रेलिंग

Posted by Lokesh Bhiwani
November 20, 2017

Self-Published

जिसको कब से ढूंढ रहा हूँ फेसबुक पर…….🌏
मिली नही आज तक……पता भी नही …..मिलेगी या नही……
बहुत मीठी मीठी यादें है …वो
कितना भी मूड खराब हो………याद करके चेहरे पर मुस्कान ओर मन बहुत ही प्यारी शांति से भर जाता है……😊
अब एक दो ही तो कारण बचे है …….मुस्कुराने के…….
ऐसा भी नही है कि कुछ है नही जिंदगी में …….लेकिन शायद देश के हालात मुझे जरूरत से ज्यादा बैचन करते है…..
ख़ैर…..इसमें पोलिटक्स नही 😄
गाँव से निकलकर दिल्ली आ गए थे हम लोग…………
दिल्ली के देहाती एरिया नजफगढ़ में….. 5th क्लास में दाखिला हो गया था …….पास के ही सरकारी स्कुल में ……पीपल वाला स्कूल बोलते थे ……
नाना जी (माँ के मामा जो यहाँ के स्थायी निवासी है)
ने पास में ही एक घर किराए पर दिला दिया था…….
जिसमे 3 कमरे थे……2 में हम 6 लोग रहते थे……
एक हमेशा खाली रहता था….।।।।।।
गांव के सरकारी स्कूल से निकल कर आया था तो
बहुत ज्यादा शर्मिला भी था…….. स्कूल से आकर अकेला ही बैठा रहता था……कभी दोस्त नही बने तब……….
क्योंकि क्रिकेट आदि में कभी रुचि नही रही….
एक दिन पापा ने बताया कि अपनी ही गली से एक परिवार है जो अपने साथ आकर रहेगा जब तक उनका घर नही बन जाता……….
2,3 दिन बाद ही वो लोग आ गए …… अंकल, आंटी , आरुषि (name change)
ओर #वो😍 ……(छोटा परिवार, सुखी परिवार😀😅
(ये लिखने के बाद रुक गया हूँ15,20 मिनट के लिये, पता नही क्यों आज भी सब याद है,
इतना अच्छे से सिलेबस याद होता तो …..पीएचडी हो चुकी होती……😄।
2,3 दिन में ही सब लोग आपस मे खूब घुल मिल गए थे…
मुझे छोड़कर….😁…….बताया तो
बहुत शर्मिला था… किसी से बोलता ही नही था…….आज भी हूँ लेकिन उतना नही😆
To be continued……….
Part:-02…….●
5th में था ……..छोटा सा 😀…….सब बोलते है कि
लड़कीयो जैसा लगता था…………………………….
शाम को सब लोग छत पर अपनी अपनी चटाई लगाकर
बैठकर गप्पे मारते थे……………
उस दौरान मैं छत के एक किनारे पर लगी रेलिंग के सहारे घण्टो खड़ा रहता था………सामने एक बड़ा सा नया घर बना था….व्हाइट पेंट हुआ था🏤……..अच्छा लगता था…..देखता रहता था…………..ओर आने जाने वाले लोगो को देखता रहता था…..आम वाला आता था ….जोर से आवाज लगाता था…..आम लो……….
जो मुझे ओमलो सुनता था…….जो मेरे गाँव मे जलघर में काम करने वाला दादा का नाम है …की याद दिलाता था..!
एक दिन मेरी छोटी बहन ने बताया कि #बड़ी_आरुषि
आपके बारे में पूछ रही थी कि
ये तेरी बड़ी बहन बोलती क्यों नही है 😄😄😆😂
तो मैंने बताया कि वो मेरा बड़ा भाई है😂
बहुत दिनों बाद खुलकर हँसा था…………..
क्योंकि नया नया था दिल्ली में तो बहुत घुटन हो रही थी….
खेत, जोहड़,भैंस, मेरा स्कूल …..सब बहुत याद आता था।।
एक शाम……. जब रेलिंग के सहारे खड़ा….अपने ही ख्यालों में खोया था………. तो पीछे से किसी ने पुकारा………….याद नही की क्या कहकर पुकारा था………..
मुड़कर देखा तो वो थी…………
वो भी 5th में थी……….
तो बात भी यहीं से स्टार्ट हुई ……
उसे साइंस की किताब चाहिए थी………
मैं भागा नीचे किताब लाने 😃 आखिर ….एक दोस्त जो मिल रहा था……..
किताब उसके काम की नही निकली……मैडम अंग्रेजी मिडियम से थी😀 (कृष्णा मॉडल स्कूल) उस समय का नजफगढ़ का सबसे प्रतिष्ठित स्कूल………
ओर यही से हमारी दोस्ती का शुभारंभ हुआ था…….
To be continued…………
Part:-03…..●
उसके आने के बाद सब अच्छा-अच्छा लगने लगा था……….
