सूट-बुट और राजनेता

Posted by Pawan Bhati
November 22, 2017

NOTE: This post has been self-published by the author. Anyone can write on Youth Ki Awaaz.

बदलाव वक्त की मांग है तथा जो इस मांग की पूर्ति करता है वही समय के साथ अपने आप को बनाए रख पाता है।आजादी के बाद से अब तक हर सदी में कुछ बदलाव भारतीय राजनीति के हर पहलू को छूते रहें हैं लेकिन नहीं बदला तो राजनेताओं का पहनावा।भाषा की तरह शारीरिक उपस्थिति सार्वजनिक व्यक्तियों के लिए एक महत्वपूर्ण गैर मौखिक संचारक हैं क्योंकि वह अक्सर जनता की आंखों में होते हैं।किसी व्यक्ति को नेहरू जैकेट तथा सफेद कुर्ते में देखते ही पहला विचार यही आएगा कि वह व्यक्ति राजनीति से संबंध रखता होगा। करीब पिछले 3 वर्षों से छात्र राजनीति को करीब से देखने के बाद यह बात महसूस होती है कि राजनेताओं को भी अब अपने पहनावे में बदलाव की जरूरत हैं। आज युवा तरुणाई अपने नेता को एक ठोस रूप में ना देख कर के वक्त के साथ उनमें बदलाव को देखना चाहती हैं।हर युवा अपने नेता की तुलना विश्व के उन नेताओं से करता है जिन्होंने समय के साथ अपने आप में बदलाव किए एवं खुद को राजनेता होते हुए भी फैशन को अपने आप से अछूता नहीं रखा। इतिहास के कुछ पन्ने पलटे तो हमें यह ज्ञात होगा कि किसी राजनीतिज्ञ के निजी तौर तरीकों से उनके राजनीतिक कार्यों के निष्पादन में कोई कमी नहीं आयी है। चाहे रूस के व्लादिमीर पुतिन हो या पाकिस्तान की बेनजीर भुट्टो,यूक्रेन की यूलिया टिमशेंको, भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, जवार लाल नेहरु हो या बराक ओबामा जिनकी तुलना सामान्यताैर पर दुनिया के शीर्ष फिल्मी सितारों से की जाती हैं। 2009 के एक सर्वे के अनुसार बराक ओबामा की तुलना ब्रैड पिट व डेविड बेकहम से तथा टॉम फोर्ड के अनुसार हामिद करजई ग्रह पर सबसे सजीले व्यक्ति हैं।लेकिन भारत में इस रूढ़िवादी परंपरा को तोड़ कर आगे बढ़ने वालों की सूची में बहुत कम ही नाम है अब वक्त की मांग है कि भारतीय राजनेता भी मेक्सिको के इंरिक पेना नीटो की तरह सूट-बुट में तथा पुतिन की तरफ फिट नजर आएं।

Youth Ki Awaaz is an open platform where anybody can publish. This post does not necessarily represent the platform's views and opinions.