प्रद्युम्न मर्डर केस : कितने और अशोक चढ़ेंगे इस सिस्टम की भेंट

प्रद्युम्न हत्याकांड तो आज भी सबके ज़हन में होगा, इस खबर ने हर देशवासी को हिला कर रख दिया था। वो अशोक कुमार नाम का कंडक्टर भी सभी को याद होगा जिसे न सिर्फ प्रद्युम्न की हत्या का दोषी बताया था बल्कि उस पर हत्या से पहले यौन शोषण का भी आरोप लगाया गया था। इन आरोपों ने शायद हर देशवासी खासकर कि हर मां-बाप का खून खौलाकर रख दिया था और लोग कानून को हाथ में लेकर अशोक पर ज्वाला बनके फूटना चाहते थे। लेकिन वो लोग भी क्या करें? उन्हें तो यही बताया गया था कि अशोक ही अपराधी है। ऐसे हर वो मां-बाप जिनके घर में प्रद्युम्न जैसे बच्चे हैं वो क्यों न आक्रोशित होते?

लेकिन वो कौन लोग हैं जिन्होंने अशोक को हत्या का दोषी बताते हुए उस पर यौन शोषण तक के आरोप लगाए? वो कोई और नहीं बल्कि वो हैं जिनके ऊपर कानून का ज़िम्मा है, जिन्हें हम पुलिस कहते हैं।

पुलिस के हाथ में ही रहता है कि वो असली अपराधी का पता लगाए और उसे सज़ा दिलवाए। इन्हीं पर भरोसा करके सबने अशोक को अपराधी मान लिया। लेकिन प्रद्युम्न के मां-बाप की इंद्रियां काम कर रही थी, उन्हें अंदेशा था कि उनके मासूम को अशोक ने नहीं बल्कि किसी और ने मारा है।

सब मान चुके थे कि केस तो साॅल्व हो चुका है और अपराधी भी धरा गया है, लेकिन प्रद्युम्न के मां-बाप अड़े रहे और सरकार को सीबीआई को मजबूरी में केस सौंपना पड़ा। जब तहकीकात में सच्चाई सामने आई तो अपराधी अशोक नहीं बल्कि ग्यारहवीं कक्षा में पढ़ने वाला उसी स्कूल का एक छात्र निकला (जैसा कि सीबीआई ने खुलासा किया और अब अशोक को भी कोर्ट से ज़मानत मिल गई है।) उसके रसूखदार परिवार से होने की भी बात निकली और वो अब शिकंजे में भी आ चुका है। मतलब पुलिस की थ्योरी झूठी निकली और उल्टा पुलिस के झूठ का ही पर्दाफाश हो गया।

यहां सोचने की बात है कि आखिर कैसे पुलिस ने अशोक को अपराधी बना दिया? क्या पुलिस ने उस रसूखदार परिवार के लड़के को बचाने के चक्कर में एक गरीब को अपराधी बना दिया, क्योंकि गरीब सबसे आसान शिकार होते हैं? इसका मतलब तो ये है कि पुलिस ने मृत बच्चे और उसके मां-बाप के साथ भी धोखा किया और फिर अशोक को फंसाकर उसको और उसके पूरे परिवार को बर्बाद करने का अपराध किया, साथ ही करोड़ों देशवासियों को भी धोखा दिया। मतलब ये कि यहां तो पूरे सिस्टम का ही कत्ल किया गया है।

आखिर कैसे पुलिस इस हद तक गिर सकती है और एक गरीब की ज़िंदगी लीलने को उतारू हो सकती है? फिर तो अगर सीबीआई जांच नहीं होती तो अशोक का जीवन खत्म होना तय था, साथ ही उसके परिवार का भी। लेकिन उसकी हालत तो अभी भी चिंताजनक है, वो बस ज़िंदा है फिलहाल लेकिन उसके मानसिक और शारीरिक ज़ख्म इतने गहरे हैं कि इनसे उबरने में उसे जाने कितना वक्त लग जाए?

अब तो प्रद्युम्न की हत्या का असली आरोपी भी सामने आ गया है, तो क्या उन पुलिसवालों पर सरकार कोई कार्रवाई करेगी जिन्होंने असली अपराधी को बचाने के लिए सिस्टम का, लोगों के भरोसे का और अपनी ज़िम्मेदारी का कत्ल किया है? इस खुलासे के बाद भी आखिर सरकार ने ज़िम्मेदार पुलिस वालों पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की है, जिनमें ऊपर के अफसर ज़्यादा ज़िम्मेदार हैं, जिन्होंने दुनिया के सामने चिल्ला-चिल्लाकर अशोक को अपराधी बताया था?

अशोक के साथ वाले उस समय कह रहे थे कि अशोक ऐसी प्रवृति का नहीं है, न वो ऐसा कर सकता है लेकिन किसी ने भी एक पल के लिए नहीं सोचा और मीडिया और हम दुनिया वाले बस टूट टड़े अशोक पर। खैर जब पुलिस ही अपना ईमान बेच दें तो फिर आम आदमी के लिए ज़्यादा सोचने के लिए कुछ बचता नहीं, लेकिन प्रद्युम्न के मां-बाप को सलाम जिनकी वजह से न सिर्फ उनके मासूम को इंसाफ मिलेगा बल्कि और भी कई ज़िंदगियां तबाह होने से बच जाएंगी।

बेल मिलने पर अशोक ने जो खुलासे किए है वो वाकई चौंकाने वाले हैं कि कैसे पुलिस वालों ने टाॅर्चर करके और झांसे देकर उसे अपराध कबूल करने को मजबूर किया। अब तो यहां ये भी साफ है कि अशोक पैसे लेकर असली अपराधी को बचाकर खुद अपराधी नहीं बना था, क्योंकि उसे फिर अपराध कबूल करवाने के लिए इतनी यातनाएं देने की ज़रूरत ही नहीं पड़ती।

इंसानियत, ज़िम्मेदारी और भरोसे को ऐसे पुलिसवालों ने कुचल के रख दिया है, गरीबी और लाचारी इनका शिकार बन गई। असली अपराधी को बचाने के लिए बहुत बड़ी सौदेबाज़ी हुई है। शायद कोई बहुत बड़ा राजनीतिक दबाव भी रहा होगा। स्कूल प्रंबधन भी कैसे इन सब से अंजान रह सकता है? इन्होंने भी असली अपराधी को बचाया होगा, मतलब प्रद्युम्न के अपराधी तो बहुत लोग है जिनका आपस में गठजोड़ है।

सिस्टम में आज पैसे और रसूख के आगे गरीब पीड़ित है, लाचार है। क्योंकि वो रोता नहीं है, लड़ने के लिए उसके पास इतना धन नहीं है और इस तरह उसके साथ कई और ज़िंदगियां भी खत्म हो जाती हैं। वो कई बार गरीबी से मजबूर भी हो जाता है।

प्रद्युम्न के केस के बाद एक काली सच्चाई फिर से सामने आई है जो बताती है कि ऐसे देश में न जाने ऐसे कितने अशोक होंगे जिन्हें गरीबी ने अपराधी बना दिया होगा और असली अपराधी आज भी खुली हवा में मौज काट रहें होंगे।

फोटो आभार: getty images

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