वज़ाहत की आजादी

Posted by Shreyas Apoorv Narain
November 16, 2017

Self-Published

 

सत्तर की आजादी है, हल्के में तोलिये।
बोलने को आजाद हैं सब,हल्के में बोलिये।
धनिया की बेटी पर हक है पूरे गाँव का,
सरपंच जी खुद को अब सोने में तोलिये।
घर के अंदर घर की देवी पिटने में व्यस्त है,
शिव शम्भू शंकर तीसरी आंख अब खोलिये।
देश चलाने को हैं काफी मक्कार चवालीस,
आप उन सौ करोड़ को गरियाने को बोलिये।
बँटे हुए इस देश के टुकड़े टुकड़े कर देंगे,
ऐसे नए खून को आप,भटके हुए बोलिये।
बेकार मंगू है जोश में,जुए में देश बदल रहा,
बे लगामी को ‘मैकश’,आजादी अपनी बोलिये।
वजाहत की आजादी पर, सबका है हक यहाँ,
थोड़ी नकेल सी कसिए,हुजूर सोच के बोलिये।

‘मैकश’

 

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