Youth Ki Awaaz is undergoing scheduled maintenance. Some features may not work as desired.

रेहान वर्सेस इबादत

Posted by Rakshit Parmar
November 26, 2017

NOTE: This post has been self-published by the author. Anyone can write on Youth Ki Awaaz.

रेहान नाम का एक लड़का मिलों दूर झीलों के शहर में पढ़ाई करने आता हैं ! वो यहा युनिवर्सिटी की कॉलिज में पढता है मगर वो  हॉस्टल में नहीं रह कर किराये के रूम पर अपने क्लासमेट्स के साथ रहता है ! हर रोज क्लास आता -जाता है मगर कुछ दिनों से वह बहुत खोया -खोया सा रहता हैं ! रेहान किराए के मकान की दूसरी मंजिल पर रहता है लेकिन आज जब वह सीढियों से होते हूए बाहर निकल रहा था … उसकी नज़र एक खुबसूरत सी लड़की पर पड़ती हैं ! रेहान कुछ पल के लिए एकटक देखता रहा फिर उस खुबसूरत बाला से नज़रे मिलाकर हंस देता है मगर कलास की देरी होने के कारण वह निकल जाता है ! आज वह क्लास में बहुत बेचैन सा टेबल पर सिर रख कर बैठा हैं  ! वैसे रेहान की दोस्ती के दीवाने उसके सहपाठी भी हैं मगर आज रेहान गुमसूम है !  रेहान क्लास से फ्री होते ही अपने रूम पर आ जाता हैं ,आज पानी पीने के बहाने वह मकान मालकिन जिसे वह आंटी कह  कर बुलाता है … पानी पिलाने को कहता है ! आंटी के पास खड़ी  एक  खुबसूरत -सी बाला एकटक सी उसे देखें जा रही हैं …पानी का पूरा गिलास एक ही बार में रेयान ने खत्म कर दिया ..,आंटी से कहां :- आंटी प्लिज़ एक गिलास ओर पिला दो…ना ..तभी उसने उस लड़की से हलो कहा तो उसने भी हलो कह कर रिप्लाई किया ! आप यहीं रहती हैं क्या ! ना….ना.,नाम क्या है आपका …,!  हंसते हुए कहा उस लड़की ने जी मैं इबादत ..,,ओर आप …? तब उस रेयान ने भी उसी अंदाज में कहा ….मैं रेहान यहां युनिवर्सिटी में पढ़ाई करता हूं ! आप क्या करती हैं ? रेहान ने थोड़ी जल्दबाज करते हुए कहा ! तब अचानक इबादत नाम की जो लड़की है उसके चेहरे का रंग थोड़ा फिका पड़ जाता है ! तब तक आंटी दुसरा गिलास पानी लिए आ जाती है ओर रेहान के हाथ में थमा देती हैं ! रेहान उस लड़की को पानी पीते हुए अब भी देख रहा है …. आंटी को थेक्यूं बोल कर रेहान फिर अपने रूम में आकर बेड पर बैठ कर  कुछ देर सोचता  रहा ! दस मिनट हुए होंगे अभी रेहान को रूम में लौटे हुए मगर उसकी आंखें आज बहुत भारी हो गयी हैं ….कुछ देर लिए शायद उसकी आंख लग गयी थी ..,..,कुछ देर बाद अचानक कोई दरवाजा खटखटाता हैं ..रेहान अब भी बेसुध-सा लेटा रहा ….फिर आंखे छटपताते हुए बड़बड़ाता हुआ .बोला ..अबे कौन है बे …? सोने दे यार ….इबादत जो आज पहली दफा उससे बात करने आयी थी ….दबे पांव फिर से नीचे चली आती है !

