राष्ट्रवाद का रंग तो भगवा है!

Posted by manish che
November 4, 2017

Self-Published

रविन्द्र नाथ टैगोर का कहना था, “भारतीय राष्ट्रवाद का कभी कोई वास्तविक अर्थ नहीं रहा.” आजादी के संघर्ष के दौरान भी भारतीय राष्ट्रवाद की परिभाषा ने कोई ख़ास मूर्त रुप धारण नहीं किया था.

आजादी के इतने सालों बाद भी राष्ट्रवाद पर जाति, भाषा, आदि के रंग हावी हैं.

मोदी के प्रधानमंत्री बनने से गांधी का ‘कायर हिन्दू’ बहुत खुश है. अब उसे हिंदू राष्ट्र का अपना सपना पूरा होते दिख रहा है, हालांकि ‘हिंदू’ को धर्म की संकीर्णता से निकालकर राष्ट्रवाद की थोड़ी खुली हवा कैसे खिलाई जाये उसे समझ नहीं आ रहा. इसलिए उसने एक आसान रास्ता चुना कि राष्ट्रवाद को ही भगवा रंग में रंग दिया जाये.  

भगवा राष्ट्रवाद को लेकर सोशल मीडिया के ‘की-बोर्ड’ सिपाही हमलावर हैं. ‘की-बोर्ड’ सिपाहियों के राष्ट्रवाद को खुराक मिलती है, ctrl + c और    ctrl + v से. किसी के भी शेयर की गयी सूचना, जो इन के राष्ट्रवाद के भूख को शांत करती हो, को कॉपी करना और पेस्ट करना.

कॉपी-पेस्ट की गयी सूचना वे गोलियां हैं जिससे दुश्मनों को छलनी कर दिया जाता है. आपकी राष्ट्र भक्ति की कसौटी को परखने की यात्रा आप के माँ बहनों तक भी जा सकती है.

अच्छे दिनों में मान लो कि राष्ट्रवाद का रंग भगवा है नहीं तो, ‘तुम हमारे साथ हो या हमारे ख़िलाफ़.’

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