स्वतंत्र विचार

Posted by Aditya Abhinav
November 13, 2017

Self-Published

मैं विचार हूँ
एक स्वतंत्र विचार
एक आज़ाद कलम से निकला हुआ
एक गर्म हलक से उगला हुआ
एक पिघला हुआ लावा जो जमकर
बनता है कल का आधार
मैं विचार हूँ
एक स्वतंत्र विचार |

 

उद्वेलित हृदय की धड़कन में
मैं दोलित गति से पलता हूँ
आंदोलित रक्त धमनियों में
बेपरवाह प्रवाहित चलता हूँ
तलवार मेरी ये समय बनी है
ढाल संभाल खुद अड़ा हूँ मैं
दमन मेरा सौ बार हो गया
रण में फिर भी खड़ा हूँ मैं
द्वंद मेरा उन सांचों से है
जिनमे अनचाहे ही ढलता हूँ
दमन चक्र के पहियों पर
मैं अमन की मिट्टी मलता हूँ
कहता हूँ सीधे शब्दों में
करता हूँ मैं तेज़ प्रहार
मैं विचार हूँ
एक स्वतंत्र विचार|

 

अभिव्यक्ति हूँ मैं उस व्यक्ति की
बेख़ौफ़ जिसकी सोच आज़ाद
तार्किक हैं बातें जिसकी
नैसर्गिक हो जिसका आचार
द्रष्टा है जो न्याय परखते
अन्यायी अधिवेशन का
वही है स्रष्टा अधिकारों और
नव विचार अन्वेषण का
हो प्रदीप्त उजाले में तुम
हैं तुम्हारे कुछ दायित्व
या फिर तुम सघन अंधेरे में हो
परछायीहीन लुप्त अस्तित्व
हूँ भ्रमित नहीं मैं वचनों से
ना उल्लेखित फूहड़ कथनों से
जो सत्य नहीं, निष्पक्ष नहीं,
उस पर करता हूँ मैं धिक्कार..
मैं विचार हूँ
एक स्वतंत्र विचार|

 

ना जाने मुझको सुनके क्यों
रुक रुक जाती है साँसें तुम्हारी
क्यों करते हो आंखें चौड़ी
कुछ ना बोलूँ? बस गाउँ मल्हारी?
सुन लूँ जो तुम कहते हो
या कहूँ तुम्हें जो सुनना है
या मजबूर कहूँ खुद को कि
आखिर मुझे तुम्हे ही चुनना है
कुपात्र हो तुम अगर तो
जुबां पे मेरी निंदा होगी
सफेद चेहरे पे स्याही मलती
कलम हमेशा ज़िंदा होगी
करता हूँ स्वतंत्र तुम्हें मैं
कि रखो विचार और ताली दो
ऐसा नही कि माइक पकड़ लो
और भारत माँ को गाली दो
ना याचक हूँ, ना वाचक हूँ,
ना क्रन्दन हूँ, ना हाहाकार,
सदियों से जो अविरल बही है
हूँ उसी नदी की मैं एक धार
मैं विचार हूँ
एक स्वतंत्र विचार।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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