रेहान आज शाम को दिनभर की नींद लेकर तरोताजा बाहर जाने को तैयार होने लगा हैं ! रेहान की एक आदत हैं वह अक्सर रूम पर अपने दोस्तों को शेरों -शायरी  सुना दिया करता है !वो भी मिर्जा गालिब एवं मीर के अंदाज में ….अकेले में जोर -शोर से अपने मनपसंद गाने गुनगुनाता है   …..उसने अपने रूम पर पुरानी शेरों शायरियों की किताबों का ढेर लगा रखा हैं ! कुछ दिनों बाद रेयान की तबियत खराब होने लगती है ..फिर रेयान बहुत से दिनों से अपने रूम से निकला ही नहीं हैं ! एक दिन इबादत आंटी से कहती है आंटी वो लड़का कहां है जिसको आपने उस दिन पानी पिलाया था ! इस बड़े से मकान में अमुमन 8-9 परिवार ओर भी रहते हैं ..,छोटे -छोटे कमरों में लगभग 50 -55 जिंदगीयां बसती हैं …अधिकतर लोग काम -धन्धे पर जाते है मगर यहां दो -चार स्टुडेंटस भी रहते हैं इनमें से तीन काफी दिनों से घर पर छूट्टियां बिताने में व्यस्त है लेकिन रेयान तो यहीं हैं ! आंटी को इबादत के कहते ही होश आया कि चलो हम उसके रूम पर देख कर आते हैं ! आंटी ने उसके रूम के डोर को खटखटाया लेकिन कोई जवाब नहीं आया …..इबादत ने बेचैन होते हुए आंटी से कहा आखिर बात क्या है  ये डोर खोल क्यूं नहीं रहा. …आंटी ने खिड़की के पास जाकर जोर से आवाज दी …..रेहान ….बेटे ….रेहान दरवाजा खोलो ….अंदर से दर्द से कराहती लड़खड़ाती हल्की दबी -सी आवाज़ आयी …आह ..आ…हां आंटी एक मिनट खोलता हूं  !

रेहान ने अपने रूम को मानो किसी पुराने जमाने के शायर का घर बना दिया हो ! रेहान ने दरवाजा खोला तो बरसों से बंद पड़े कबाडिखाने जैसी बदबू आई ! आंटी और इबादत की नज़रे रेयान पर पड़ी तो उनके होश उड़ गए ! रेयान का हमेशा मुस्कुराता चेहरा आज उदासी की गरम चादर से मानो ढका हुआ था ….एकबारगी तो इबादत को लगा कोई नई कोंपल आज जैसे कड़ी धूप से मुरझा गई हो …,आंटी ने रेहान से पूंछा तुमने क्या हाल बना रखा है अपना ! रेहान बस चुप रहा ….एकटक उसकी नज़रे सिर्फ इबादत को निहारती रहीं ! आंटी ने जब हाथ पकड़ा तो उन्हें लगा जैसे कोई लोहे की गरम सलाख पकड़ ली हो ! आंटी को तुरंत समझ में आ गया  कि रेहान की हालात बेहद खराब है  ! इबादत से मदद मांगते हुए बेजान खड़े रेहान को आंटी बहुत मुश्कुल से दुसरी मंजिल से नीचे ले आई ! आंटी ने इबादत को हुक्मराना अंदाज में ऑटो वाले को लाने को कहा ! इबादत तेजी से भागती हुई घर  से बाहर आई  ..वहां से ठीक आधा मिल दूर वह ऑटो के लिए निकल पड़ी ….इबादत आज जी -जान से उस रेहान की मदद करना चाहती हैं .जिससे सिर्फ एक बार मुलाकात हुई हैं .,इबादत हालांकि कभी -कभार अपने घर से बाहर निकलती हैं ..,इबादत ऑटो वाले को बुला कर घर के दरवाजे से आंटी को आवाज लगाती हैं ! मगर आंटी की आवाज़ नहीं आई नहीं तो इबादत खुद अंदर की तरफ बढ़ गई !कुछ पल के लिए इबादत के होश उड़ गए रेहान को जमीन पर छटपटाते देख ! आंटी तेजी से चिल्ला -चिल्ला कर आस -पास वालों को आवाज लगा रही हैं ! रेहान के मुंह से झाग निकल रहे हैं ! इबादत ने होश में आते हुए रेहान को तुरंत संभाला और पानी का गिलास रेहान के मुंह की तरफ बढ़ा दिया ! थोडी देर बाद उसने ऑटो वाले भैया की मदद से रेयान को ऑटो में अपनी बगल में बिठाया हैं ! हॉस्पीटल के लिए रेयान के साथ मकान मालकिन भी आई हैं लेकिन अभी भी डर कर सहमी हुई बैठी हैं ! रेहान की आंखें बस खुलने का नाम नहीं ले रही हैं ! ऑटो अचानक जी.बी.एच. अमेरिकन हॉस्पीटल के सामने रूक जाता है …ऑटो वाले भैया ने कहा’:-  बहिन जी हम हॉस्पीटल पहुंच चुके है आप इन भैया को तुरंत अंदर ले जाओ….हॉस्पीटल में रेहान को संभालते हुए दो दिन गुजर चुके हैं ! यहां सिर्फ इबादत ही ठहरी हैं आंटी तो थोड़े समय पश्चात अपने घर चली गई थी !

