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सुरक्षित कार्यस्थल : सबका हक

Posted by Kapil Sharma
November 22, 2017

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अपने परिवार के बाद कार्यस्थल ही एक एसा स्थान है जहां नौकरी करने वाला आम इन्सान अपने जीवन का अधिकांश हिस्सा व्यतीत करता है। नवयुग विचारधारा के सिद्धांतों की माने तो एक स्त्री और पुरुष को समानता का अधिकार दिया गया है। वैसे तो समानता के युग में स्त्री- पुरूष वैसे तो एक साथ कंधे से कंधा मिला कर काम करते हैं लेकिन महिलाओं को कुछ ज्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। फिर चाहे वो सामाजिक कुरीतियां हो या किसी कंपनी मालिक की घटिया हरकतें, एक कामकाजी औरत को इन सब फासलों को पार करना ही पड़ता है। अब समाज के दकियानूसी लोगों के तानों को तो नज़रअंदाज कर भी दें, पर ऑफिस में उस हरामी बॉस से बचना बहुत मुश्किल है जिस निगाहें हर वक्त उसके घटिया दिमाग की घिनौनी मन्शा को दर्शा रही होती है।

अब कितना पल्लु संवारे और कितनी बार झुकने से बचें, आखिर किसी की बुरी नजरों से बचने के अलावा ऑफिस में और भी बहुत काम हैं जो उसे ही संभालने हैं। बॉस द्वारा किसी  पुरानी या अनुपयोगी फाइल को मंगवा कर कैबिन में बुलाना और फिर उस पे डिसकशन के बहाने से हाथ – बाजु छूना तो उसकी आम सी आदत हो गई है। कई दफा तो वो किसी अन्य काम में उलझने का दिखावा करके किसी और को भेज देती है पर फिर डरती भी है कि कहीं उसकी इस हरकत से बॉस को गुस्सा ना आ जाए। कुछ सहकर्मिओं को भी बॉस की करतूतें मालूम है, पर कहे कौन आखिर नौकरी किसे प्यारी नहीं। बस अगर नौकरी करना उसकी मज़बूरी ना होती तो कबका उस बॉस के मुँह पे तमाचा मार दिया होता। पढ़ी- लिखी है, और जानती भी है कि इच्छा के खिलाफ छूना या छूने की कोशिश करना एक कानुनन अपराध है और कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न अधिनियम के तहत बॉस को सजा भी हो सकती है। पर बूढ़े माँ- बाप को पालने के लिए नौकरी की मज़बूरी में सब सहन कर लेती है।

बॉस की इन गिरी हुई हरकतों का मुख्य कारण है सब कुछ पता होते हुए भी ऑफिस स्टाफ का चुप रहना। अगर महिला के हक के लिए हर कोई आवाज उठाए तो समस्या का समाधान हो सकता है और कानुनी तौर पे आपको नौकरी से नहीं निकाला जा सकता, और वो महिला एक बार आवाज उठा के तो देखे, बॉस की हिम्मत नहीं होगी दोबारा हाथ लगाने की।

 

 

 

यौन उत्पीड़न क्या है?

सन् 2013 में कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न अधिनियम को पारित किया गया था।जिन संस्थाओं में दस से अधिक लोग काम करते हैं, उन पर यह अधिनियम लागू होता है l

इस अधिनियम के तहत निम्नलिखित व्यवहार या कृत्य ‘यौन उत्पीड़न’ की श्रेणी में आता है:

कृत्य उदाहरण
इच्छा के खिलाफ छूना या छूने की कोशिश करना यदि एक तैराकी कोच छात्रा को तैराकी सिखाने के लिए स्पर्श करता है तो वह यौन उत्पीड़न नहीं कहलाएगा पर यदि वह पूल के बाहर, क्लास ख़त्म होने के बाद छात्रा को छूता है और वह असहज महसूस करती है, तो यह यौन उत्पीड़न है।
शारीरिक रिश्ता/यौन सम्बन्ध बनाने की मांग करना या उसकी उम्मीद करना यदि विभाग का प्रमुख, किसी जूनियर को प्रमोशन का प्रलोभन दे कर शारीरिक रिश्ता बनाने को कहता है,तो यह यौन उत्पीड़न है
यौन स्वभाव की (अश्लील) बातें करना यदि एक वरिष्ठ संपादक एक युवा प्रशिक्षु /जूनियर पत्रकार को यह कहता है कि वह एक सफल पत्रकार बन सकती है क्योंकि वह शारीरिक रूप से आकर्षक है, तो यह यौन उत्पीड़न है
अश्लील तसवीरें, फिल्में या अन्य सामग्री दिखाना यदि आपका सहकर्मी आपकी इच्छा के खिलाफ आपको अश्लील वीडिओ भेजता है, तो यह यौन उत्पीड़न है।

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