स्वच्छ भारत मिशन और गाँधी फेलो

Posted by Abhimanyu Kumar
November 13, 2017

Self-Published

#स्वच्छ_भारत_मिशन की शुरुआत वर्तमान केंद्र सरकार ने 2 अक्टूबर 2014 को महात्मा गाँधी के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में शुरू किया था।

   #महात्मा गाँधी ने कहा था कि भारत_गाँवो_का_देश_है_और_इसकी_आत्मा_गाँवो_में_बसती_है

      इसका सीधा तात्पर्य है अगर हम भारत को स्वच्छ रखना चाहते है इस बात का खास ख्याल रखना होगा कि स्वच्छ_गाँव_ही_स्वच्छ_भारत_के_सपनो_को_साकार_कर_सकता_है स्वास्थ्यता का मतलब सिर्फ शारीरिक तंदुरुस्ती नही होता है स्वास्थ्य अपने विचारों से कर्मो से दायित्व से है तो तब आपका शरीर भी स्वास्थ्य रहेगा। ठीक उसी प्रकार स्वच्छता का मतलब सिर्फ साफ-सुथरे शौचालयों एवं सड़को तथा कचरा निस्तारन से नही है

                          जिस तरह एक कहावत प्रचलित है कि मन(आत्मा)चंगा_तो_कठौती_में_गंगा अथार्त अगर हमारा मन और आत्मा ही स्वच्छ नही हो तो हमारा सम्पुर्ण शरीर के स्वच्छ रखने कल्पना मात्र कोरा-कागज बन कर रह जायेगा। शरीर एक बाहरी प्रतिबिम्ब है अगर हमे स्वच्छ ही होना है तो विचारो से होना होगा तब कही जा के हमारा शरीर भी स्वच्छ और स्वस्थ्य रह पाएगा।

                            ठीक उसी प्रकार की अगर हम स्वच्छ_भारत, स्वस्थ्य_भारत, समर्थ_भारत, सशक्त_भारत की कल्पना करते है तो हमारा मन और आत्मा गाँव है जब तक कि हम गाँव को स्वच्छ, स्वस्थ्य, समर्थ, सशक्त नही बनायेगे तो स्वच्छ भारत की कल्पना कभी वास्तविक नही हो पायेगा। अगर हम उपरोक्त चार शब्द स्वच्छ, स्वस्थ्य, समर्थ, सशक्त की बात करे तो आम तौर पे ये चारों शब्द एक दूसरे का परिचायक नही है किंतु स्वच्छ भारत मिशन के संदर्भ में इनमे कही न कही सम्बन्ध स्थापित हो ही जाता है क्योंकि स्वच्छता से हमारा स्वास्थ्य बेहतर होगा अगर हमारा स्वास्थ्य बेहतर होगा तो हम अच्छे से अपने कार्य को कर सकते है तो हम समर्थ होंगे और समर्थता से ही सशक्तता आएगी जो विकसित भारत की कल्पना को साकार करेंगा।

                            क्योकि किसी भी राष्ट्र के विकास को मापनेे का सबसे उपयुक्त मानक वहा का स्वस्थ्य समाज होता है वहा के लोगो की स्वास्थ्य का सीधा असर उनके कार्य-शक्ति पर पड़ता है। नागरिक कार्य शक्ति का सीधा सम्बन्ध राष्ट्रीय उत्पादन से है। जिस देश की उत्पादन क्षमता अधिक हो वह वैश्विक पटल पे विकास के नए-नए मानक को गढ़ने में सफल होता है। इस सदर्भ में यह बहुत ही स्पष्ट हो जाता है कि किसी भी राष्ट्र के विकास वहा के नागरिक स्वास्थ्य का बेहतर होना अतिआवश्यक है। शायद यही कारण है कि विश्व के विकसित देश की वैभवता जो अपनी पराकाष्ठा पे है ही परन्तु उनकी राजनीतिक गलियारे में स्वच्छता और स्वास्थ्य का मसला अपना अहम स्थान पाता है।

                           जैसा कि हम सभी जानते है कि भारत की कुल जनसंख्या का लगभग 68% गाँवो में निवास करती है। तो हमारी पहली प्राथमिकता भी बनती है गाँवो का चौतरफा विकास को अमलीजामा स्वच्छता पूर्वक पहनाया जाए।

