स्त्री और उसका मुकाम

Posted by Alok Upadhyay
November 12, 2017

Self-Published

हमारे समाज से जो भी समस्याएँ है प्रायः स्त्री से जुड़ी होती है। प्राचीन काल की सामन्ती शासन व्यवस्था में कच्ची उम्र मे ही बच्चियों के मन मे यह बात भर दी जाती थी कि पति परमेश्वर होता है । भले ही पति लम्पट,दुराचारी, मूर्ख ही क्यो न हो! उसकी सेवा और भक्ति ही पत्नी का परम कर्तव्य है ।नारी जाति का सबसे बड़ा शोषक,यह आम धारणा भी है कि,उसका संसार,उसकी दुनिया,पति, बच्चे और उसका घर परिवार है।पुरुष वर्चस्व के चलते सदियों से स्त्रियां मानसिक और शारीरिक रूप से पीड़ित रही है.😡 आज भी है। इक्कीसवीं सदी की समस्त बौद्धिकता,विज्ञान, टेक्नॉलजी का विकास और तार्किकता भी पुरुष के भीतर छिपे स्त्री विरोधी रवैये छिपा नही पाते। इस सब के परिदृश्य मे यह सवाल उठता है कि स्त्री ने अब तक हासिल क्या किया,और उसका मुकाम क्या है? और कब हासिल होगा।।

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