सपने पुरे कर छोड़ूंगा

Posted by Vivek Singh Rajput
November 13, 2017

Self-Published

गैरो की औकात कहाँ है अपनों ने ही मारा है !

सपने पूरे कर छोडूंगा, यह संकल्प हमारा है !!

 

लड़ना नही यहां मुझे किसी से !

मंजिल को अपने पाने तक !!

दूंगा हर किसी को जवाब मैं ! 

 सही वक़्त के आने पर !!

 

मेरे अंदर की प्रतिभा को उसने कहाँ अभी जाना है !

मेरी खमोशी को कोई,  कहाँ अभी तलक पहचाना है !!

 

मिलेगा एक दिन मुझको भी !

मेरे मेहनत का मीठा फल !!

माना कठिन प्रश्न है यारों !

मगर निकलेगा उसका भी हल !!

 

मुझको है अभिमान खुद पर, नही किसी का सहारा है !

सपने पुरे कर छोड़ूंगा,     यह संकल्प हमारा है !!

 

लिए आस मैं निकल पड़ा हूँ,

मंजिल को अपने पाने को !

लाख दर्द क्यों मिले न मुझको,

तैयार हूँ मैं हर दर्द सहने को !!

 

नही उलझेगा #विवेक किसी से मन में यही ठाना है !

चलते चलते मुझको अभी मंजिल को अपने पाना है !!

 

जब तक पुरे न हो सपने !

चैन नही मुझे रातों में !!

नही उलझना मुझे किसी से !

यहां उल्टी सीधी बातों में !!

 

मन में है विश्वाश मुझे अब मंजिल ही बस प्यारा है !

सपने पूरे कर छोडूंगा,       यह संकल्प हमारा है !!

 

#विवेक

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