स्माॅग सिर्फ शहर की फिजाओं में ही नही बल्कि लोगों के जेहन में भी छाया हुआ है।

Posted by Mrigendra Singh
November 17, 2017

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अमेरिकी एजेंसी ‘एनओएए’ ने दावा किया है कि उत्तर भारत और पाकिस्तान के कई शहरों में आगामी कई माह तक धुंध (स्माॅग) का सामना करना पड़ेगा। इसके समाधान पर केन्द्र व राज्य की सरकारें ठोस कदम उठाने का प्रयास करने में जुटी हुई हैं। भले ही कदम न उठें पर चर्चा में कोई कसर बाकी न रहे ऐसा सरकार का मानना है।
लेकिन लोगों के जेहन में जो स्माॅग छाया है उसका क्या होगा। एक तरफ गांधी के हत्यारे गोडसे की मूर्ति स्थापित कर दी जाती है और उसके खिलाफ कहीं विरोध प्रदर्शन भी नही हो रहा है।
उस गांधी के हत्यारे की जिस गांधी के नाम से दुनिया में भारत को पहचाना जाता है और जिस हिंदू महासभा ने गोडसे के महिमामंडन का पुनीत कार्य किया है उसे शायद यह नही मालूम कि गांधीजी इनसे ज्यादा सही अर्थों में हिंदूवादी थे, जो गीता को साथ लेकर चलने वाले, प्रार्थना करने वाले और राम का जाप करने वाले थे।
दूसरी तरफ फिल्म पद्मावती को लेकर हंगामा जारी है जबकि किसी ने फिल्म अभी तक देखी नही है। दोनो ही मामलों में सरकार मौन है। एक तरफ करणी सेना अपना खौफ दिखा रही है, दूसरी तरफ हिन्दू महासभा अपनी कुंठित मानसिकता का प्रदर्शन कर रही है ।
बहुत बढ़िया है कुछ लोग गोडसे की मूर्ति को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ देखेंगे और पद्मावती के मामले में राजपूताना अस्मिता के खिलाफ। इस जातिवादी देश में अगर गांधी किसी विशेष जाति के नाम से जाने जाते तो शायद गोडसे की मूर्ति न लगती।
देश बदल रहा है। न किसानों की आत्महत्या पर हंगामा होगा, न बच्चों के मरने पर, न बेरोजगारी पर, न ही पत्रकार या लेखक की हत्या पर और न ही गोडसे की मूर्ति लगने पर। हंगामा होगा तो इतिहास को लेकर और जिनसे न देश और समाज का हित होगा सिर्फ थोड़ी बहुत राजनीतिक फायदा वो भी अल्प समय के लिए, लेकिन हंगामा जरूर होगा ।।
सरकार सिर्फ दिखावे के लिए गांधी का नाम लेती रहेगी अंदर भले ही गोडसे विराजमान हों।

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