                            गाँधी_फ़ेलोशिप में गाँधी_फेलो के रूप में हमे भी एक सातदिवसीय कार्यक्रम की रूपरेखा दी गई जिसके माध्यम से हमे ग्रामीण स्वच्छता को स्कूल और समुदाय के बीच सामंजस्य बैठा कर अमल में लाने के प्रयास को मूर्त रूप देना था। इसके लिए हमने गुजरात राज्य के सूरत जिला अंतर्गत तालुका-उमरपाडा में वेलावी गाँव को चिन्हित किया जहाँ अपने ग्राम पंचायत सरपंच, प्राथमिक स्कूल के मुख्य शिक्षक एवं ग्रामीण लोगो के सहयोग से अपने कार्य को सपंन्न कर पाया। अपने सात दिवसीय कार्यक्रम को जीतने आसानी से अपने शब्दो मे लिख दिया उतना आसान भी नही था।

                       सबसे पहले गाँव का परिभ्रमण किया और तत्पश्चात सुनिश्चित किया कि किस बिंदु पे हमे अगले छः दिन काम करना है हमने पॉलीथिन कचरे का सही निस्तारण हो, गांव में अवस्तिथ सरकारी इमारत एव चौक-चौराहों का साफ-सफाई का समुचित समाधान खोजने का इरादा ग्राम जनप्रतिनिधि, स्कूल टीचर एव ग्रामीण लोगो से ही रखा था। फिर सरपंच, शिक्षक एव आठ-दस ग्रामीण लोगो से मिल कर दो दिन बाद एक बैठक आयोजित करने का फैसला लिया जो पहले दिन नही हो पाया इसका कारण बैठक का समय दोपहर 12 बजे था फिर बाद में पता चला कि सबलोग उस समय अपने खेतों में काम करने चले जाते है तो आपके लिए सबसे उपयुक्त समय शाम 5 बजे बाद ही सही रहेगा तो हमने भी अगले दिन बैठक का समय 5:30 शाम को सुनिश्चित कर दिया। 

                                  अगले दिन बैठक हुई हमने बैठक के दरम्यान उपरोक्त समस्या का समाधान भी ढूंढ लिया जिसमे सरपंच जी अपनी स्वीकृति दी कि हम सारे चौक-चौराहे पे कचरा पेटी रखवा देंगे। जिसे हर अगले दिन बैठक हुई हमने बैठक के दरम्यान उपरोक्त समस्या का समाधान भी ढूंढ लिया जिसमे सरपंच जी अपनी स्वीकृति दी कि हम सारे चौक-चौराहे पे कचरा पेटी रखवा देंगे। जिसे हर सप्ताह में एक सुनिश्चित किये गए एरिया में डब करा देंगे। और उन्होंने कहा कि जब लोग जागरूक होंगे तो सरकारी भवन ओर चौक-चौराहे ऐसे भी गंदे नही होंगे इसके लिए आपका क्या प्लान है और उसमें हम क्या मदद कर सकते है। तो हमने अपना प्लान उनसे शेयर करते हुए कहा कि हम एक जागरूकता हेतु प्रभात फेरी निकलेंगे क्योकि सुबह के समय लोग अगर पे ही होंगे लेकिन ओ आचारसंहिता (गुजरात विधानसभा चुनाव-2017) का हवाला दे कर बोले कि हम उसमे अधिक संख्या में ग्रमीण भी फिलहाल सम्मलित नही हो सकते है सो आप उसको चुनाव बाद करवाइये जिसपे बैठक में उपस्तिथ ग्रामीण ने भी अपनी सहमति प्रदान की किन्तु मैने बोला क्या हम सिर्फ बच्चों शिक्षक के साथ प्रभातफेरी निकाल सकते है तो इसमें उन्होंने कहा कि आप कर सकते है और मैंने शिक्षक को स्कूली बच्चों से मिलकर किया भी और लोगों का रिस्पांस भी मिला। सरपंच इससे उत्साहित होकर अगले फ़ोन कर उन्होंने बोला की क्या हम और अच्छे तरीको इसको चुनाव बाद कर सकते है क्या तो मैने भी अपनी रंजामंदी दे दी है।

           मैं शुक्रगुजार हूँ गाँधी_फ़ेलोशिप का जो हमे गाँधी_फेलो के रूप में बैच-10 सत्र-2017-2019 के लिए सम्मलित किया है हमे अब सुकून मिल रहा है कि महात्मा गाँधी के स्वच्छ भारत के सपनो को साकार करने में अपनी सहभागिता भी छोटे स्तर पर ही सही लेकिन #गाँधी जी के इस कथन को अंगीकार करते हुए की #भारत_गांवों_का_देश_है हो रही है।

 

लेखक

#अभिमन्यु_कुमार

गाँधी फेलो बैच-10

 सत्र-2017-2019

 #गाँधी_फ़ेलोशिप

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