Bachcha delhi ka

Posted by Sanjay Rao Yadav
November 13, 2017

Self-Published

रोज़ाना की तरह हमारा नार्मल दिन था।
नार्मल का मतलब पब्लिक की नज़रों में हम पुलिस वाले हमेशा नार्मल ही रहते हैं, कोई मर जाये या ज़िंदा रहे हमें कोई फर्क नही पड़ता।सच भी है कभी कभी पड़ता भी नही है । ये बातें बाद में पहले उस नार्मल दिन के बारे में बात करते है।
       तो उस दिन हमारी दिन की ड्यूटी थी मतलब सुबह 9 से शाम के 9 बजे तक।9.30 बज रहा था अभी हम दोनों लोग सरकारी बाइक से अपने क्षेत्र में भ्रमण पर थे अभिषेक बाइक चला रहा था और मैं वायरलेस हैंडसेट पकड़े पीछे बैठा था।सुबह सुबह ऐसे घूमने से अच्छा भी लगता है और ये भी कन्फर्म हो जाता है कि रात को किसी के घर या दुकान में स्वच्छ भारत अभियान तो नहीं चला दिया गया।और जब कोई परिचित ठेल वाला हाथ उठा के सलाम करता है तो महाराजाओं वाली फीलिंग आ जाती है।हैंड सेट के कुड कुड करते ही हम अपनी औकात पे आ गए और हैंड सेट को कान के पास करके सुनने का प्रयास करने लगे ,शायद कंट्रोल रूम से मैसेज था दूरी ज्यादा होने से हमें सुनाई नही दिया। थोड़ी ही देर में थाने के मुंशी जी(constable clerk)की आवाज हैंड सेट पर सुनाई दी, हमने बटन दबाकर रिप्लाई दिया कैरी ऑन।मुंशी जी कड़क आवाज में बोले कि देखो जा कर हींग की मंडी चौराहे पर क्या बबाल है कुछ लोग सूचना दे रहे हैं कि बोरी में कोई बच्चा पड़ा है। सूचना गंभीर थी तो हम लोगों ने हींग की मंडी चौराहे की तरफ अपनी बाइक दौड़ा दी।2 मिनट में हम घटनास्थल पर पहुंच गए ,काफी भीड़ इकट्ठा थी।भीड़ के तेवर देख के लग रहा था कि अब तक हम लोगों को काफी गालियां मिल चुकी थी लेकिन किसी की हिम्मत उस बोरी का मुँह खोलने की नही हुई जिसमें कोई बच्चा फड़फड़ा रहा था। 1 बार तो हम भी सकपका गए लेकिन जिम्मेदारी तो हमारी ही थी कि उस बोरी में बच्चा हो बम या कुछ और खोलनी तो हमें ही थी।अभिषेक को हैंड सेट पकड़ाकर में बोरी के पास बैठ गया,भीड़ लगभग मेरे ऊपर झुक गई जिसने लगभग ये सोच लिया था कि इसमें कोई छोटी बच्ची हो सकती है।मैं तो अब कुछ सोच भी नही पा रहा था।गांठ खोलते खोलते मैं लगभग खड़ा हो गया,बोरी का मुंह खुलते ही वो बच्चा बोरी से निकलकर सामने पतली गली में भाग गया हम सब उसको देखते रह गए क्योंकि बच्चा बिल्ली का था।भीड़ तो हँसी मज़ाक में लग गई और हमारी जिम्मेदारी थी कि जो वायरलेस सेट  पर अफरातफरी मची थी उसको शांत किया जाए तो हमने हैंडसेट की माइक बटन दबाकर मुंशी जी को बताया की जो बच्चे की सूचना आपने दी थी उसके बारे में चार्ली (कंट्रोल रूम) को बता दो कि बच्चा बिल्ली का था।मुंशी जी शायद हड़बड़ी में थे तो उन्होंने चार्ली को बताया कि जो बच्चा बोरी में था वो दिल्ली का था,चार्ली ने भी बिना सोचे ये सूचना उच्चाधिकारियों को दे दी कि बच्चा दिल्ली का था लेकिन अगला सवाल दिमाग मे आते ही ऑपरेटर ने पलटकर मुंशी जी से सवाल किया कि कैसे पता चला कि बच्चा दिल्ली का था अब मुंशी जी यही सवाल हमसे करते तब तक हमने उनका मोबाइल नंबर डायल कर दिया था और उनके कुछ पूछने से पहले ही हमने उन्हें बताया कि बच्चा बिल्ली का था ।मुंशी जी की आवाज से उनकी स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता था ।हमारी हँसी रुक नहीं रही थी।जो अधिकारी /कर्मचारी घटनास्थल को रवाना किये गए थे वो सभी हंसते मुस्कुराते वापस जा रहे थे ।

Youth Ki Awaaz is an open platform where anybody can publish. This post does not necessarily represent the platform's views and opinions.