अब रेलिंग छूट सी गयी थी……….
आम वाले कि जगह अब शाम को उसकी प्यारी आवाज कानो में पड़ती थी…………..आजाओ #घर_घर खेलते है 😉😀 ……….. उन दिनों ये खेल मेरा फेवरेट बन गया था……… सब कितना निस्वार्थ था………
तब पता नही क्या सोचता था (याद नही)
लेकिन आज जब बचपन याद आता है तो ………..
लगता है ……….जिंदगी तो वही थी…….अब तो बस जी रहे है……………………. ………
रेलिंग के सहारे वो 2 घण्टे ….पहाड़ से लगते थे……….
ओर अब 4 घण्टे भी कम पड़ने लगे थे………..
कई बार तो घरवाले हम सब के (मैं ,मेरी छोटी बहनें , वो ,उसकी छोटी बहन आरुषि)
सबकी खूब पिटाई एक साथ कर देते थे……दिनभर सिर्फ खेलने के कारण………..
तो सारे के सारे एक जगह बैठकर साथ रोते थे😂 (तब सुभ-असुभ का नही पता था)
जिससे पड़ोस वाली आंटी आकर हमें चुप कराती थी और फिर उनकी छत पर जाकर मस्ती करते थे😇😇
ओर इसी तरह खेलते खेलते 6,7 महीने गुज़र गए ……..
उनका नया घर बनकर तैयार था……..
कल वो जा रहे थे………….
To be continued……….
Part:-04…………●
आज वो लोग अपने नए घर मे शिफ्ट कर रहे थे……..
लेकिन जरा भी दुःख नही था 😀😂
भाग भाग के सामान रखवा रहा था मैं तो 😂😂😂😂
क्योंकि 3 घर ही थे हमारे बीच 😃
ओर फिर जो आज सोच पाते है …..वो सब था भी नही मन मे……….
बहुत हल्का था सब ………
उनके नए घर में जाने के बाद थोड़ा मिलना-जुलना कम हो गया था………
फिर भी शाम को हम सब साथ ही खेलते थे……………
6th में आ गए थे हम………
गली में भी दोस्त बढ़ गए थे ………….वैसे जो बढ़े थे वो
दोनों लड़कियाँ ही थी 😀😀😀😉😉
वो विशाखा(name change) तो मोटी थी …..
एक ओर थी पतली सी….नाम याद नही आ रहा 🤔
अब घर-घर की जगह #छुपम-छुपाई खेलने लगे थे….
ओर हमारी दोस्ती इतनी गहरी थी…की …..एक ही जगह छुपते थे दोनों……😍
वैसे उसके बाद उसकी हरकते बच्चो वाली नही थी….
वो लिखूँगा तो मानोगे नही…………लेकिन मैं बिल्कुल गंवार टाइप था……… कुछ भी नही पता था तब……
उसे भी शायद tv ने ही बिगाड़ा होगा😀
उसके घर रंगीन tv था केबल के साथ……….
ओर मेरे में ब्लैक एंड व्हाइट दूरदर्शन के साथ 😀
जिसपर फ़िल्म भी देखनी हो तो रात को एक घण्टे आती थी #बाइस्कोप 😀😄😄 या सन्डे को।।।।।
अब हुआ यूं कि एक दिन माँ बाजार से गोलगप्पे लाई थी……ओर मैंने खाने के किए प्लेट में रखे ही थे कि ……
हमारे रूम का गेट हल्का खुला था…..वहीं से छत के लिए सीढियां भी थी…………
से वो मुझे इशारों से बुला रही थी…………
(माँ की नजर पड़ चुकी थी उसके इशारों पर जो मुझे नही पता था)
रात के 8 बजे थे शायद
अब वहीं पर पापा भी बैठे थे ……..तो कैसे जाऊँ…….
(ओर हाँ पिछले 1,2 महीनों से वो मुझे दिन में 2,3 बार तो इलोवेउ कह ही देती थी,
जो मुझे न तो उसका मतलब पता था , न ही कोई फीलिंग आती थी 😂)
फिर भी तुम्हारे भाई ने हिम्मत कर के गोलगप्पे की प्लेट सरका ही दी , ओर माँ को कहा कि मेरे पेट मे दर्द हो रहा है
छत पर जा रहा हूँ थोड़ी देर ……..
लेकिन माँ तो माँ होती है………………..
पहले मुझे थोड़ी देर घूरती रही……….फिर बोली
वा छोरी बला कै गयी स नै………..
मैं बुरी तरह से शर्मिंदा था , की मेरा झूठ पकड़ा गया।
मैं रोने लग गया 😂
बच्चा ही तो था 6th में 😂
फिर पापा बोले ……….जा बेटा जी ले अपनी जिंदगी😂😂😂 मतलब …जा खेल ले
ओर जल्दी आ आना……….
