गुजरात में भाजपा के चुनावी होर्डिंग्स क्या कहते हैं

दो तीन दिन से ऑफिस आते समय एक चीज़ नोटिस कर रहा था, एक जगह जहां सरकार की नीतियों का प्रचार करता हुआ होर्डिंग लगा था, उसे अब ढक दिया गया है लेकिन मज़ेदार बात ये रही कि कल इस ढके हुए होर्डिंग में माननीय नरेंद्र मोदी जी को नहीं ढका गया था। हो सकता है कोई मानवीय भूल हो, जिसे अब सुधार लिया गया है। बुलेट ट्रेन के समय जहां मोदी जी और जापानी प्रधानमंत्री श्री शिंज़ो अबे की होर्डिंग से सारे शहर को एक तरह से नहला दिया गया था, वह अब कहीं भी मौजूद नहीं है। पहली नज़र में इन सभी होर्डिंग को ढक देना या हटा देना मुझे समझ नहीं आया था, क्योंकि गुजरात में मोदी जी की होर्डिंग को इस तरह ढकने का कोई माद्दा नहीं रखता लेकिन अब ये समझ आ रहा है कि गुजरात राज्य में चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया गया है और अब यहां आचार सहिंता लगा दी गई है।

रास्ते में आते हुये एक जगह सोला ब्रिज पर सड़क के किनारे, एक बड़ा होर्डिंग सज-धज कर, अपने नए रूप में दिखाई दे रहा है। जहां नेताओं की तस्वीर बनी हुई है, यहां भी राजनीतिक प्रतिष्ठा को पूरा मान सम्मान मिला है। भाजपा के इस बोर्ड पर सर्वप्रथम और सबसे बड़ी तस्वीर लगी है वह मोदी जी हैं, इसके बाद श्री अमित शाह हैं, इसके पश्चात इसी श्रेणी के नेता भी इसी होर्डिंग में मौजूद है। लेकिन, जो सबसे ध्यान देने की दो बातें है वह की पार्टी का चुनावी निशान कमल, इस होर्डिंग में मौजूद सभी तस्वीरों के आकार के अनुपात में सबसे छोटा है। ये इस बात की ओर भी एक संकेत है कि आज अमूमन हर राजनीतिक पार्टी एक संगठन से ज़्यादा अपने सबसे मज़बूत नेता के कारण अपनी पहचान रखती है।

और दूसरी सबसे महत्वपूर्ण वजह जो कि यहां इस होर्डिंग में मौजूद है वह है एक स्लोगन जिसे भाजपा ने इस राज्य चुनाव में अपनाया है जिसे गुजराती में लिखा गया है હું છું ગુજરાત, હું છું વિકાસ ( मैं हूँ गुजरात, मैं हूँ विकास)

लेकिन इस बार, राज्य चुनाव के प्रचार में भारतीय जनता पार्टी, सिर्फ सड़क के किनारे लगे होर्डिंग से संतुष्ट नहीं है, बकायदा सोशल मीडिया पर भाजपा के राज्य काल के समय के गुणगान गाये जा रहे हैं, लेकिन जो सबसे ध्यान देने वाली बात है कि यहां एडवरटाइज़िंग में विकास के साथ-साथ, सुरक्षा और भ्रष्टाचार भी मुद्दे हैं लेकिन उससे भी दिलचस्प है कि 22 साल से गुजरात राज्य की सत्ता में मौजूद भाजपा, अपने समय काल में दी गयी सुरक्षा ओर भ्रष्टाचार मुक्त राज की तुलना, काँग्रेस के राज्य शासनकाल से कर रही है जो 1990 के बाद कभी भी गुजरात राज्य में अपना बहुमत साबित नहीं कर पाई। लेकिन भाजपा के विकास पर खिंचाई कर रही पोस्ट के बीच कभी-कभी जब सोशल मीडिया पर भाजपा का ये ऐड उभर कर आता है, यकीनन ये अपनी गंभीरता का एहसास एक सोशल मीडिया यूज़र पर नहीं करवा पाता।

