#सही कहते हैं जाति कभी नही जाती #

Posted by Meena Naidu
November 9, 2017

Self-Published

लाख कोशिशों के बावजूद

हम सभी इस बात से बहुत खुश होते हैं यहाँ तक कि बहुत गर्व करते हैं कि हम भारत देशवासी है ।और हो भी क्यों ना क्योंकि यही ऐसा देश है जहाँ विभिन्नता में एकता है ।

आप सभी सोच रहे होंगे कि आज अचानक देश,विभिन्नता, एकता के बारे में लिखने की क्या जरूरत है ।
पर मैं आप सभी का ध्यान विसयोजन यानी (Segregation) की और लाना चाह रही हूँ आज मैं आप सभी से एक ऐसी ही कहानी सांझा करने जा रही हूँ ।

हरियाणा राज्य के कुरुक्षेत्र जिले में एक गांव बसा हुआ है वो भी वहा जहाँ महाभारत की युद्धभूमि हैं ।
उसी गांव की एक छोटी सी बस्ती गांव से दूर लगभग 1 से 2 किलोमीटर की दूरी पर बसी हुई है ,जहाँ किसी भी प्रकार की कोई सुविधा नही है यहाँ तक कि मूलभूत सुविधाएं भी नही है । इस बस्ती में लगभग 150 परिवार रहते हैं और 1200 यहाँ की वोट है ।
ये बस्ती गांव से दूर इसलिए है क्योंकि यहाँ केवल दलित जाति से सबंध रखने वाले परिवार बसे हैं ।
ओर इन परिवारों का शोषण हर तरह से होता था,और होता आ रहा है ।
शोषण करने के तरीके बदल दिए जाते हैं ।
इस बस्ती के लिए किसी तरह का कोई स्कूल नही है ,यहाँ के बच्चों को स्कूल् के लिए और प्राथमिक शिक्षा के लिए गांव में पैदल जाना होता है ।
बस दलित शब्द सुनते ही इस बस्ती में ठेकेदारों,जमीदारो व ऊंची जाति से सम्बध रखने वालों ने यहाँ विसयोजन (Segregation) हर छोटी जरूरत से लेकर बड़ी जरूरत तक बस्ती के लोगो के साथ किया गया ।
दलितों की बस्ती गांव से दूर बनाई गई ,स्कूल् में पढ़ने की इजाजत नही थी फिर भी कोई स्कूल् तक गांव में पहुंच जाते तो उनके लिए पीने के पानी के मटके अलग रखे जाते, उन बच्चों को क्लास में नीचे जमीन पर बैठाया जाता ।और अध्यापक भी पढ़ाने की वहज उनसे स्कूल् में साफ सफाई का काम करवाते । यह Segregation स्कूल् में खत्म नही हुआ गांव मे जो दलित परिवार जमीदारो या ऊंची जाति के लोगो यहाँ मजदूरी करते थे उन्हें रोटी और लस्सी भी बहुत ऊपर से फेंक कर दी जाती रही है जैसे एक कुते के सामने रोटी फेंक देते हैं बिल्कुल वैसे ही ।
और दलितों के लिए बर्तन भी अलग रखे जाते रहे हैं ।
यहाँ तक कि पीने के पानी के कुएं ओर नल भी अलग अलग है।काम भी साफ सफाई से जुड़े ज्यादा करवाये जाते हैं । ऐसा इसलिए करते हैं उनका मानना है कि ये नीची जाति के है और अछुत है ।
लेकिन बात यहाँ खत्म नही होती क्योंकि दलित महिलाओ का जो शोषण लगातार होता आ रहा है उसकी स्थिति बहुत खराब है ,वैसे तो दलित अछुत है लेकिन दलित महिलाओ के साथ हर जगह जो उनका मानसिक और शारीरिक शोषण हो रहा है उसे अपना अधिकार मानते हैं क्योंकि दलित है दबे कुचले हुए हैं उनके साथ जो उनके मन मे आये वो करते हैं कोई रोकने वाला भी उस समय नही मिलता हैं ये कहा जाता है ये हमने मनोरंजन नही करेंगे तो कौन करेंगे ।और एक दलित इसलिए भी ये सब सहन करते हैं क्योंकि मजदूरी और काम तो उनके खेतो में ही करना है ,वही से परिवार चलता है । अगर कोई महिला या दलित शोषण के खिलाफ बोलता है तो उसे सजा दी जाती है उसके घर को जला दिया जाता है, या पूरी बस्ती में आग लगा देते हैं इसलिए डर के कारण कोई बोल नही पाते हैं ।
आज भी शोषण होता है लेकिन उसके तरीके बदल दिए गए हैं ,ताज भी दलितों का Segregation है उसके भी तरीके बदल दिए गए हैं ।

दलित कितना भी पढा लिखा या अच्छे पद पर नौकरी करने वाला ही क्यों न हो उसे भी शोषण का शिकार होना पड़ रहा है क्योंकि वह दलित हैं ।और उसे अनेक प्रकार के भद्दे शब्द और गालिया दी जाती है ।
यहाँ एक बात और कहना चाहूंगी यह हालात केवल इस बस्ती के है ऐसा नही है हर जगह हमे दलित बस्ती गांव में अलग जगह ही बसी मिलेगी ,और इसी तरह का Segregation हमे देखने को मिलेगा । यह हर दलित की कहानी है ।

और सभी ठेकेदार ,जमीदार व ऊँची जाति के लोगो की सोच दलित का शोषण करना नही है कुछ ऐसे भी है जो दलितों को इस स्थिति से बाहर निकालना चाहते हैं और बहुत कुछ लिख रहे हैं अलग अलग तरीको से काम कर रहे हैं ।

पर शोषण करने वाले भी इसी समाज का हिस्सा है उन्हें भी समझना होगा कि इंसान इंसान ही होता है चाहे वह किसी भी धर्म,जाति से क्यों न हो ।

ओर Segregation व ऐसी शोषण करने की मानसिकता इस समस्या की जड़ है ।

जब तक मानसिकता नही बदलेगी और Segregation को खत्म नही किया जाएगा तब तक हम चाहे किसी भी शदी में क्यों न हो तब तक जाति प्रथा खत्म नही हो सकती है ।
इसलिए सही कहते हैं जाति कभी नही जाती ।

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