………..
अब हम दो प्रेमी छत के ऊपर 😄😆😆😆😆😍😍😍😍😍😍😍😍
To be continued……..
Part:-05……●
अब छत वाला किस्सा सबसे यादगार है 😆
उसने अपनी एक दोस्त …..जो साइड वाली छत से हमें देख रही थी……जो मुझे नही पता था……….बाद में बताया गया मुझे तो……
उसको दिखाने के लिए मेरा आधे घण्टे षोशण किया 😉
जिसमे मुझे धेले का भी मजा नही आया ……..मतलब किस किया……………….बच्चे उससे ज्यादा करें भी क्या.😃😄
लेकिन सच मे
मुझसे तो 100 गुणा ज्यादा एडवांस थी वो…………..
हर मामले में………….पता नही अंग्रेजी स्कूलों में यही सिखाते थे क्या 😆😂
अब 2 तरह से याद करता हु उसे
1 तो की लड़की कितनी एडवांस थी
2nd अब साथ क्यों नही है😄😉😉😉
अब एग्जाम चल रहे थे 6th के फाइनल…….
तब का एक दोस्त आज भी साथ है @sahil
.
Last एग्जाम था नज़फगढ़ का नम्बर 2 स्कूल…….
एग्जाम के बाद दोस्तो के इंतजार में बाहर चबूतरे ओर बैठा था…..
देखा कि एक लड़का मार्च में भी कंबल ओढ़े बैठा….
मैं देखने पास गया तो कुछ समझ नही आया…..पूछा भी नही………
ओर घर आ गया………..
घर आकर पता चला कि
उसके एग्जाम खत्म हो गए और वो अपने मामा के गयी कुछ दिनों के लिए………………
मैंने उस बारे में ज्यादा नही सोचा……
शाम होते होते पीठ पर एक दो फुंसी सी निकल आई …..
हल्की हल्की बुखार भी महसूस होने लग गयी थी…………
माँ को बताया तो पूछा कि क्या हुआ था स्कूल में…….
तो मेरे भी वो कम्बल वाला लड़का याद आया ……
तो पता चला कि ये सामान्य बुखार नही माता (चिकनपॉक्स)
हुआ था……
मुझे गाँव लाया गया……मामा के गाँव………
उन 2 महीनो में मैं दुनिया से कट गया था……..
सब कुछ अलग……………
पता नही उसकी याद आई या नही या उसे मेरी आई या नही…….
तबियत सुधर नही रही थी……
तो सबने निर्णय लिया कि
मुझे यहीं रखा जाए………..अब मैं बाढड़ा के सरकारी स्कूल में था 7th में…………..
तबियत ठीक हुई तो दिल्ली वालो कि भी याद आने लगी……लेकिन कोई संचार का साधन भी नही था……….
फ़ोन के बारे में कुछ पता नही था…….
पूरे 4 महीने के बाद दिल्ली जाना हुआ …….
उसके घर गया ……
उन दोनों बहनों का अलग कमरा था छत पर……
गया तो सिर्फ छोटी वाली थी……
बताया कि ट्यूशन गयी है…..
ओर नाराज है कि बता कर नही गया…………
मुझे नही पता था कि क्या बोलना है……
वापिश आ गया………
10 दिन रुकने का प्लान था……
लेकिन शायद टेस्ट थे या पता नही क्या था…..याद नही
3 दिन में ही वापिस आना पड़ा….
मुलाकात नही हो पाई………………………
अब मैं भी अपनी पढ़ाई में व्यस्त हो गया……
बीच बीच में याद आ जाती थी…..
मौसीयो को उसके बारे में बता रखा था…..
तो वो भी बीच बीच मे जिक्र करके याद दिला देती थी…….
अब कोई सम्पर्क नही था…………..
6 महीने बाद फिर दिल्ली जाना हुआ ………
लेकिन इस बार हम घर बदल चुके थे……………
बहुत दूर था उसके घर से …..कोई बहाना नही था उसके घर जाने का……………………..😢
यादों से ही काम चलाया…… बेस्ट फ्रेंड थी कभी😢

PART:-06●
8th में दोबारा दिल्ली आ गया था……
फिर 2 साल बाद एक दिन उसके घर किसी कार्यक्रम में गए सब लोग…….मैं भी….
उसके कमरे में गया तो बैठी थी……
10,15 मिनट देखता रहा उसे……
मुझे नही पता था बात क्या करनी है……….
आधे घण्टे अकेले साथ रहे ….कोई बात नही हुई
मुझे गुस्सा आ रहा था कि ये बात क्यों नही कर रही……
फिर वो चली गयी वहां से …..शायद बुलाया था किसी ने..
मैं घर आ गया………..
एक दो महीने याद आई …….
फिर भूल गया…………………………
10th me था…….