इसी संदर्भ में, पार्टी के अमूमन सभी नेता टीवी पर हो रही बहस में 80 के दशक के गुजरात को याद करने से भी नहीं चूकते, यहां वह काँग्रेस के राज्य काल को याद करवायेंगे जब नदी के उस पार पुराने अहमदाबाद शहर में कर्फ्यू लगा होता था, और वह इसी खींचतान में अब्दुल लतीफ और उन माफिया डॉन का नाम लेने से भी नहीं हिचकिचायेंगे जिनकी एक समय अहमदाबाद शहर में तूती बोलती थी। यहां लतीफ का नाम लेकर साम्प्रदायिक तनाव वाले माहौल को याद करवाया जाता है। और इसी तर्ज पर भाजपा अपने राज्य काल में दी गई सुरक्षा का नगाड़ा बजाती है।

इसी दृष्टिकोण से एक और खबर आ रही है, जहां भाजपा की राज्य इकाई संजय लीला भंसाली द्वारा निर्देशित फिल्म पद्मावती की रिलीज़ डेट 1 दिसंबर से आगे बढ़वाने की मांग कर रही है।

तर्क ये दिया जा रहा है कि इससे हिंदू मुस्लिम साम्प्रदायिक भावना भड़क सकती है। लेकिन जिस तरह पद्मावती फिल्म की कहानी को बताया जा रहा है जहां अपनी इज़्जत की रक्षा के लिये रानी पद्मावती और कई राजपूत महिलाओं के साथ आग के हवाले हो जाती है लेकिन मुस्लिम शासक की गुलाम नहीं होती। वास्तव में जहां इस तरह नारी का बलिदान दिखाया जाएगा, वहां हिंदू वोट का ध्रुवीकरण होने से कैसे रोका जा सकता है? और ये तो भाजपा के पक्ष में ही है, यही वजह है कि व्यक्तिगत रुप से मुझे ये समझ नहीं आ रहा कि भाजपा रिलीज़ को आगे बढ़ाने की क्यो मांग कर रही है?

वही दूसरी ओर, बुलेट ट्रेन के उदघाटन के समय मोदी जी जापान के प्रधान मंत्री के साथ, अहमदाबाद की मशहूर मस्जिद सीदी सैय्यद की जाली, गये थे, ये अति महत्वपूर्ण है। हो सकता है कि मोदी जी इसे एक संकेत की तरह मुस्लिम समाज से संवाद कर रहे हों, लेकिन इस प्रयास से एक आम गुजराती नागरिक ज़रूर हैरान है लेकिन आश्चर्यचकित नहीं क्योकि 2015 में हुए पटेल आंदोलन के बाद गुजरात का किंग मेकर कहा जानेवाला पटेल पाटीदार समाज भाजपा के साथ-साथ मोदी जी से भी नाराज़ है वही पिछले दिनों हुई दलित घटनाओ के कारण, इस बार दलित समाज भी भाजपा से दूरी बना कर बैठा है। ऐसे में मुस्लिम समाज जो हमेशा भाजपा का विरोधी ही रहा है अगर वह भी भाजपा से अपनी दूरिया कम नहीं करता तो भाजपा की इस बार सत्ता की राह बहुत मुश्किल हो सकती है।

खैर, अगर हम उसी सोला ब्रिज पर लगे ‘मैं हूं गुजरात, मैं हूं विकास’ होर्डिंग पर आएं, तो बरसात के दिनों में भारी बारिश के चलते इसी ब्रिज पर बड़े-बड़े खड्डे हो गए थे। तेज़ गति से चलने वाली गाड़ियां रेंगने लगी थी और जाम लग जाता था। यही वजह है कि जिस विकास की हामी इस बार भाजपा भर रही है उस से एक आम नागरिक सहमत नहीं दिखाई दे रहा, अब ये चुनाव परिणाम ही बताएगा कि भाजपा अपने विकास को मत में बदल पाती है या नहीं।

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