सुनो सैलानी ! इन पहाड़ों से कोई झूठा वादा न करना, ये रो देते है।

Posted by के.डी. चारण
November 4, 2017

Self-Published

पहाड़ों के अपने-अपने रहस्य होते है और वो ये रहस्य हर किसी से बतियाते नहीं है। बहुत से लोग होंगे जो पहाड़ों को पसंद करते है पर वो जिसे पसंद करते है वे उसे ही अपना रहस्य किसी समवेत स्वर में एक तान सुनाते है।

लोग कहते है कि पहाड़ों के अपने राग-रंग होते है पर मैं मानता हूँ इन पहाड़ों को हम जो राग सुनाते है वही राग प्रतिध्वनि के रूप में हमें पुनः सुनाते है, इन्हें हम जिस रंग में रंगना चाहते है ये उसी में मस्ताने होकर हमें अपनी पीठ पर लादकर इतराते हुए इधर से उधर लिए फिरते है ताकि उन्हें कुछ समय के लिए ही सही एक अदद साथी मिल सके। ….मगर जब हमारा मन भर जाता है तो इनके चेहरे को एक लंबी सी साँस के साथ निहारते हुए न चाहते हुए भी विदा ले लेते है। याद रखना इस तरह विदा होना पहाड़ों को बहुत अखरता है, वे आँसू तो नहीं बहाते है पर भीतर ही भीतर रोते जरूर है। फिर वे अगले कुछ दिनों तक अपने आप को सहज बनाने में लग जाते है और अपने आप से एक वादा करते है कि अब वे फिर से किसी परदेशी से इतना हेत नहीं साधेंगे, इतनी प्रीत नहीं करेंगे।

 

……लेकिन नियति से मजबूर है बेचारे पहाड़! अगली दफा फिर किसी की प्रीत में हौले-हौले गुनगुनाने लगते है, चांदनी में नहाकर, छोटे-छोटे पौधों और घास-फूस से सज-धजकर, जो भी रंग सैलानी को आकर्षित कर सकता है वही रंग ओढ़कर वो फिर से मिलन की राग आलापने लग जाते है क्योंकि उन्हें पता है उनका जीवन ही पहाड़ सरीखा है इसलिए वो तन्हा नहीं रहना चाहते।

 

सुनो सैलानी !! तुम इस बार पहाड़ के पास जाओ तो उससे कोई लज़ीज़ वादा ना करना और ना ही उनको इस तरह बिना आँसुओं के रुलाना क्योंकि मैं जानता हूँ बिना आँसुओं के रोने का दर्द क्या होता है !

तुम उनसे प्रेम भरी बातें जरूर कर लेना लेकिन लौटते समय अपने साथ अपने देश में उनका दिल मत ले आना क्योंकि उनका दिल वहीं लगता है जहाँ के वे होते है पर उनकी एक मजबूरी है कि जैसे हम मनबहलाव के लिए उनके पास चले जाते है, कभी सशरीर तो कभी कल्पनाओं में वैसे वो हमारे साथ नहीं आ सकते । शायद इसीलिए तो वे हमें अपने पास बुलावा भेज देते है।

 

क्या कहा…?? पहाड़ के दिल नहीं होता…?? होता है हुजूर…..कभी उसके कठोर सीने से लिपटकर महसूस करना उनका भी दिल होता है और हमारी ही तरह धड़कता है क्योंकि मैंने पहाड़ को किसी के वियोग में रोते हुए महसूस किया है।

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