सब भूल चुका था शायद…
एक दिन पता चला कि
कल मेरी बहन के bdy पर वो दोनों बहने भी आ रही है……
ये क्या हुआ….
अचानक से …….अप्रत्याशित……..
10 मिनट में पिछले 4,5 साल चलने लगे मन के थियेटर में….
सन्डे की सुबह थी……….
छत पर गया कॉपी पेन लेकर…..
दरवाजे को कुंडी लगाई…..ओर लिखने बैठ गया…… Sorry……
पता नही यही क्यों लिख रहा हूँ
ओर शायद ये मुझे 3 ,4 साल पहले लिखना चाहिए था…………..
10 -12 पेज लिख कर फाड़ चुका था……..
समझ नही आ रहा था क्या लिखूं……
लास्ट में एक फाइनल हुआ …..जिसपर सिर्फ सॉरी लिखा था….ओर एक स्माइली बनी थी………..
घड़ी मानो रुक सी गयी थी ……..दिन पहाड़ सा लग रहा था………….
आखिर शाम हुई……..
वो लोग आए………………
कितनी बदल गयी थी 4 साल में …….
कटरीना लग रही थी……😍😍😍
मैं इंतजार करता रहा ….उसके अकेले होने का
लेकिन शायद किस्मत कुछ और ही थी……….
ना वो अकेली हुई ………😢
सॉरी लिखा वो पेज ……………….
……..जेब मे कब तक पड़ा रहा…..ओर कब धूल गया ….याद नही………….
😢😢😢😢😢😢😢
Part:-07….●
वो तो चली गयी…..
लेकिन मेरे दिल मे जो ज्वार था…… वो ठंडा नही हो पाया ……….अब 15 साल के हो गए थे हम लोग ……
समझने लगे थे चीजो को……….
तो मिलने की तड़प भी ज्यादा थी दिल मे………………..
उसके बाद दादी की तबियत खराब होने के कारण सबको दिल्ली छोड़नी पड़ गयी……….
गाँव आ गए सब लोग………………….
11th में बहुत से नए दोस्त मिले
या यूं कहें कि @deepesh @jitender @jugesh @manish @naveen जैसे हीरे जैसे भाई मिले…….
इन 2 सालो में एक बार भी वो याद नही आई……….
हाँ बीच मे जब भी दिल्ली आया
उसकी गली में जरूर गया……..इसी आस में की
क्या पता किस मोड़ पर मिल जाए……….ओर वो कागज का टुकड़ा जो धूल गया था ….लेकिन दिल मे एक जगह बनाए हुए था….. को उसे दुं……. ओर बता दूं कि
कितना याद किया है मैंने उसे…….😢😢😢
पिछले सालों में कितनी ही बार fb पर उसके नाम वाली कितनी ही लड़कियों को msg कर चुका…….
लेकिन उसके बाद भी कितने ही साल बीत गए ……
ना वो मिली ……ना वो दिल से ……😢😢😢😢😢
एक बार मिलना चाहता हु , बता देना चाहता हु सब….
बहुत एडवांस थी तुम……..
शायद बॉयफ्रेंड भी होगा……लेकिन मुझे
गर्लफ्रैंड नही चाहिए………
वो 5th क्लास वाली बेस्ट फ्रेंड चाहिए…..😢😢😢
अगर तुम कभी भी इसे पढो तो
Plz एक बार जरूर मिलना…………
सुबह के 5 बज रहें है………………………
आज दिल्ली हुँ, उसी नजफगढ़ में , उसी गली के उसी घर मे….
रात भर से उसी रेलिंग के सहारे खड़ा हूँ………लगातार लिखे जा रहा हूँ…………पिछले 5 घण्टे से कितनी ही बार आंसुओ से भीग चुका …..गिनती नही……………….
3 घर छोड़कर उसका घर है……..बार बार उसके घर की छत पर नजर जा रही है………..
ऐसा लग रहा है …..अभी आएगी ………..ओर
एक जोर से थप्पड़ मारकर कहेगी……..बताकर नही जा सकते थे 😢😢😢😢😢😢
आज उसके घर जाने की हिम्मत नही हो रही ……..
पता नही
उसको मैं याद भी हूँगा या नही…………..
क्या पता वो गेट ही न खोले
अनजान समझकर……………नज़फगढ़ अब दिल्ली में जो आने लगा है………
आज वो मोटी पड़ोसन लड़की भि नही है …….
….
उजाला हो रहा है…………सामने वाले घर की सफेदी अब वो नही रही………………..
………………..कितने ही कलेंडर बदल चुके है….
नही बदली तो सिर्फ ……..ये रेलिंग…….जो आज भी उसी मजबूती से खड़ी है ….मुझे पहले की तरह सहारा दिए ……………😢😢😢😢😢😢
#Lokesh

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