राजस्थान में सरकारी डॉक्टर का सम्पूर्ण कार्य बहिष्कार और सरकार खामोश

Posted by Dr-Abdul Malik
November 9, 2017

Self-Published

राजनीति और उनके सलाहकार अफसर फिर से इस जुगत में हैं कि सरकारी डॉक्टरों द्वारा की जाने वाली हड़ताल वो रेस्मा कानून के तहत दबा देंगे या ये अफवाह उड़ाएंगे की सेवारत डॉक्टर संघ के अध्यक्ष डॉ अजय चौधरी राजनीति में आने के लिए डॉक्टरों का इस्तेमाल कर रहे हैं या किसी अखबार को खरीद कर पेशावार खबर छफ़ा देंगे कि डॉक्टर और संघ की कोर कमेटी के बीच समझौता हो गया है या कुछ डॉक्टर लोगों से व्यक्तिगत सम्पर्क कर इस मुहिम को तोड़ने की कोशिश।

बात पर आते हैं कि आखिर ये डॉक्टर चाहते क्या हैं, इतनी मेहनत के बाद आप मेडिकल प्रोफेशन में आते हो और रोज आपको छूट भैया नेता धमकियां और लड़ाई पर उतारू लोगों से आजादी और पूर्ण सुरक्षा की आवाज।फिर हर विभाग का अपना नियत टाइम होता है तो डॉक्टर का भी हक़ है कि उसका टाइम नियत हो और वो एक पारी में सभी मरीजों का अच्छे से ट्रीट कर सकें और बार बार हॉस्पिटल ना आना पड़े।आप डॉक्टर हो तो आप पर आंखे दिखाने वाला अफसर भी आपका हो मतलब मेडिकल कैडर जो कि दशकों पहले कागजों में है मगर वुजूद में आये।

जब इतना काम काज तो आवास और वितीय विषंगतियाँ दूर करने की जायज मांग।

घूम रहे झोलाछाफ और झाड़ फूंक वालों पर कड़ी करवाई और जो मेडिकल intern डॉक्टर की stipand नरेगा मजदूर से कम है को बढ़ा कम से कम 10 हज़ार करने की मांग।

ये मांगे राजस्थान के डॉक्टर द्वारा 2011 की हड़ताल में भी उठाई थी, मगर तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने डॉक्टरस में आपसी भ्रम में उलझाकर मौके का जो गलत फायदा उठा हड़ताल तुड़वाई मगर अब दूध के जले डॉक्टर्स छाछ भी फूंक फूंक कर पी रहे हैं।

जहां पहले सिर्फ सेवारत चिकित्सक ही हड़ताल पे थे पर अब साथ में रेसिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन भी आ गया है और मेडिकल कॉलेजों की डिवीज़न स्तरीय मेडिकल व्यवस्था भी चरमर्रा रही है।

सरकार अभी भी सिर्फ अपने सिफहसलकारों की बातों में है और आम अवाम चन्द आयुष डॉक्टर्स के हवाले है।

सरकार से डॉक्टर्स 9 मर्तबा वार्ता टेबल पर आए मगर जब सरकार की मंशा ही सुलझाने की नहीं हो तो फिर बात कैसे बने।

अखबारों के बयानों में सरकार की तरफ से सभी डॉक्टरों को सेवा से मुक्त करने की धमकी दी जा रही है मगर ये कैसे सरकार है जिसे ये भी नहीं पता कि आखिर इतने नए डॉक्टर कैसे वुजूद में आकर चरमर्रा रही व्यवस्था को दुरुस्त कर दें।

कोर कमेटी को आज वार्ता पर बुलाये और सरकारी डॉक्टरों की 33 मांगों पर कदम उठाए या कुछ दिन राजस्थान का माहौल खराब होने के बाद उठाये, डॉक्टरों के इस बार की एक जुटता और सोची समझी कई दिनों से चल हड़ताल के बाद यही लग रहा है कि झुकना तो सरकार को ही है, बस वो कब झुकती है और कितना नुकसान चाहती है।

अब्दुल मलिक जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अजमेर

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