विश्व सुंदरियाँ और नारी सशक्तिकरण

Posted by Tanya Jha
November 23, 2017

Self-Published

हाल ही में हरियाणा की छोरी मानुषी छिल्लर ने मिस वर्ल्ड का खिताब अपने नाम कर सत्रह साल का सूखापन खत्म किया। एक मेडिकल छात्रा का मिस वर्ल्ड बनने का सफर वाकई रोमांचित सा कर जाता है। “ब्यूटी विद ब्रेन” उक्ति को सही साबित करने वाली मानुषी छिल्लर एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उन्होंने बचपन से ही यह सपना देखा और अपने सपने को पूरा कर पूरे राष्ट्र का गौरव बढ़ाया। हम सभी उनकी इस उपलब्धि से गौरवांवित हैं। हरियाणा जो कि बदनाम है लड़कियों के साथ होने वाली दुर्घटनाओं को लेकर फिर चाहे वो भ्रूण हत्याएँ हों, यौन शोषण हो या छेड़खानी के किस्से। और उसी हरियाणा से जब एक लड़की मिस वर्ल्ड बनती है तो समझ में आता है कि हर सिक्के के दो पहलू होते हैं। जहाँ बुराई है वहाँ अच्छाई भी है। जब हर कोई नारी सशक्तिकरण की बातें करता है तो हर क्षेत्र में नारियों का योगदान प्रेरणादायी ही होता है। विश्व सुंदरियाँ चाहे फिर वो रीता फारिया हों या मानुषी छिल्लर उनका उतने बड़े मंच तक पहुँचने का सफर दिलचस्प एवं हौसला बढ़ाने वाला होता है। उनकी सफलता उस पितृसत्तात्मक समाज पर तीखा वार है जिनकी सोच बस घर की चारदीवारी तक ही कैद है। ऐसी महिलाएँ जो कुछ करना चाहती हैं,पँख खोल कर उड़ना चाहती हैं इनकी कहानी उन सभी को प्रेरणा देती है। उनका आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद करती है। ये समाज में एक उम्मीद जगाती हैं कि अगर लड़कियों को सही मौका दिया जाए तो वे हर ऊँचाइयाँ हासिल कर सकती है। उनकी कामयाबी उस संकीर्ण एवं दकियानूसी सोच पर भी हमला करती है जिसके मुताबिक लड़कियों का उनके कपड़ों से पता चलता है। वे इस बात का यकीन दिलाती हैं कि अगर लड़कियों को सही मौके दिए जाएँ और उन पर विश्वास किया जाए तो हर घर से मानुषी छिल्लर, सुष्मिता सेन, प्रियंका चोपड़ा और ऐश्वर्या राय उभर कर आने लगे।

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