हॉस्पीटल से फ्री होकर रैयान कुछ दिनों के लिए अपने घर चला आता है मगर इस बीच वह सिर्फ इबादत द्वारा की गई मदद के बारे में सोचता रहा ! रेयान के पिताजी एक किसान है उनका गांव भारत -पाकिस्तान की सीमा पर बसा है ,यहां से कुछ मिल दूर थार के रेगिस्तान के आर -पार पाकिस्तान की मंझिलें देखी जा सकती हैं  ! उसके पिता का सपना है रैयान को भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल बनाए मगर रैयान उसके पापा के इरादों के ठीक विपरीत आगे बढ़ रहा हैं ! अभी कुछ दिनों के लिए वह अपने घर पर ही अपने पापा के पास रूका हुआ है ! वह पिछले 9 वर्षों से याद शहर में पढाई करता हैं ।तो कभी -कभार ही गांव आया करता हैं ! वह पिछले कुछ दिनों से देख रहा है कि उसके घर पर ढलती शाम को बी..एस.एफ.के जवानों की आवाजाही रहती है ! सब फौजी उसके पापा को बड़े प्यार से अब्दुल चाचा कहकर पुकारते हैं ! रात को एक बड़े अफसर भी आए और पापा से अकेले में खुब सारी बाते कर गए ! रेयान से रहा नहीं गया तो उसने आखिर हिम्मत करके अपने अब्बू से पूछ ही लिया कि – “अब्बू आजकल हमारे घर पर इतने जवान क्यों आते हैं , वह बड़े साहब आपसे अकेले में क्या बात कर रहे हैं थे ? तभी उसके अब्बू ने उसको दवाब दिया तो उसका माथा चक्कर खा गया ! अब्बू का जवाब था ! ” बेटे मैं अपने देश के लिए एक जासूस बन गया हूं ! वो बड़े वाले साहब तो हमारे सरकार के आदमी है और वह मुझे ट्रेनिंग देकर पाकिस्तान भेजने की तैयारी के बारे में बात करने आए थे !

रैयान वैसे शायराना अंदाज वाला मासूम लड़का है ! अचानक उसे अपनी मां का ख्याल आया जो कि बचपन के दिनों में पाक की तरफ से गोलीबारी में मारी गयी थी ! उसने अपने अब्बू से कांपते हुए कहा ” अब्बू क्या आप भी मुझे मां की तरह छोड़ दोगे ! ” अब्बू ने साहस दिखाते हुए कहा ” बेटे हम दोनों मिलकर तुम्हारी  मां का दुश्मनों से बदला लेगें ! और तुम मुझसे वादा करो कि तुम हमारा सपना पूरा करने में मेरी मदद करोगे ! बेटे रैयान की आंखें आंसुओं से भर आई थी ! वह अपने अब्बू से लिपट कर रोते हुए कहता है ! हां अब्बू हम यह काम जरूर करेगें मैं आपसे वादा करता हूं ! रैयान कुछ दिन घर पर अपने अब्बू के साथ रहकर आज शहर फिर जाने को तैयार हो गया है ..उसके अब्बू झोपड़ी के पिछवाड़े में थोड़ा दूर पेड़ के सुखे ठूठ से बंधी दो बकरियों को पानी पिला रहे है । अब्बू का चेहरा आज थोड़ा-सा मायूस है …रैयान की जब नज़र पड़ी तो अब्बू  झट से आंसू पोछकर पीछे की तरफ मुड़ गए । रैयान जानता है अब्बू को अब अकेलेपन के साथ रेगिस्तानी गर्म हवां के थपड़ों से लड़ना है । रैयान झोपड़ी में लगाई झाडियों से अपने अब्बू का दर्द भांप लेता है …उसने आज बड़ी हिम्मत दिखाते हुए अपने आंसू पी लिए थे ..अब्बू को आवाज़ लगाते हुए रैयान कहता …आज मुझे शहर जाना है अब्बू …आप जल्दी करो मेरी बस निकल जाएगी …हां बेटा बस आया थोड़ा इन बकरियों को भी तो कुछ खिला पिला दु …दिन भर अब बंधी रहती है जो …

