रोजगारी की बीमारी

Posted by धीरज कुमार
November 17, 2017

Self-Published

रोजगारी देकर सरकार सबों की मनोकामना पूर्ण करती है।
रोजगारी देने की बात जोश के साथ शुरू हुई और इस पर्व में सफलता मिल ही जाएगी! पहले के साहब कागज की कतरनों में रोजगारी देते थे पर हकीकत में रोजगारी अब मिली है या मिलने वाली है!
बात चली कि रोजगारी देकर ही भारत की जनपावों का उद्धार संभव है नहीं तो हमारी अस्मिता,धरोहर खतरे में पड़ जाएगी!
रोजगारी सबों को मिले इसके हरसंभव प्रयास किए जाएंगे।
रोजगारी देना सिर्फ बातें नहीं है साहब,
खुद के बच्चे भूखे हैं रोजगारी क्यों न देंगे?
रोजगारों का लहू कार का डीजल है,
अगर न मिली तो क्या आप रिक्शा चलाएंगे?
हर बार सुनाई देती है skill दे दो उससे यदि रोजगारी आ रही है तो इसे तब तक जारी रखा जाएगा जब तक कि हर जरूरतमंद को रोजगारी न मिले!यदि ‘s’ silent भी करना पड़े तो भी ये पर्व जारी रखना है!!
बोले कि पर्यावरण दूषित होने दो न,नहीं तो इससे निबटने के लिए जो खाका तैयार किया जाता है उससे रोजगारी उत्पन्न हो जाएंगे!इन सब प्रयासों से किसी को जल्द रोजगारी मिलेगी या आनेवाले दिनों में मिल जाएगी!

राष्ट्रीय एकता, ‘भक्ति’ के लिए रोजगारी की समस्या घातक है इसलिए एकता की बात तब होगी जब सभी जनपा रोजगारी में जी रही होगी!

बोले कि अच्छे से पढ़ाई करो रोजगारी अवश्य मिलेगी इक दिन
बोले कि जो इस काबिल बना उसे हरसंभव रोजगारी दी गई!
बोलते हैं न कि तुम काबिल बनते जाओ रोजगारी झख मार के तुम्हरे पास आएगी!

रोजगारी के आगे ‘बे’ लगाने में दिक्कत आ रही है,, अपने-अपने हिसाब से लगा लें!❌✔️☑️✅😂😁😀😀

कविताओं में काहे ये गढ़ी जाएगी,
दोष किसी पे काहे ये मढी़ जाएगी!
जब तक हर कोई सिद्ध न हो जाए सच्चा,
तब तक खेले आस-पास ढप्पा,
लगे या न लगे रोजगारी का ठप्पा!!

 

सबकोई छीनें रोजगारी,,,तब तक के लिए
#निकम्में की डायरी!!!

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