजरअंदाज कर सो जाने की बहुत कोशिश की पर ये ढफ-ढफ  कि आवाज से  मेरी निंद मुझसे छिन चुकी थी मैनें छत पर से ही देखा कि कुछ लोग धान को कटे हुए पौधे से अलग करने के लिए उसकी डंगाई कर रहे थे मन में उन्हें कोसते हुए मैं निचे चला गया और अपने दैनिक कर्म में लग गया  अखबारवाला भी अखबार दे चुका था तो मैं नाश्ता करते हुए अखबार पड़ने लगा कुछ समय बाद आवाज आई मुझे मेरे हमउम्र बाहर बुला रहे थे क्योंकि मैच खेलने के लिए विरोधी टीम आ पहुंची थी मैंने फिर छत पर से देखा वो लोग मैदान के बाहर खड़े होकर मैदान खाली होने का इंतजार कर रहे थे सही समझा आपने भौलीदार अपने वादे पर खरे नहीं उतरे थे और इन सब के बीच मेरा रविवार अभी तक फिका जा रहा था। अब मैं भी अपने हमउम्र के साथ मैदान के पास खड़ा था और हमलोग मन बहलाने के लिए आपस में हंसी मजाक करने लगे तभी एकाएक एक मंगेश ने पुछा ये धान आखिर है किसका पता चला सागर का, फिर तंज कसती हुई आवाज आई इसको आज ही करवाना था और ये छोटी सी बात झगड़े में बदल गयी और अब मेरी टीम के दो खिलाड़ी भी कम थे जिसके कारण विरोधी टीम लौट चुकी थी पर मैदान अब खाली हो चुका था।….. ….. … …. …… … ….. ….

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