अब्बू आ चुके है रैयान ने अपना  बेग उठा लिया है …लो चलो बेटा बस-स्टेंड तक छोड़ आता हूं …अब्बू आगे-आगे रैयान पीछे -पीछे चल पड़े है दोनों ..रैयान की नज़रें इस विरान रेगिस्तान में अपनी दिवंगत मां की तस्वीर खोजने लगती है …अब्बू की आंखें भी बेटे की जुदाई से छलछला गई है …सड़क पर दोनों के कदमों की आवाज में एक ताल एक रफ़्तार नज़र आती है । कुछ देर बाद एक खेजड़ी का वृक्ष जो अपने ठीक नीचे बस -स्टेंड को समेट कर खड़ा है ,आ चुका है । अब्बू का गला धूप में चलने से सूख गया था ..ठीक से बोल भी नहीं पा रहे थे ..रेयान पानी की बोटल निकाल कर अब्बू के हाथ में थमा देता है । बस के हॉर्न की आवाज़ सुनाई दी है पर अभी बस दिखाई नहीं दी …तेज़ रफ़्तार से भागती हुई बस उनके करीब पहुंचने वाली है । अब्बू के चरण छू कर रैयान कुछ पल के लिए अपने अब्बू से लिपट गया है ..रेयान ने  बस को रूकने के लिए सिग्नल दिया तो बस पास आकर रूक गई । रैयान डबडबायी आंखें लिए बस में सवार हो गया है । उसके अब्बू उसे रवाना कर अभी भी जाती हुई बस को देख रहे हैं । रैयान तो रवाना हो गया लेकिन उसके अब्बू  बड़ी मुश्किल से अपनी टूटी – फूटी झोपड़ी तक पहूंचे । एक – दो घूंट पानी पिया फिर एक छोटी – सी खट्टियां पर लेट गये  ।

इधर रैयान ने  बस में करीबन 5-6 घंटे का सफर तय कर लिया है । कुछ ही देर में शहर की आबोहवा उसकी बिती हुई यादों को तरोताज़ा करने लगती है । रैयान बस स्टेण्ड से उतर कर पैसेन्जर वाले ऑटो में बैठकर अपने उसी आशियाने की ओर  बढ़ चला है  जहां वो किराये पर रहता है । रैयान ने उसी बड़ी मंजिल के सामने ऑटो वाले को रोक दिया । ऑटो वाले को पैसे देकर रैयान अपने रूम की तरफ़ बढ़ चला । तभी सीढियां चढ़ते हुए रैयान ने आंटी को आवाज़ दी । तभी कोई आवाज़ नहीं आयी ! आज इबादत जो थाकी – हारी नीचे वाले रूम में सो रही थी उसकी भी नींद नहीं खुली । रैयान अपने रूम की चाबी लेने नीचे आया तो उसने दरवाजे की कुण्डी बजायी । अरे यार मेरी चाबी किसके पास है रेयान ने कहा तो इबादत की नींद खुली ओर उसने दरवाजा खोला तो सामने रैयान को पाया । वो तुरन्त दौड़कर रैयान से लिपट गई । उसने रैयान को कसकर पकड़ लिया था । इबादत को मालूम नहीं था कि आज वह आ जायेगा ।  इबादत बहुत रो रही थी । रैयान की आंखे भी भर आयी थी  । रैयान ने इबादत के आंसू पोछे ओर बड़ी मुश्किल से चूप कराया था उसको  । इबादत काफी देर तक कुछ भी नहीं बोल पायी । रैयान ने इबादत के  रूम से चाबी उठायी  ओर इबादत को साथ लिए अपने रूम की तरफ़ बढ़ चला । इबादत अभी भी उससे लिपटें हुई थी । आंसूओं  की जैसे आज मूसलाधार बारिश हो रही थी इबादत की आंखों से । वो पिछले तीन महिनों से बिना रेयान को देखें , बिना रैयान को सुने अधेड़बुन में जी रही है ।

