” हाँ हाँ , मैं अर्जुन हूँ “

Posted by Nasin Nishant
November 16, 2017

Self-Published

#हाँ_हाँ_मैं_अर्जुन_हूँ

मैं अर्जुन हूँ लेकिन आज का । मेरे बाण में नहीं वरन् मेरी वाणी में ताकत है । मुझसे उपेक्षायें नहीं अपेक्षायें रखी जाती है वो भी समाज के कल्याण का और उत्थान का । मैं क्षत्रिय नहीं ,मैं शुद्र हूँ । रौद्र है मेरा और मैं स्वयं रूद्र हूँ । मुझमें धीर नहीं क्यूँकि मैं वीर हूँ । मैं स्वयं धीर हूँ कोई धीरज नहीं । गौर करो तो मैं स्वयं नीर हूँ, नीर में जन्मा कोई नीरज नहीं । मुझमें रवानी तो है मगर मैं उस जैसा कहानी नहीं । मैं कर्तव्य हूँ कोई व्यक्तव्य नहीं । जस उसके परेशानियों का बखान नहीं मैं । मैं तो तुम्हारी समस्याओं का अंतिम समाधान हूँ । मैं कारण हूँ तुम्हारी अपेक्षित प्रसन्नताओं का । मैं धारण हूँ सामाजिक समानताओं का । न मैं मत्स्य नाहि मैं कुरमा हूँ । न मैं वराह न वमण नाहि मैं नरसिम्हा हूँ । राम परशुराम कृष्ण कल्कि मुझमें नहीं । खोल आँखें देख मुझे , गरिमा बुद्ध की मुझमें निहित है जो सोच रहा तु वो समग्र संसार मुझमें विहित है । मैं कोई अवतार नहीं पर मूर्छा जाऊँ ऐसा धार भी नहीं । मैं खाली हूँ पर उस जैसा जाली नहीं । मैं प्रेम में बरसा वृष्टि हूँ , उस जैसा किसी कृष्ण का दृष्टि नहीं । मैं स्वयं नजर हूँ खुद में डगर हूँ । मैं खुला बयान हूँ कोई बंद मयान नहीं । मैं वचन हूँ मैं जनशक्ति हूँ कायरों की लालसा रूपी भक्ति नहीं । तुम मुझे महसूस कर सकते हो क्यूँकि तुम शोषितों के दर्द से छलका पहला अश्क हूँ मैं । यदि साथ दोगे मेरा तो उसी अश्क को लहरें बना दूँगा गर जो न दिये तो साथ तुम्हारे दरिया बन बिखर जाऊँगा ।
हाँ हाँ,मैं अर्जुन हूँ लेकिन आज का ।
आपका अर्जुन,
नसीन-निशांत ।

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