फ़रेब …बिना पैरों का

Posted by Sharda Dahiya
November 22, 2017

Self-Published

हमें बचपन में सिखाया जाता था की झूठ नहीं बोलना चाहिये या चोरी नहीं करनी चाहिये। उसके साथ ही हमारे मां बाप हमें ये भी सिखाते हैं कि कि कोई घर आए तो कह देना “पापा घर पर नहीं है , या कोई ताई ,चाची कुछ लेने आए कह देना नहीं है ” या फलां बात पापा को नहीं बतानी ,अपनी मम्मी को मत बताना जैसे जुमलों के साथ…

ये झूठ हमें कब फ़रेब की राह पर ले आता है हम भी नहीं समझ पाते फिर हमें भी उस फ़रेब को करने में कोई परहेज़ नहीं लगता। बचपन से उन छोटे छोटे झूठों से हम इस कद्र आदी हो गये होते हैं कि फिर सब नाजायज़ भी जायज़ ही लगता है। जिसने 5 रुपए चुराए हो उसके लिए 10 चुराना थोड़ा रिस्की होगा मगर गलत नहीं। मेरे कुछ अजीज़ दोस्त है जिनमें लड़के लड़कियां दोनों है।

ये लगभग जून के 20 -21 तारीख की बात है  एक दोस्त का फोन आया मुझे कई दिन से वो लगातार फेसबुक पर मुझे मैसेज कर रहा था कि फ्री हो जाओ तो बताना बात करनी है मैंने उसे कॉल किया वो थोड़ा दुखी था। मुझे वो थोड़ा असहज भी लग रहा था। मैंने बातों ही बातों में पूछ लिया की “शादी कब है जनाब ? और मैडम कैसी है ?” उसने कहा कि कैसी मैडम यार?  मैंने पूछा क्या हुआ उसने कहा कि उस लड़की ने पहले से शादी कर रखी थी और अब उसके माँ बाप घर आये माफ़ी मांगी, गलती मानी और जो दोस्त रिश्ता लेकर आया था वो भी दुखी है कि उससे ये गलती हुई। मैंने थोड़ा सांत्वना देते हुए कहा कि चलो सगाई ही हुई थी शादी नहीं हुई थी।

क्या तुम्हें कभी उसकी बातों से नहीं पता लगा की वो पहले से किसी के साथ है या और ? उस दोस्त ने कहा कि “वो बात करती ही कम थी और करती भी थी तो ऐसी की मेरी उस दोस्त का तलाक हो रखा है उस दोस्त का तलाक होने वाला है ऐसी सी और मैं कह भी देता था की यार मुझसे ऐसी बात ना किया कर मुझे नहीं पसंद आती ” बस उससे ज्यादा कुछ नहीं। मैंने कहा कि चलो अब भी पता लग गया कुछ नहीं बिगड़ा था। उसने कहा बिगड़ा तो कुछ नहीं मगर रहा भी कुछ नहीं। सगाई के बाद वाले पल कितने खास होते है तुम्हें नहीं पता कितने ही सपने देखते है हम। मुझे तो अब ये शादी जैसी चीज़े ही वाहियात लग रही हैं कल को किसी और से हो भी जाएगी शादी तो कैसे जुड़ेगा ये भरोसा जो यहाँ आकर बिखर गया है।जैसे तैसे बात समझा कर मैंने खत्म की।

2-3 दिन पहले मम्मी कह रही थी कि तुम्हारी वो फलां सहेली थी ना जो अक्सर घर आती थी उसकी सगाई हुई थी मई में उसका होने वाला पति पहले से शादीशुदा निकला मैंने पूछ लिया कैसे पता लगा,और मेरी दोस्त को शक नहीं हुआ क्या तो उन्होंने कहा की वो लड़का इस लड़की से कम ही बात करता था और लड़की ने ये सोच कर जल्दबाजी नहीं दिखाई की नया नया रिश्ता है शायद असहज़ होगा। एक दिन रात को सोते टाइम इस लड़की के पास एक लड़की की कॉल आई की “आप कौन बोल रही हो ? और जिसको आपने अभी मैसेज किया है व्ह्ट्स अप्प पर वो आपके क्या लगते है तो मेरी सहेली ने कहा कि मेरी सगाई हुई है उससे तो सामने वाली ने कहा की 4 हफ्ते पहले मुझसे शादी की है इसने और हम साथ रहते हैं।

तब लड़के ने दोनों लड़कियों को कहा की दूसरी कोई नहीं है और वो फोन कॉल महज़ मजाक भर था। बात घर तक पहुंची तो लड़के की बहन ने भी यही कहा। मेरी सहेली के घरवालों को तसल्ली नहीं हुई तो पंचायत की गई। उसके घर गये तब बात खुल गई और फैसला हुआ कि सगाई के फंक्शन में जितना खर्च हुआ वो लड़के वाले पूरा देंगे|

ये हर्जाना पैसों के लेन देन से भर जायगा मगर जो अरमान टूटे ,दिल दुखा ,सपने टूटे उनका क्या ? उसका हर्जाना कौन भरेगा?

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