हर रोज इबादत ने  नमाज अदा करते वक्त परवरदिगार से , उस ऊपर वाले से केवल ओर केवल रैयान की वापसी मांगी थी ,बस  रैयान का ही एक सहारा मांगा था । दोनों ने ही जी भर कर आज तो अपने रूम में बहुत सारी  बातें की थी । फिर इबादत ने अपने रूम में चाय बनाने की बात कही तो दोनों साथ – साथ एक – दूजे का हाथ पकड़ इबादत के रूम में चल दिये । इबादत रैयान के लिए चाय बनाने लगी तो रैयान बिना पलकें झपकाएं उसे निहारता रहा । उसकी सादगी , उसकी मासूमियत ने आज रैयान को इबादत का ही बना दिया था । इबादत की आंखे , उसका  चेहरा आज एक नए नूर लिए चमक रहा था ।  आंटी को पता चल गया था कि इबादत रैयान से प्यार करने लगी है । रैयान अब रोज की तरह इबादत से बातें करता , हंसता , मुस्कुराहता यहां अपनी स्टडी भी करता रहा । रैयान की मोहब्बत इबादत से इतनी करीब हो गयी थी कि रात को  इबादत और रैयान साथ – साथ एक ही कमरे में सोते थे ।

एक दिन इबादत को लगा कि रैयान का पढना बहुत ही मुश्किल हो जायेगा अगर वो दोनों ही इस अंदाज में रहे तो ! तभी इबादत ने रैयान को एक दिन अपने पास बिठा कर बहुत समझाया और अपने अब्बू के सपनों को याद दिलाया । तब रैयान को भी लगा कि बात तो बिल्कुल सही है । रैयान होश में आया ओर अपनी स्टडी पर ध्यान देने लग गया । दो साल की कडी मेहनत के बाद रैयान की आज की जॉब लगी थी । रैयान ने बहुत खुश होकर आज इबादत से मिलने का मानस बना लिया था , रैयान उससे मिलने गया तब इबादत नमाज पढ रही थी , रैयान को उसका ये अंदाज बहुत ही अच्छा लगा तो वह भी वही पर उसी के करीब बैठ गया । रैयान ने तब मन ही मन इबादत का दिल से बहुत शुक्रिया अदा किया कि अगर वो उसको ठीक समय पर नसीहत न देती तो शायद ही आज वह नौकरी पर नहीं लग पाता ! इबादत ने जब नमाज पूरी कर ली तब सामने रैयान को देखकर चेहरे पर कभी न मिटने वाली मुस्कान – सी छा गई ।  रैयान ने पैकेट में से मिठाई खिलाकर उसका मुंह मिठा कराया तब भी इबादत का अटूट प्यार उसकी आंखों से झलक रहा था । रैयान ने एक बार हिम्मत करके इबादत से आज कह ही दिया ! इबादत मैं तुमसे शादी करना चाहता हूं ! मानो  इबादत को तो इसी पल का इंतजार था । उसने आंव न देखा ताव सीधे ….गले से लगा लिया रैयान को । उस रैयान को जिसे जी जान से प्यार करती है । रैयान और इबादत दोनों ही खुशनूमा सफरनामे की शुरूआत करने आज चल पडे थे एक नयी राह पर जिसे दुनिया कहती है मोहब्बत की राह……….

रक्षित परमार , उदयपुर (राजस्थान )

rakshitparmar2015@gmail.com

9783440685 whats app.

Youth Ki Awaaz is an open platform where anybody can publish. This post does not necessarily represent the platform's views and opinions.